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Explainer: UN में शहबाज की 4 एंट्री, जयशंकर के 4 पलटवार! 2022 से 2026 तक कैसे जलील हुआ पाकिस्तान?

विदेश सचिव से विदेश मंत्री तक के करियर में सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने दुनिया के हर मंच से पाकिस्तान की बखिया उधेलते हुए उसे आतंकवाद के मुद्दे पर बेनकाब किया है. संयुक्त राष्ट्र के सालाना जलसे में एक बार फिर उन्होंने शराफत का नकाब चढ़ाकर भाषण दे रहे शहबाज शरीफ का असली चेहरा बेनकाब कर दिया.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Sep 27, 2026, 07:27 AM IST | Updated: Sep 27, 2026, 04:51 PM IST
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संयुक्त राष्ट्र में बीते एक दशक में पाकिस्तान के खिलाफ भारत का रुख लगातार आक्रामक और भाषा धारदार हुई है. इसकी ताजा मिसाल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करने के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर के संबोधन में दिखी. जहां यूएन के मंच से जयशंकर ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी औकात बताते हुए भारत के अंदरूनी मामलों से दूर रहने और सीमापार आतंकवाद को फौरन बंद करने की चेतावनी दी है. अपने भाषम में यूं तो जयशंकर ने दुनिया के तमाम ज्वलंत मुद्दों पर भारत का नजरिया दुनिया के सामने रखा. लेकिन उनके भाषण का मुख्य केंद्र पाकिस्तान और आतंकवाद की जुगलबंदी पर रहा.

भारत ने यूएन के मंच से कहा, 'आतंकवाद के स्पॉन्सरों को ये नहीं भूलना चाहिए कि भारत इस मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के मोड में काम कर रहा है. भारत की अमानत में खयानत डालने वालों को अंजाम बहुत बुरा होगा, कुछ ऐसा होगा जैसा उन्होंने सोंचा भी नहीं होगा.

UNGA में जयशंकर ने PAK को लताड़ा

जयशंकर ने पाकिस्तान को लताड़ लगाते हुए कहा कि भारत ने अपने दुश्मन को हमेशा मुंहतोड़ जवाब दिया है और आगे भी वैसे असाधारण और कड़े जवाब देता रहेगा. जयशंकर ने अपने भाषण में कहा कि आतंकवाद शांति के लिए एक बड़ा खतरा है. यह खतरा किसी देश से प्रायोजित हो सकता है और इसका मकसद सीमा-पार से होने वाला आतंकवाद है, जो वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बनाता है. ऐसी गतिविधियों में शामिल सरकारों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए. आतंकवाद पर हमारी जीरो-टॉलरेंस नीति में किसी तरह की ढील नहीं होनी चाहिए. वहीं आतंकी फंडिंग की जांच कर उसे रोकना चाहिए.'

जयशंकर ने आगे कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के हर सदस्य को खुद से पूछना चाहिए कि वे क्या कर सकते हैं. विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के बीते चार सालों के भाषण पर नजर डालें तो क्या निकलकर आता है, आइए बताते हैं.

शहबाज शरीफ का कार्यकाल और जयशंकर का धारदार वार

पाकिस्तान में इमरान खान की तत्कालीन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने से पैदा हुए संवैधानिक संकट के चलते शहबाज शरीफ को पहली बार अप्रैल 2022 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई. 2024 में हुए आम चुनावों के बाद शहबाज दूसकी बार पीएम बने. उसके बाद जब-जब शहबाज शरीफ यूएनजीए में एजेंडा चलाने के मकसद से गए, एस जयशंकर और विदेश विभाग के अफसरों ने उन्हें तबीयत से लपेटते हुए पाकिस्तान के एक-एक झूठ की पोल खोलकर शरीफ के चेहरे पर चढ़ा शराफत का नकाब उतार फेंका.

यूएनजीए में पाकिस्तान का 'डिप्लोमेटिक इलाज

2022 में शहबाज शरीफ को जयशंकर ने करारा जवाब दिया था.

2023 में UNGA के 78वें अधिवेशन में शहबाज शरीफ नहीं गए थे, तब भी पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का भारत ने करारा जवाब दिया था. 

2024 में शहबाज के भाषण के बाद राइट टू रिप्वाई के तहत भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भौविका मंगलानंदन ने दिया था. तब उनके कड़े संदेश की भाषा ये थी कि कुछ लोग आतंकवाद को पॉलिटिकल टूल और पॉलिटिकल पॉलिसी की तरह इस्तेमाल कर रहे है.

2024 में UNGA के 79वें अधिवेशन में जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लेकर कहा कि उसकी 'क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म' की नीति कभी सफल नहीं होगी और उसे भारत से किसी तरह की छूट की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. तब उन्होंने आतंकवाद से जुड़े मामलों के नतीजे भुगतने की चेतावनी दी थी. 

2025 में UNGA के 80वें अधिवेशन तक आते-आते जयशंकर के बयानों का संदर्भ और आक्रामक हो गया. पहलगाम आतंकी हमले के बाद जयशंकर ने कहा कि जो देश आतंकवाद को 'स्टेट पॉलिसी' बना चुके हैं और इस तरह उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के मामले में निशाने पर लिया.

2026 में शहबाज ने 81वें UNGA में 25 सितंबर को भाषण दिया और अगले दिन जयशंकर ने पाकिस्तान को 'सीरियल प्रैक्टिशनर ऑफ टेररिज्म' बताते हुए ये साफ किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत जवाब देने में देर नहीं लगाएगा.

2026 में पेटल गहलोत ने शहबाज शरीफ के झूठ की बखिया उधेलते हुए उन्हें 'फॉर्म 47' सरकार के प्रधानमंत्री की हैसियत समझाते हुए पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा का अंत कर दिया.

इस तरह यूएन में अब तक शहबाज शरीफ की चार एंट्री पर भारतीय विदेश मंत्री और यूएन में तैनात अफसरों ने अपने-अपने तरीकों से पाकिस्तान को आतंकवाद का रहनुमा बताते हुए उसका 'डिप्लोमेटिक इलाज' करके उसका स्याह सच दुनिया को दिखाया है.

हाफिज सईद जैसे तमाम वैश्विक आतंकवादी अभी भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाक फौज के सेफ हाउस में दुबके बैठे हैं. एफएटीएफ (Financial Action Task Force) के चाबुक यानी ब्लैकलिस्टेड होने से बचने के लिए उसने कुछ आतंकियों के खिलाफ दिखावे की कार्रवाई की है, लेकिन भारत ने उसकी ऐसी चालों की पोल खोल दी है.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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