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US Midterm Election: अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव ( Midterm Election) होने वाले हैं. इसको लेकर एक हफ्ते से भी कम समय बचा है. हालांकि, एक-एक घड़ी रिपब्लिकन पार्टी के लिए खतरे की घंटी बनते जा रही है. सट्टा बाजार के अनुमानों के मुताबिक, डेमोक्रेट्स को बहुमत हासिल करने की संभावना 90 प्रतिशत से ज्यादा बताई जा रही है. अगर यह अनुमान सही होता है, तो ट्रंप के लिए आगे 2 सालों में आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, चुनाव के लिए बचे इतने कम समय में एक और बड़ी मुसीबत सामने आई है, जिसने बड़ा खतरा पैदा कर दिया है.
चुनाव से पहले अमेरिका में इलेक्शन कमीशन की वेबसाइट पर साइबर अटैक हुआ है, जिसके चलते फंडिंग और ब्योरा रजिस्टर करने वाला इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बुरी तरह प्रभावित हुआ है. 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स की ओर से अमेरिकी फेडरल इलेक्शन कमीशन (FEC) के सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की गई, जिसके चलते EC को अस्थायी रूप से अपनी सर्विस बंद करनी पड़ी.
सिस्टम हैक होने पर चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि इस समय FEC का इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग सिस्टम बंद है और IT टीम सर्विस को वापस शुरू करने के लिए एक्टिवली काम कर रही है. FEC के एक ऑफिसर ने चुनावी नियमों का पालन कराने वाली कंपनियों को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि FEC के सिस्टम में सेंध लगाने का प्रयास कर रहे हैं, जिसके चलते इंटरनेट के जरिए उपलब्ध सर्विसेज को अस्थायी तौर पर बंद करनी पड़ी. सिस्टम सोमवार ( 26 अक्टूबर 2026) से बंद था. FEC ने मंगलवार ( 27 अक्टूबर 2026) को बताया कि समस्या पहचान ली गई है और इसे ठीक किया जा रहा है.
सिस्टम हैक होने के अलावा ट्रंप की पार्टी के लिए एक और मुसीबत सामने आई है. US मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सट्टा बाजार पालीमार्केट और कालशी के अनुसार प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स के कंट्रोल की संभावना 91-92 प्रतिशत है. वहीं, कालशी ने रिपब्लिकन की जीत की संभावना केवल 9 प्रतिशत ही आंकी है. मई 2026 में कालशी का अनुमान था कि डेमोक्रेट्स को 226 सीटें मिलेंगी, लेकिन अक्टूबर में जीत का आंकड़ा बढ़कर 238 पहुंच गया. बता दें कि प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों पर वोटिंग होनी है और बहुमत पाने के लिए 218 सीटें आवश्यक हैं.
मिड टर्म इलेक्शन से पहले कई अरब देशों को चुनाव के बाद एक छोटे, लेकिन तेज सैन्य हमले के लिए तैयार रहने की सूचना दी है. 'WJS' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना अपने एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए टेक्सास से पैट्रियट बैटरी भेज रही है. साथ ही, वह अपने सैनिकों को उन ठिकानों से हटा रही है, जहां उन पर ईरानी हमले का खतरा हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस का कहना है कि वह इस सेंसिटिव मिलिट्री प्लानिगं पर कोई टिप्पणी नहीं करेगा. हालांकि, उसने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी विकल्प खुले रखे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार न आ सकें.'