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अमेरिका के अटलांटा में G-20 देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक चल रही है. इस बैठक के पहले ही दिन ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ग्रुप फोटो सेशन ही रद्द करना पड़ा. दरअसल, G-20 मीटिंग में कई यूरोपीय देशों ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का भारी विरोध करते हुए उनके तस्वीर खिंचाने पर आपत्ति जताई थी. कुछ देशों ने तो यहां तक धमकी दी कि अगर उन्हें लावरोव के साथ फोटो खिंचवानी पड़ी, तो वे इस सत्र से ही बाहर हो जाएंगे. इसके बाद अमेरिका ने फोटो सेशन रद्द करने का फैसला किया. आमतौर पर ऐसी बैठकों की शुरुआत सभी विदेश मंत्रियों के सामूहिक फोटो सेशन से होती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका. रूसी विदेश मंत्री के विरोध ने पश्चिमी देशों के बीच मतभेद उजागर कर दिया.
बैठक में पश्चिमी देशों के मतभेद उजागर
बता दें कि इसी साल दिसंबर महीने में अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत में स्थित मियामी में G-20 शिखर सम्मेलन आयोजित होने वाला है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे. इस शिखर सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा के लिए ही अमेरिका की ओर से G-20 में शामिल देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक आयोजित की जा रही है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इसकी अध्यक्षता कर रहे हैं. शुक्रवार (30 अक्टूबर) से इस बैठक की शुरुआत हुई और पहले ही दिन पश्चिमी देशों के मतभेद उजागर हो गए.
रुबियो को रद्द करना पड़ा फोटो सेशन
यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर यूरोपीय देशों के राजनयिकों ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का विरोध किया और उनके साथ फोटो खिंचवाने से साफ इनकार कर दिया. दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मार्को रुबियो ने इस विवाद को बैठक के बाकी एजेंडे पर हावी होने से रोकने के लिए फोटो सेशन को ही रद्द करने कर दिया.
जयशंकर भी ले रहे हैं बैठक में हिस्सा
विषय की गंभीरता को समझते हुए दोनों अधिकारियों ने मीडिया से अपनी पहचान छिपाए रखी. उन्होंने बताया कि G-20 राजनयिकों की बैठक की सर्वोच्च प्राथमिकता, नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर मतभेद दूर करना है. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका पहुंच चुके हैं.
एस. जयशंकर ने बैठक में क्या कहा?
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में डिप्लोमेसी की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि समस्याओं को सैन्य समाधान से हल नहीं किया जा सकता है. हमें कूटनीतिक रास्ते को ही महत्व दिया जाना चाहिए. उन्होंने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया. जयशंकर ने कहा कि नागरिक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमलों का खामियाजा वैश्विक दक्षिण के देशों को असमान रूप से भुगतना पड़ रहा है. इससे ईंधन, खाद्य सामग्री और उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित होने के साथ उनकी कीमतों पर भी असर पड़ रहा है.