'कप्तान' के गढ़ में इमरजेंसी की तैयारी, लेकिन जनता पड़ेगी भारी: शहबाज-मुनीर ने लिया ये फैसला तो गृहयुद्ध की आग में जलेगा पाकिस्तान
पाकिस्तान में शांति अब एक सपना बनकर रह गई है. हाल में ही आई एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि अग पाक की शहबाद सरकार खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लगाने की प्लानिंग करती है, तो इससे गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा हो सकते हैं.
इमरान खान की रिहाई को लेकर पाकिस्तान में एक बड़ा हंगामा देखने को मिला है. पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा से एक लॉन्ग मार्च इस्लामाबाद की ओर बढ़ा है, जिसका नेतृत्व सीएम सोहेल अफरीदी कर रहे हैं. इस बीच पाकिस्तान की शीर्ष खुफिया एजेंसियों ने अपनी संघीय सरकार और सैन्य नेतृत्व को एक बड़ी चेतावनी दी है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों ने साफ किया है कि खैबर पख्तूनख्वा (केपी) प्रांत में आपातकाल (इमरजेंसी) या राज्यपाल शासन लागू करने की गलती न की जाए.
दरअसल, इन खुफिया एजेंसियों मे शहबाज सरकार को चेताया है कि केपी में इमरजेंसी या राष्ट्रपति शासन लगाने के कारण पूरे प्रांत में स्थिति दयनीय हो सकती है और देश में एक भयानक गृहयुद्ध छिड़ सकता है. ऐसा करने के बाद हालात ऐसे बिगड़ सकते हैं, जिन्हें संभालना मुश्किल हो सकता है. हाल में ही एक संवेदनशील खुफिया रिपोर्ट में इस बात खुलासा हुआ है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पाकिस्तान की सरकार खैबर पख्तूनख्वा को सीधे अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश केरेगी, तो स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाएगी.
जनता की एकजुटता सरकार के दिमाग खटक रही!
दावा किया गया है कि खैबर पख्तूनख्वा में फिलहाल कोई भी राजनीतिक दल आपाताल यानी इमरजेंसी के पक्ष में नहीं है. पूर्व पीएम इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F), अवामी नेशनल पार्टी (ANP) और अन्य पश्तून राष्ट्रवादी समूह सभी एकजुट हैं. ऐसे में अगर पाकिस्तान की सरकार की ओर से ऐसा कोई भी कदम उठाया जाता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है.
इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस प्रांत में पूर्व पीएम इमरान खान की लोकप्रियता काफी अधिक है. फिलहाल इमरान खान जेल में बंद है, जिस कारण लोगों में भारी नाराजगी है. स्थानीय पश्तून समुदाय के लोगों ने माना कि इमरान खान केवल सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर के कारण जेल में बंद हैं.
सेना पर लगे शोषण के आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय लोगों का आरोप है कि सैन्य अभियानों की आड़ में आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है. आज की स्थिति यह है कि लोगों की धारण बन चुकी है कि सेना जनजातीय इलाकों की बेशकीमती खनिज संपदा का शोषण कर रही है. इसके साथ ही अफगान शरणार्थियों को बाहर निकालने के बहाने स्थनीय निवासियों को जबरन उनके घरों से निकाला जा रहा है. रिपोर्ट में यहां तक दावा किया गया है कि स्थानीय समुदायों को लगने लगा कि पाकिस्तानी सेना की नीतियां देश के की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि बाहरी देशों के हितों में काम कर रही हैं.
सरकार के हाथ से फिसल सकता है नियंत्रण
दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर पाकिस्तान को 4 खंडों में बांटना चाहते हैं. इधर पीटीआई का लॉन्ग मार्च तेजी से आगे बढ़ रहा है. एक ओर भयानक आर्थिक तंगी, गरीबी और बेरोजगारी है. वहीं, दूसरे ओर लगातार आतंकी हमले हो रहे हैं. इस सभी परिस्थितियों ने हालात बेकाबू कर दिया है. मौजूदा समय में खैबर पख्तूनख्वा के सुरक्षा तंत्र पर केंद्र सरकार का नियंत्रण लगभग खत्म हो चुका है. जानकार मानते हैं कि ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला आग में घी डालने का काम कर सकता है.
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