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World News: अमेरिका में एक बार फिर रूसी तेल को लेकर बवाल मचा है. यहां डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों प्रमुख दलों के लॉमेकर्स के एक समूह ने देश के बड़े बैंक, पोर्ट अथॉरिटी और फ्यूल डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे रूसी डीजल को इंपोर्ट करते हैं, तो उन्हें क्रिमिनल और सिविल जैसी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के साथ अपनी एनर्जी पॉलिसी का बचाव किया है. ये चिट्ठी शनिवार को सीनेट की विदेश संबंध समिति के वरिष्ठ सदस्यों जीन शाहीन, रॉन वाइडन, शेल्डन व्हाइटहाउस, क्रिस कून्स, एलिजाबेथ वॉरेन और रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के वरिष्ठ सदस्य ग्रेगरी डब्ल्यू मीक्स की ओर से भेजे गए थे. समिति ने सोमवार को इन पत्रों को सार्वजनिक किया.
लॉमेकर्स ने अपने पत्र में लिखा कि अमेरिका में रूसी डीजल का कोई भी आयात गंभीर कानूनी सवाल खड़े करता है और इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई या संसदीय जांच हो सकती है. उन्होंने कहा,' जो कंपनियां अमेरिकी कानून का उल्लंघन करते हुए उत्पाद आयात करती हैं, वे खुद को क्रिमिनल और सिविल दोनों तरह की कानूनी जिम्मेदारियों के जोखिम में डाल सकती हैं.' ये पत्र जेपी मॉर्गन चेय, बैंक ऑफ अमेरिका, सिटीग्रुप, वेल्स फार्गो बैंक, गोल्डमैन सैक्स और मॉर्गन स्टेनली के मुख्य अधिकारियों को भेजे गए. इसके अलावा टेक्सास के ह्यूस्टन, कॉर्पस क्रिस्टी और ब्यूमोंट पोर्ट और न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी पोर्ट अथॉरिटी के प्रमुखों को भी पत्र भेजे गए.
सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप की 9 अक्टूबर की घोषणा और अमेरिकी वित्त मंत्रालय के जनरल लाइसेंस 135 का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2022 के 'एंडिंग इम्पोर्टेशन ऑफ रशियन ऑयल एक्ट' के तहत आम तौर पर रूसी ऊर्जा उत्पादों के आयात पर रोक है, जब तक कि राष्ट्रपति कांग्रेस को यह प्रमाणित न करें कि रूस ने यूक्रेन में अपनी सैन्य कार्रवाई बंद कर दी है. पत्र में कहा गया,' रूस को वैश्विक बाजार में खुलकर डीजल बेचने की अनुमति देना अमेरिका के सुरक्षा हितों को नुकसान पहुंचाता है और यूक्रेन के लोगों के साथ विश्वासघात है.' सांसदों के अनुसार, सार्वजनिक रिपोर्टों और जहाजों की ट्रैकिंग से पता चलता है कि रूसी डीजल लेकर आने वाले जहाज इस महीने के अंत तक ब्यूमोंट और न्यूयॉर्क/न्यू जर्सी के बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं. उन्होंने संबंधित कंपनियों से कहा कि वे इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और 28 अक्टूबर तक जवाब दें.
इस बीच, प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका समिति के वरिष्ठ सदस्य जेमी रास्किन ने भी ऑयल इंडस्ट्री को पत्र लिखकर इस व्यवस्था के खिलाफ चेतावनी दी है. दूसरी ओर राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में इस फैसले का बचाव किया. ट्रंप ने कहा कि रूस के साथ हमने जो समझौता किया, उसका मकसद दुनिया के बाजार में ऑयल की सप्लाई बढ़ाना था. उन्होंने कहा कि हम ऑयल इंडस्ट्री के बंधक बनकर नहीं रह सकते. ट्रंप ने इस दौरान अपने विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की मॉस्को यात्रा का भी जिक्र किया. रूसी डीजल का यह मुद्दा भारत में भी करीबी नजर से देखा जा रहा है. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले सबसे बड़े देशों में शामिल हो गया था. रूस से ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिकी नीति पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में विवाद का विषय रही है. वॉशिंगटन भारत की ओर से रूसी तेल खरीदने पर पहले अतिरिक्त शुल्क भी लगा चुका है. फिलहाल अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने लॉमेकर्स के पत्रों पर कोई तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है. ( इनपुट- IANS)