नकाबपोशों का हाहाकार, फ्रेंच पुलिस का 'रौद्र प्रहार': छात्रों को सड़क पर घसीटा, जमकर भांजी लाठियां; वीडियो वायरल
फ्रांस में हिंसा बढ़ती देख पुलिस एक्शन लेने पर मजबूर हो गई. एक हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही एक इंस्टिट्यूट को ब्लॉक करने वाले छात्रों को हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा.
फ्रांस में दंगे और विरोध-प्रदर्शन रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जा रही है. पुलिस ने 1,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है. बढ़ती महंगाई और एजुकेशन सिस्टम को लेकर हुए इन प्रदर्शनों के दौरान कई शहरों में झड़पें देखने को मिलीं.
यह अशांति अभी भी जारी है. दंगा-रोधी पुलिस ने 'साइंसेज पो पेरिस' इंस्टिट्यूट को ब्लॉक करने वाले छात्रों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया. इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस प्रदर्शनकारियों को जमकर पीट रही है.
पेरिस के इस संस्थान के फुटेज में दंगा-रोधी पुलिस को प्रदर्शनकारियों के एक ग्रुप की ओर बढ़ते हुए देखा जा सकता है. पुलिस ने कुछ लोगों को रेलिंग की तरफ धकेला और मेगाफोन लिए हुए एक शख्स को जमीन पर गिरा दिया. एक शख्स को पुलिसवाले घसीटकर ले जाते भी नजर आए.
पुलिसकर्मी भीड़ की ओर बढ़े और लाठियों का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी पीछे हटने लगे. फुटेज के कैप्शन के मुताबिक, इस कार्रवाई का मकसद उन छात्रों को वहां से हटाना था जिन्होंने इंस्टिट्यूट को ब्लॉक कर रखा था. यह घटना फ्रांस में फिर से बढ़े तनाव के बीच हुई है. शनिवार को गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान 53 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, पूरे देश में हुए 298 विरोध प्रदर्शनों में लगभग 4,10,000 लोग शामिल हुए, जबकि 'जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर' के मुताबिक, इसमें लगभग 8,00,000 लोग शामिल थे.
कई मार्च शांतिपूर्ण भी रहे, लेकिन पेरिस और अन्य शहरों में झड़पें हुईं. अधिकारियों ने बताया कि पिछले प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और कारोबारों को हुए नुकसान को देखते हुए, पुलिस ने जांच और सुरक्षा के इंतजाम कड़े कर दिए हैं.
दक्षिणी शहर नीस के अभियोजक कार्यालय ने रविवार को बताया कि 59 लोगों को पुलिस हिरासत में लिया गया. इनमें 11 ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन पर चरम-दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े होने का संदेह है. आरोप है कि वे हिंसा के इरादे से इकट्ठा हुए थे. 'फ्रांस-इन्फो' को दिए एक बयान में उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को दो वाहनों से पकड़ा गया, जिनके पास मास्क, दस्ताने, गैस स्प्रे और डंडे मौजूद थे. सरकारी अनुमानों के मुताबिक, पेरिस में कम से कम 1,10,000 लोगों ने शहर के पूर्वी हिस्से में मार्च निकाला.
दोपहर तक माहौल था शांतिपूर्ण और फिर...
उन्होंने हाई स्कूल के छात्रों का समर्थन किया, लेकिन साथ ही बढ़ती महंगाई और सरकार की भारी पुलिस तैनाती पर भी नाराजगी जताई. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार राजनीतिक समाधान निकालने के बजाय, पिछले एक महीने से स्कूली प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के लिए दंगा-रोधी पुलिस भेज रही है. शनिवार दोपहर पेरिस का माहौल शांतिपूर्ण और खुशनुमा था; वहां बैंड बज रहे थे और बच्चों के साथ-साथ उनके परिवार के अन्य लोग भी मौजूद थे.
कुछ लोगों ने सरकार की पुलिसिंग की आलोचना करते हुए बैनर उठाए थे, जिन पर लिखा था- दमन से विद्रोह जन्म लेता है और विरोध करने का अधिकार. लेकिन पेरिस में प्रदर्शन के अंत में, शहर के पूर्वी छोर पर स्थित 'पोर्टे डी विन्सेनेस' के पास, काले कपड़े पहने और नकाबपोश लोगों के कुछ समूह सामने आए, जो शायद इस शांतिपूर्ण मार्च का हिस्सा नहीं थे. इन नकाबपोश लोगों के कुछ समूहों ने पुलिस पर कांच की बोतलें और पत्थर फेंके.जवाब में पुलिस ने आंसू गैस, वॉटर कैनन और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. वहां एक कूड़ेदान (बिन) में आग लगा दी गई और पुलिस की ओर आतिशबाजी भी की गई.