समंदर में छोटा पैकेट, बड़ा धमाका: जहाज को बना देते हैं लंगड़ा, इंजन में लग जाती है आग; कितने खतरनाक हैं होर्मुज के 'चुंबक बम'
होर्मुज स्ट्रेट में पनामा के झंडे वाले एक जहाज पर लिम्पेट माइंस से हमला किया गया. इसको चुंबक बम भी कहते हैं. आखिर यह बम क्या है और कैसे काम करता है, चलिए आपको बताते हैं.
पनामा के झंडे वाले एक ऑयल टैंकर पर लिम्पेट माइंस से हमला किया गया. इस ऑयल टैंकर में 27 भारतीय क्रू मेंबर्स शामिल थे. लिम्पेट माइंस को चुंबक बम भी कहा जाता है.
रॉयटर्स के मुताबिक, एमटी लुईस-1 नाम के जहाज को इस माइंस से निशाना बनाया गया. इसके धमाके की वजह से इंजन रूम में आग लग गई और जहाज कुछ वक्त के लिए ठप हो गया. हालांकि, क्रू मेंबर्स ने सूझबूझ से आग पर काबू पा लिया और टैंकर आगे बढ़ गया. फरवरी से शुरू हुई अमेरिका-ईरान की जंग के बाद से लिम्पेट माइंस के सफल हमले की यह पहली घटना है.
यह बम क्या है और समुद्र में कैसे काम करता है, चलिए आपको बताते हैं.
कैसी दिखती हैं लिम्पेट माइंस?
लिम्पेट माइंस देखने में छोटे आकार के समुद्री घोंघे जैसे होते हैं, जो चट्टानों से मजबूती से चिपके रहते हैं.
लिम्पेट माइन्स को न तो समुद्र की तलहटी में बिछाया जाता है, और न ही इनका मकसद किसी पूरे जहाज को डुबोने जैसा बड़ा नुकसान पहुंचाना होता है. इसके बजाय, ये छोटी और कोन के आकार की माइन्स 'मिशन किल' के लिए होती हैं. ये जहाज को ठप कर देती हैं. इसके बाद वह किसी भी मिशन में काम करने लायक नहीं बचता.
लगी होती है चुंबक
नेवल टेक्नोलॉजी का ही एक प्रोडक्ट है लिम्पेट माइंस. इन माइंस में एक कंप्यूटर से कंट्रोल होने वाला डेटोनेशन सिस्टम होता है. यह शिप के हल से जुड़ा होता है और इसे कोई भी स्वीमर, डाइवर या फिर फ्रॉगमैन आसानी से लगा सकता है. लिम्पेट माइंस का वजन काफी हल्का होता है, इसको आसानी से ले जाया जा सकता है और टारगेट पर आसानी से ही फिट भी किया जा सकता है. इनमें चुंबक भी लगी होती है, जिससे डाइवर्स को शिप तक पहुंचने में मदद मिलती है.
ग्रीस के मैरीटाइम रिस्क मैनेजमेंट ग्रुप मारिस्क्स ने एक नोट में कहा, 'एक छोटी नाव का किसी गुजरते हुए टैंकर के पास पहुंचना, उस पर विस्फोटक डिवाइस लगाना और फिर वहां से निकल जाना यह सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता की बात है, खासकर तब जब यह घटना होर्मुज के बिजी शिपिंग रूट्स पर हो.'
लिम्पेट माइन्स कैसे काम करती हैं?
इन माइन्स में छोटे विस्फोटक होते हैं, जो एक टाइम-डिले डिवाइस या फ्यूज के जरिए फटते हैं. इसे लगाने वाला शख्स ही इसका समय सेट करता है. कुछ मॉडल्स में 'एंटी-रिमूवल' फीचर होता है; अगर कोई इसे जहाज के ढांचे (हल) से हटाने की कोशिश करता है, तो यह तुरंत फट जाती है.
ये माइन्स जहाज के अहम हिस्सों को निशाना बनाती हैं, जैसे कि इंजन, स्टीयरिंग गियर या प्रोपल्शन सिस्टम, ताकि जहाज आगे के सफर पर जाने लायक ना बचे.
लिम्पेट माइन के लिए सबसे बड़ा फायदा इसके आसपास मौजूद पानी है। पानी के बाहर, यह माइन जहाज को शायद ही कोई बड़ा नुकसान पहुंचा पाए, लेकिन समुद्र के अंदर पानी का दबाव विस्फोट की ताकत को कई गुना बढ़ा देता है, जिससे जहाज में बड़ा छेद हो सकता है या उसे भारी नुकसान पहुंच सकता है.
इन माइन्स को हटाना एक खास काम है, जिसे केवल इस काम में माहिर तकनीशियन ही कर सकते हैं. इन छोटे उपकरणों को कम खतरनाक नहीं समझना चाहिए. पानी के अंदर होने वाला विस्फोट किसी शख्स के साइनस, फेफड़ों या शरीर के किसी भी जरूरी अंग को आसानी से गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
क्या लिम्पेट माइन्स नई हैं?
एक शब्द में कहें तो नहीं. इनका इस्तेमाल सेकंड वर्ल्ड वॉर के दौरान भी किया गया था और दुनिया भर की ज्यादातर नौसेनाओं के पास ये मौजूद हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने 1970 के दशक की शुरुआत में इनका इस्तेमाल किया था.
अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान, होर्मुज स्ट्रेट में माइन्स की वजह से कई जहाजों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं. यूरोपीय देशों ने इन माइन्स को हटाने में मदद करने की बात कही थी, लेकिन इस क्षेत्र में माइन्स के कारण आग लगने या नुकसान होने की घटनाएं अब भी सामने आ रही हैं.