सहारा के रेगिस्तान में मिला मामूली कंकर निकला मंगल का टुकड़ा! NASA की जांच में खुला पानी का बड़ा राज
सहारा के रेगिस्तान में मिला एक गुलाबी पत्थर वैज्ञानिकों के लिए बड़ी खोज बन गया है. सालों तक मामूली कंकर जैसा दिखने वाला यह टुकड़ा असल में मंगल ग्रह से आया है. इसकी जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जो बताते हैं कि अरबों साल पहले लाल ग्रह पर पानी मौजूद था.
सहारा के रेगिस्तान में रेत और पत्थरों के बीच पड़ी कोई गुलाबी रंग की चीज भला किसका ध्यान खींचेगी? ज्यादातर लोग शायद उसे साधारण पत्थर समझकर आगे बढ़ जाएं, लेकिन सहारा के रेगिस्तान में मिले एक ऐसे ही पत्थर की अब चौंकाने वाली कहानी सामने आई है. लगभग 800 ग्राम वजन का यह टुकड़ा धरती का नहीं, बल्कि मंगल ग्रह से आया है. वैज्ञानिकों ने जांच किया तो पता चला कि यह 4.1 अरब साल से भी ज्यादा पुराना है. हैरानी की बात यह है कि इसके अंदर मंगल के उस पुराने दौर के निशान मिले हैं, जब वहां पानी मौजूद था. साल 2022 में मिला यह पत्थर अब वैज्ञानिकों को लाल ग्रह के शुरुआती इतिहास को समझने का मौका दे रहा है.
करीब 800 ग्राम वजन वाले इस पत्थर को लेकर हुई रिसर्च में पता चला है कि यह मंगल ग्रह से आया है. इसकी उम्र 4.1 अरब साल से भी ज्यादा है. वैज्ञानिकों को इसकी बनावट और खनिजों में ऐसे संकेत मिले हैं, जो बताते हैं कि मंगल के शुरुआती दिनों में वहां पानी मौजूद था. यानी यह छोटा सा पत्थर उस दौर की कहानी अपने अंदर समेटे हुए है, जब मंगल आज की तरह ठंडा और सूखा ग्रह नहीं बना था. NASA ने 29 अक्टूबर 2026 को इस खोज से जुड़ी रिपोर्ट जारी की. इस उल्कापिंड को Teghaza 001 नाम दिया गया है. इसका नाम माली के उस नमक वाले मैदान के आधार पर रखा गया, जहां यह मिला था. इस पर हुई रिसर्च साइंस जर्नल में प्रकाशित हुई है. रिसर्च में NASA की जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के वैज्ञानिक भी शामिल थे.
ऑक्सीजन की जांच से मिला मंगल का पता
शुरुआत में इस पत्थर की उम्र और इसके असली ठिकाने के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. न्यू मैक्सिको यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इसके ऑक्सीजन आइसोटोप की जांच की. इस जांच से पुष्टि हुई कि पत्थर मंगल ग्रह से आया है. इसके बाद NASA की वैज्ञानिक यांग लियू ने इसकी बनावट और अंदर मौजूद खनिजों का रिसर्च किया. उन्हें इसमें कुछ ऐसी खासियतें दिखीं, जो पहले मिले कई मंगल के उल्कापिंडों में नहीं थीं.
धरती पर अब तक मंगल ग्रह से आए करीब 435 उल्कापिंडों की पहचान हुई है. Teghaza 001 को इनमें सबसे पुराने तीन नमूनों में गिना जा रहा है. इसमें जिरकॉन क्रिस्टल और कई दूसरे खनिज मौजूद हैं. इनकी मदद से वैज्ञानिक मंगल की पुरानी चट्टानों के बनने और उनमें हुए बदलावों को समझ पाए.
4.1 अरब साल पहले चट्टानों तक पहुंचा था पानी
इसकी उम्र जानने के लिए वैज्ञानिकों ने रुबिडियम-स्ट्रोंटियम डेटिंग तकनीक का सहारा लिया. खास बात यह रही कि जांच के लिए पत्थर का बहुत छोटा टुकड़ा ही इस्तेमाल करना पड़ा. इससे उल्कापिंड का बाकी हिस्सा आगे के अध्ययन के लिए बचा रहा. जांच में सामने आया कि करीब 4.1 अरब साल पहले पानी के संपर्क में आने से इस चट्टान में बदलाव हुए थे. इससे पता चलता है कि मंगल के शुरुआती इतिहास में पानी की अहम भूमिका थी. जून 2026 में प्रकाशित एक दूसरी स्टडी में भी इसी उल्कापिंड में मौजूद पानी का अध्ययन किया गया था.
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मंगल की किस जगह से आया, यह पहेली बाकी
वैज्ञानिकों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मंगल की किस जगह से यह पत्थर निकला था. NASA के ऑर्बिटर से मिली तस्वीरों और आंकड़ों के आधार पर 13 संभावित जगहें सामने आई हैं. इनमें मंगल के दक्षिणी ऊंचे इलाके भी शामिल हैं. माना जाता है कि मंगल की सतह पर किसी बड़े उल्कापिंड के टकराने से यह चट्टान अंतरिक्ष में पहुंची होगी. लंबा सफर तय करने के बाद यह धरती पर आ गिरी. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इसकी आगे की जांच से मंगल के पुराने वातावरण और वहां पानी के इतिहास को समझने के लिए कुछ नए सुराग मिलेंगे.
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