अमेरिका में 'नॉर-ईस्टर' का भयानक कहर देखने को मिल रहा है. इससे करोड़ों लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है. 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तूफानी हवाओं ने सुपरपावर मुल्क के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है. इसके चलते कुछ लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने तो कुछ घरों में दुबकने को मजबूर हो गए. हजारों घरों की बत्ती गुल हो गई है. हालात इतने गंभीर हैं कि पब्लिक इवेंट्स, फेस्टिवल्स और कई हवाई उड़ानों को आखिरी वक्त पर रोकना पड़ा है. ये कोई चक्रवाती तूफान नहीं बल्कि एक मौसमी घटना है, जो वातावरण में प्रतिकूल माहौल तैयार होने से कभी भी घट सकती है.
इसे आप इस तरह से समझिए, जैसे भारत में हाल ही में बंगाल की खाड़ी में बनी मौसमी गतिविधि 'डीप डिप्रेशन' यानी गहरे दबाव ने कई राज्यों में अपनी ताकत दिखाकर जनजीवन को प्रभावित किया.
अमेरिकी मेट डिपार्टमेंट के मुताबिक इस मौसमी सिस्टम के चलते रविवार तक न्यू जर्सी के अटलांटिक सिटी के उत्तर में समुद्र का ज्वार सबसे ज्यादा ऊंचा रहने की आशंका बनी हुई है. इससे समुद्र के किनारे और खाड़ी वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर सड़कों के डूबने का खतरा बढ़ गया था. न्यू यॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा था कि पानी के पास जाना या पानी में उतरना अपनी जान को दांव पर लगाने जैसा होगा.
इसे ‘नॉर-ईस्टर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें तूफानी हवाएं उत्तर-पूर्व दिशा से बहुत ही भयानक रूप दिखाते हुए चलती हैं. जब ये तूफान समुद्र के तटों से टकराता है तो अपने साथ दो बड़ी तबाही लाता है.
100 किमी/घंटे से तेज हवाएं: तूफ़ानी हवाओं की रफ्तार इतनी तेज थी कि उसके रास्ते में आने वाले हजारों बिजली के खंभे और पेड़ उखड़ गए. हजारों लोग अब भी अंधेरे में हैं, क्योंकि बिजली सप्लाई अभी बहाल नहीं हुई है. इसी तरह से पेड़ गिरने से लोगों के घायल होने की खबरें आई हैं.
समुद्री बाढ़ का खतरा: तेज हवाएं समुद्र में इतनी ऊंची लहरें उठा रही हैं कि तटीय इलाकों और निचले शहरों में पानी भर गया है, जिससे कई जगह बाढ़ के हालात हैं.
इस कथित तूफान नॉर-ईस्टर ने सैकड़ों फ्लाइट्स पर ब्रेक लगा दिया गया है. मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को बिना काम घर से बाहर न निकलने और पूरी तरह से सुरक्षित रहने की सलाह दी है. इस बीच 425 से ज्यादा उड़ाने रद्द हुईं और 1300 से ज्यादा फ्लाइट्स देरी से चल रही हैं.

न्यू यॉर्क, बॉस्टन और फिलाडेल्फिया जैसे अमेरिका के सबसे घनी आबादी वाले शहरों में रहने वाले लोग इस वक्त इस ताकतवर तूफान की रेंज में हैं. बिजली व्यवस्था सुचारु करने के लिए इमरजेंसी टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं. न्यू यॉर्क में अभी यूएन का हाई वीक चल रहा है, वहां मौजूद विदेशी मेहमानों और स्थानीय लोगों को सावधान करते हुए इसके बारे में अलर्ट जारी किया गया था.

पॉश इलाकों में भारी जलजमाव के चलते शहर टापू में तब्दील हो गए हैं. इस खतरे को देखते हुए न्यू यॉर्क में होने वाला मशहूर ‘ग्लोबल सिटीजन फेस्टिवल’ और मैरीलैंड में आयोजित होने वाला ‘ओशन्स कॉलिंग’ फेस्टिवल भी रोक दिया गया है. आयोजकों का साफ कहना है कि तेज हवाओं और भारी बारिश के बीच हजारों दर्शकों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती.

ये कोई हरीकेन/नया चक्रवाती तूफान नहीं है. Nor’easter अक्सर अमेरिका के पूर्वी तट पर ठंडी और गर्म हवाओं के बड़े टकराव से बनने वाला एक्स्ट्राट्रॉपिकल साइक्लोन होता है यानी चक्रवाती तूफान यानी उत्तर-पूर्वी अमेरिका से लेकर कनाडा और अटलांटिक तट तक असर डालता है.
इसे कुछ ऐसे समझिए जैसे भारत में अभी बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन ने कई राज्यों में तबाही मचाकर अपनी ताकत दिखाई. कुछ रिपोर्टों में इस सिस्टम को ‘अर्नब’ नाम से पुकारा गया, क्योंकि ‘Arnab’ क्षेत्रीय चक्रवात नामों की सूची में अगला नाम था. जबकि भारत के मौसम विभाग ने इस डीप डिप्रेशन को आधिकारिक रूप से ‘अर्नब’ नाम नहीं दिया था.

भारत के समुद्र तटीय राज्यों में उष्णकटिबंधीय समुद्रों में तापमान बढ़ने पर वहां की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे उस क्षेत्र में हवा का दबाव कम यानी लो प्रेशर हो जाता है. भारत में दो बार ऐसी स्थिति आती है. पहली बार प्री मॉनसून महीनों में ऐसे मौसमी हालात बनते हैं और दूसरी बार मॉनसून की विदाई के बाद ऐसा होता है. चूंकि भारत से मॉनसून की रवानगी हो चुकी है.
इसलिए सितंबर 2026 के तीसरे हफ्ते में पश्चिम-मध्य और उससे जुड़े उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में ऐसा ही कम दबाव का क्षेत्र बना, जो धीरे-धीरे और अधिक मजबूत होकर 'डिप्रेशन' और फिर 'डीप डिप्रेशन' में बदल गया. इसके चलते कई राज्यों में भारी बारिश हुई और तूफानी हवाओं के चलने से जनजीवन प्रभावित हुआ. ओडिशा, बंगाल समेत कई राज्यों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें हाई अलर्ट पर रहीं.
यानी सितंबर के आखिरी हफ्ते में भारत में भी मौसम की मार ने कई राज्यों की मुश्किलें बढ़ाई है. बंगाल की खाड़ी में बना सिस्टम डीप डिप्रेशन आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम के पास तट से गुजरा. इसके चलते ओडिशा, आंध्र प्रदेश और आसपास के कई इलाकों में भारी बारिश हुई. इसका असर बिहार तक देखा गया.
इस तरह से देखा जाए तो एक तरफ अमेरिका में नॉर ईस्टर से उड़ाने रद्द हुईं, बिजली कटौती हुई और तटीय इलाकों में रहने वाले दहशत में हैं. वहीं दूसरी तरफ भारत के कई हिस्से भी भारी बारिश, तूफानी हवाओं और जलभराव से जूझते नजर आए. यानी अमेरिका का ‘नॉर-ईस्टर’ और भारत का कथित ‘अर्नब’ दोनों का नाम 'तूफान' जैसा है, लेकिन असलियत में ये तूफान नहीं बल्कि मौसम के मजबूत सिस्टम हैं, जिनकी वजह से अमेरिका से लेकर भारत तक लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.