SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

आटे से उठी थी आग, अब खून से सन गया PoJK; 3 साल का तांडव और लाशों पर मुहर लगाती PAK सरकार!

PoJK पिछले 3 साल से लगातार उबल रहा है. वहां पर लोग अपने अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं लेकिन हर बार गोलियां चलाकर उनकी आवाज शांत की जा रही है.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 25, 2026, 10:28 PM IST | Updated: Oct 25, 2026, 10:35 PM IST
Image Credit: पीओजेके में अराजकता फिर भड़की
Join

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलकोट में मई 2023 में आटा डिपो के बाहर शुरू हुआ धरना आज पूरे इलाके में आग बन चुका है. पिछले तीन साल में मुनीर-शहबाज की सरकार ने लोगों की वैध मांगों का जवाब गोलियों, प्रतिबंधों और इंटरनेट बंदी से दिया है. वहीं इसी अवधि में भारत के जम्मू कश्मीर ने शांतिपूर्ण मतदान किया और रिकॉर्ड निवेश जुटाया.

PoJK में इस साल 27 जुलाई 2026 को वहां की असेंबली के चुनाव का पहला चरण था. उसी दिन रावलकोट में ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के समर्थक मुजफ्फराबाद की ओर बढ़े. उनकी मांगों का समाधान करने के बजाय पुलिस और पाकिस्तानी फौज ने गोलियां चलाकर 18 प्रदर्शनकारियों को मार डाला.

एमनेस्टी इंटरनेशल ने घातक बल प्रयोग की सूचनाओं पर चिंता जताते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की. खुद मुख्य चुनाव आयुक्त गुलाम मुस्तफा मुगल ने इसे क्षेत्र के इतिहास का सबसे कठिन चुनाव कहा. लेकिन यह हिंसा अचानक नहीं भड़की, बल्कि असल में पीओजेके तीन वर्ष से उबल रहा है.

मई 2023: आटे से उठी चिंगारी

मई 2023 में रावलकोट के सप्लाई बाजार में आटा डिपो के बाहर कुछ लोगों ने गेहूं के बढ़ते दामों के विरोध में धरना शुरू किया. ये आंदोलन 17 सितंबर 2023 को JAAC के रूप में संगठित हुआ. उसने 38 सूत्री मांगपत्र तैयार किया, जिसमें सस्ती बिजली, सस्ता आटा, शासक वर्ग के विशेषाधिकारों की समाप्ति और विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटें हटाने की मांगें थीं.

मई 2024: रेंजर्स की गोलियां

पुलिस ने 8 और 9 मई 2024 की रात लगभग 70 कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया. प्रदर्शन तेज हुए तो पीओजेके सरकार ने दो दिन का अवकाश घोषित कर पाकिस्तान से अर्धसैनिक बल मंगाए. इसके बाद मुजफ्फराबाद में पाकिस्तान रेंजर्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाकर कम से कम तीन लोगों को मार डाला. इसके पश्चात इस्लामाबाद ने 23 अरब रुपये देकर 40 किलो आटे का दाम 3,100 से घटाकर 2,000 रुपये किया, पर विशेषाधिकार समाप्त करने और शरणार्थी सीटें हटाने की मांगें अनसुलझी छोड़ दीं.

सितंबर-अक्टूबर 2025: बंद और संचार ठप

JAAC ने सितंबर 2025 में 29 सितंबर से पूरे क्षेत्र में बंद और चक्का जाम की घोषणा की. संघीय मंत्रियों के साथ 13 घंटे चली वार्ता किसी परिणाम तक नहीं पहुंची. पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय ने मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद करवा दीं. PoJK में 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चले बंद ने कम से कम 10 लोगों की बलि ले ली.

