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कैसे संभलती है दुनिया की अर्थव्यवस्था? गुत्थी को सुलझाने वाले हॉल और वुडफोर्ड को मिला इकोनॉमिक्स का नोबेल

अर्थशास्त्र के लिए नोबेल प्राइज 2026 का ऐलान हो गया है. इस बार यह सम्मान 'रॉबर्ट ई हॉल' और 'माइकल वुडफोर्ड' दिया गया है. इन दोनों की रिसर्च ने दुनियाभर की अर्थव्यस्था को स्थिर करने में काफी मदद की है.

Written By Tahir Kamran
Published: Oct 12, 2026, 03:37 PM IST | Updated: Oct 12, 2026, 04:05 PM IST
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अर्थशास्त्र में साल 2026 के नोबेल पुरस्कार का ऐलान हो गया है. रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 'रॉबर्ट ई हॉल' और 'माइकल वुडफोर्ड' को मैक्रोइकॉनॉमिक स्टेबलाइजेशन के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर उनकी रिसर्च के लिए यह सम्मान दिया गया है. उनका काम यह समझने में मदद करता है कि लोगों और कंपनियों के आर्थिक फैसले किस तरह पूरी अर्थव्यवस्था की स्थिरता को प्रभावित करते हैं.

रॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्ड की रिसर्च ने स्टेबलाइजेन पॉलिसी (अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने वाली नीति) में एक बड़ा बदलाव लाया है. उनकी रिसर्च से बने 'न्यू कीनेसियन मॉडल' हमें यह समझने और मापने में मदद करते हैं कि स्टेबलाइजेशन पॉलिसी बिजनेस साइकल (व्यापार चक्र) पर कैसे असर डालती है. अब दुनिया भर के सेंट्रल बैंक और वित्त मंत्रालय इनका इस्तेमाल करते हैं.

नोबेल कमेटी ने बताया,'इनकी रिसर्च ने बड़े मैक्रो-इकोनॉमिक संकटों को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा असरदार ढंग से संभालना मुमकिन बना दिया है. महामारी और हाल के सालों में आए एनर्जी संकट के दौरान यह बहुत फायदेमंद साबित हुआ है. इन संकटों का विकास और महंगाई पर वैसा बुरा असर नहीं पड़ा, जैसा 1970 के दशक के मुश्किल दौर में हुआ था. हम 1930 के दशक जैसी भयानक आर्थिक मंदी में नहीं फंसे. मंदी और तेजी से बढ़ती महंगाई (हाई इन्फ्लेशन) के दौर पूरी तरह खत्म तो नहीं हुए हैं, लेकिन अब वे कम समय तक ही रहते हैं.'

अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार पहले अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में बैंक ऑफ स्वीडन आर्थिक विज्ञान पुरस्कार के नाम से जाना जाता था. पिछले हफ्ते फिजिक्स, कैमिस्ट्री, पीस, मेडिकल और साहित्य जैसी कैटेगरी में में भी नोबेल पुरस्कारों का ऐलान किया गया है. इस साल अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार की पुरस्कार राशि 12 लाख डॉलर थी, चाहे वह किसी व्यक्ति, समूह या संगठन को दी जाए.

श्रेणीविजेतायोगदान
चिकित्साकार्ल डाइसेरोथ, पीटर हेगेमैन और जॉर्ज नागेलऑप्टोजेनेटिक्स और प्रकाश-संवेदनशील आयन चैनलों की खोज.
भौतिकीफ्रांसिस हल्जेनउच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो और आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी से जुड़ा योगदान.
रसायन विज्ञानहेनरी बी. कागन और केन्जो सोआईअसममित रासायनिक प्रतिक्रियाओं और ऑटोकैटेलिसिस पर शोध.
साहित्यऐन कार्सनशास्त्रीय परंपराओं से संवाद करने वाले अभिनव साहित्यिक लेखन के लिए.
शांतिनवी पिल्लैशांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए.
अर्थशास्त्ररॉबर्ट ई. हॉल और माइकल वुडफोर्डमैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरीकरण के माइक्रोइकॉनॉमिक आधार पर शोध.

सोर्स- NobelPrize.org

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About the Author

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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