SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

वारसॉ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: पीएम टस्क के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट परिसर में रेड, बीच हवा से वापस लौटा राष्ट्रपति का प्लेन

पोलैंड में सियासी घमासान मचा हुआ है. पीएम डोनाल्ड टस्क ने कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के ऑफिसों में रेड मारने का आदेश दिया है. इसके बाद राष्ट्रपति को अपनी फ्लाइट को वापस पोलैंड की ओर मोड़ना पड़ा.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 31, 2026, 08:15 AM IST | Updated: Oct 31, 2026, 08:33 AM IST
Image Credit: पोलैंड में सियासी विवाद चरम पर है.
Join

पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने वारसॉ में कॉन्स्टिट्यूशनल ट्रिब्यूनल के दफ्तरों में छापेमारी का आदेश दिया है. इस घटना के बाद, राष्ट्रपति कैरोल नवा्रोकी को अपनी उड़ान के बीच से ही विमान वापस मोड़ना पड़ा. यूरोपीय मीडिया के मुताबिक, यह अदालत तय करती है कि संसद के बनाए गए कानून पोलैंड के संविधान के मुताबिक हों.

पोलैंड की सरकार और ट्रिब्यूनल के टॉप जजों के बीच बढ़ते टकराव के बीच, वहां दंगा-रोधी पुलिस को तैनात किया गया है. यह विवाद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और उनके पूर्ववर्ती, दक्षिणपंथी 'लॉ एंड जस्टिस' (PiS) पार्टी के नेताओं के बीच है.

पुलिस की यह तैनाती तब हुई, जब न्याय मंत्री वाल्डेमार जुरेक ने कहा कि उन्होंने ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष बोगदान श्विएचकोव्स्की और उपाध्यक्ष बार्टलोमी सोचांस्की को मिली कानूनी छूट (इम्युनिटी) को हटाने का अनुरोध किया है, ताकि उन पर आपराधिक आरोप लगाए जा सकें.

जूडिशरी को राजनीति से आजाद करने का वादा

प्रधानमंत्री टस्क ने जूडिशरी को राजनीति से आजाद करने का वादा किया है. शुक्रवार को, जब वारसॉ में अदालत परिसर के बाहर PiS समर्थक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब टस्क ने इस कदम का बचाव किया.

PiS समर्थित कैरोल नवाप्रोकी, अपने चीफ ऑफ स्टाफ के अनुसार, अब संवैधानिक न्यायालय के अंदर पहुंच गए हैं. नवाप्रोकी ने वारसॉ में चल रहे इस टकराव को संभालने के लिए सेनेगल की अपनी यात्रा को बीच रास्ते से ही रद्द कर दिया. वे डकार में होने वाले 'समर यूथ ओलंपिक गेम्स' के लिए जा रहे थे. अदालत की इमारत में प्रदर्शनकारियों को घुसने से रोकने के लिए दंगा-रोधी पुलिस तैनात की गई थी.

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, संवैधानिक न्यायालय ने लिखा कि जिन दो जजों पर सरकार मुकदमा चलाना चाहती है, वे अभी भी अदालत के कानूनी रूप से नियुक्त सीनियर जज हैं.

अदालत ने कहा,'इन गतिविधियों में शामिल सभी लोग तख्तापलट का अपराध कर रहे हैं.'

क्या बोले पीएम टस्क?

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में, टस्क ने लिखा: 'कानून के शासन को बहाल करना हमारा कर्तव्य है. 'लॉ एंड जस्टिस' पार्टी के वर्षों के अराजक शासन के बाद, यह एक मुश्किल और कभी-कभी दर्दनाक प्रक्रिया है, जिसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है. इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है.'

PiS (पीआईएस) की अगुआई वाली सरकार 2015 में सत्ता में आई और उसने अदालत में बहुमत हासिल करने के लिए तेजी से जजों की नियुक्ति की, क्योंकि अदालत के पास कानूनों की वैधता पर फैसला करने की ताकत है.

यूरोप की अहम अदालतों-यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय और यूरोपीय संघ के न्यायालय ने बाद में फैसला सुनाया कि PiS के बहुमत ने तीन जजों को गलत तरीके से चुना था, क्योंकि वे उन पदों पर नियुक्त किए गए थे जिन्हें पिछली संसद की ओर से पहले ही वैध तरीके से भरा जा चुका था.

क्या बोलीं यूरोपीय अदालतें?

यूरोपीय अदालतों ने फैसला दिया कि पोलैंड का संवैधानिक न्यायालय अब एक 'स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधिकरण' नहीं रहा. टस्क की सरकार ने इन्हीं फैसलों का हवाला देते हुए इस न्यायाधिकरण के फैसलों को पब्लिश करना बंद कर दिया है.

टस्क PiS के दौर में किए गए बदलावों को पलटने में नाकाम रहे हैं. इसका एक कारण यह है कि नवाक्रोकी और उनके पूर्ववर्ती आंद्रेज डुडा (जिन्हें PiS का समर्थन हासिल था) ने अपने राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल करके टस्क की कोशिशों को रोक दिया.

नवाक्रोकी ने मार्च के बाद संसद की ओर से चुने गए संवैधानिक न्यायालय के पांच जजों को शपथ दिलाने से भी इनकार कर दिया है. उनका तर्क है कि इन जजों के चयन की प्रक्रिया में कमियां थीं.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES