इजरायल को मान्यता नहीं, फिर ‘यहूदी कारोबारी’ के दरवाजे पर क्यों पहुंचे शहबाज! पाकिस्तान को गर्त से निकालने की कैसी मजबूरी?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लंदन में दो ऐसे लोगों से मुलाकात कर ली है कि खुद उनके देश में उसका विरोध होने लगा है. कई लोग कह रहे हैं कि पैसे के लिए कुछ शहबाज ऐसा कैसे कर सकते हैं.
पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को लेकर खबर आ रही है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पैसों के लिए 'दुश्मनों' से भी हाथ मिलाना शुरू कर दिए हैं. उन्होंने 29 सितंबर को अपने लंदन दौरे के दौरान Rothschild & Co के दो सीनियर अफसरों के साथ मुलाकात की है. इनके नाम Lord Mark Sedwill और Majid Ishaq हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि यह मुलाकात पाकिस्तान की जियो एकोनॉमिक प्रायोरिटीज, कैपिटल मार्केट्स, इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और पाकिस्तान में विदेशी निवेश को बढ़ाने के मकसद से की गई थी.
हालांकि उनकी इस मुलाकात को लेकर उन्हीं देश में विवाद पैदा हो गया. सबसे ज्यादा सवाल इमरान खान समर्थकों और सरकार के आलोचकों की तरफ से उठ रहे हैं. इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' के नेता एहतशाम मुस्तफा के अलावा कई पत्रकार और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुलाकात का विरोध कर रहे हैं. मुस्तफा एहतशाम ने कहा कि शहबाज शरीफ ने लंदन में Zionist Rothschild परिवार के प्रतिनिधियों से मुलाकात की.
कौन कर रहा है विरोध?
लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता हुमैरा वजाहत ने कहा कि हमें पाकिस्तान के लिए इजरायल की भू-रणनीति की जरूरत नहीं है. इसके अलावा पाकिस्तानी कॉलमिस्ट राजा मुनीब ने कहा,'शहबाज शरीफ Rothschild' से जुड़े यहूदी परिवार से क्यों मुलाकात कर रहे हैं. उन्होंने तंज करते हुए कहा कि क्या पैसे जुटाना फिलिस्तीन की आजादी से ज्यादा जरूरी हो गया है.
शहबाज सरकार की इस मुलाकात का विरोध क्यों हो रहा है, यह तो अब लगभग साफ हो चुका है, फिर भी आपको बता देते हैं कि विरोध असली वजह क्या है और Rothschild & Co क्या है? Rothschild & Co दुनिया की एक बड़ी वित्तीय सलाहकार कंपनी है. इस कंपनी का काम सरकारों को पैसे, निवेश और बड़े कारोबारी सौदों से जुड़े मामलों में सलाह देती है. बड़े पैमाने पर पैसा जुटाने और कैपिटल मार्केट से जुड़े मामलों में भी काम करती है. इस कंपनी का कई देशों में कारोबार भी है. कहा जाता है कि Rothschild परिवार का इतिहास यूरोप के एक पुराने यहूदी बैंकिंग परिवार से जुड़ा है और परिवार के कुछ मेंबर्स का फिलिस्तीन में यहूदी बस्तियों और यहूदी मूवमेंट्स से भी संबंध रहा है.
इजरायल को लेकर क्या है पाकिस्तान की नीति?
पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो इजरायल को आधिकारिक मान्यता नहीं देते. पाकिस्तान 1967 से पहले की सरहदों की बुनियाद पर एक आजाद फिलिस्तीन देश बनाने का समर्थन करता रहा है. इसके अलावा पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक उसके पासपोर्ट पर भी लिखा है कि यह दस्तावेज इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है.
इमरान खान भी 'यहूदी' को लेकर घिर चुके हैं
हालांकि पाकिस्तान में इस तरह का विरोध पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ भी इस तरह की बातें कहीं गई हैं. इमरान खान ने 1995 में ब्रिटिश सोशलाइट जेमिमा गोल्डस्मिथ से शादी की थी. जेमिमा के पिता ब्रिटिश कारोबारी सर जेम्स गोल्डस्मिथ थे और उनके परिवार में यहूदी वंश की पृष्ठभूमि थी. जेमिमा ने खुद भी अपने यहूदी पारिवारिक संबंधों के बारे में बात की है. इमरान खान पर 'Jewish lobby का एजेंट' होने जैसे आरोप लगे थे. 2013 के आसपास यह आरोप चुनावी राजनीति में भी काफी चर्चा में रहा था.