जून 2026: प्रतिबंध, बंदी और 24 लोगों की मौत

पीओजेके की गुलाम सरकार ने 5 जून 2026 को आतंकवाद-विरोधी अधिनियम के अंतर्गत JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया. उसी दिन उसने मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया. अगले दो सप्ताह में हिंसा ने कम से कम 24 लोगों के प्राण लिए, जिनमें 20 नागरिक थे. पुलिस ने 515 लोगों को पकड़ा, शासन ने पेट्रोल पंप बंद करवाए और बैंकों ने एटीएम बंद कर दिए. शासन ने JAAC के चार वरिष्ठ नेताओं को पकड़वाने वालों के लिए पुरस्कार घोषित किए और सैकड़ों आपराधिक मामले खोले.

जुलाई-अगस्त 2026: रक्तरंजित चुनाव

चुनाव होने पर भी लोगों का भरोसा नहीं लौट पाया. पहले चरण में केवल 46 प्रतिशत और दूसरे चरण में लगभग 50 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2016 और 2021 में यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से ऊपर था. 31 जुलाई से व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक, पेट्रोल पंप और सार्वजनिक परिवहन फिर बंद हो गए. स्थानीय निवासियों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार जून से अब तक 50 से अधिक लोगों ने प्राण गंवाए. हालांकि, शासन ने कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया. इंटरनेट बंदी 50 दिन पार कर गई.

ये भी पढ़ें- PAK में बलूच लड़ाकों का कहर, SSG कमांडोज को ढूंढ-ढूंढकर बना रहे निशाना; 'ऑपरेशन अलमास' से खौफ में आई पाकिस्तानी सेना

गिलगित-बाल्टिस्तान में भी राजमार्ग जाम

जनवरी 2025 में हुंजा के लगभग 1,000 लोगों ने शून्य से 15 डिग्री नीचे के तापमान में बिजली के लिए काराकोरम राजमार्ग पर धरना दिया. अप्रैल 2026 में दियामेर-भाशा बांध से विस्थापित परिवारों ने थोर दास पर राजमार्ग जाम किया. जुलाई 2026 में गिलगित और चिलास के निवासियों ने दस घंटे से अधिक की बिजली कटौती के विरोध में फिर यही मार्ग रोका.

इस पार: गोली नहीं, मतपेटी

वहीं, नियंत्रण रेखा के इस पार जम्मू-कश्मीर ने लोकतंत्र का उत्सव मनाया. लोकसभा के 2024 के चुनाव में प्रदेश की जनता ने 58.46 प्रतिशत मतदान किया, जो 35 वर्षों में सबसे अधिक था. वहीं, कश्मीर घाटी में मतदान 2019 की तुलना में 30 अंक बढ़ा. उसी वर्ष दस वर्ष के अंतराल के पश्चात हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने 63.88 प्रतिशत मतदान किया.

ये भी पढ़ें- पाकिस्तान की खिलाफत: PoK में फिर आंदोलन, 27 अक्टूबर को 'Black Day', एक नवंबर तक का शेड्यूल घोषित

भारतीय चुनाव आयोग के तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने शांतिपूर्ण मतदान को लोकतांत्रिक भावना की विजय कहा था. इस स्थिरता ने निवेशकों का भरोसा भी जीता. जम्मू-कश्मीर ने 2025-26 में 5,824 करोड़ रुपये का औद्योगिक निवेश आकर्षित किया, जो 2021 से पहले के वार्षिक औसत का 13 गुना से अधिक है.

मतपेटी बनाम गोली

तीन वर्षों की इस कहानी में पाकिस्तान ने हर बार एक ही उत्तर दिया है. वह है, पहले गोली, फिर प्रतिबंध, फिर इंटरनेट बंदी और अंत में थोड़ी-सी सब्सिडी. जम्मू-कश्मीर के लोग अपनी बात मतपेटी से कहते हैं और अपनी सरकार चुनते हैं. वहीं, पीओजेके के लोगों को अपनी बात कहने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है और वहां शासन उनका सामना गोलियों से करता है.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES