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खूबसूरती और वफादारी नहीं, काबिलियत देखिए! 5 दिन में केटी की विदाई के बाद ट्रंप को पूर्व प्रेस सेक्रेटरी की नसीहत

सिर्फ 5 दिनों में व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी को पद से हटाने के बाद ट्रंप को उन्हीं के पूर्व साथी ने सलाह दी है. उन्होंने कहा कि अगला प्रेस सेक्रेटरी चुनते समय सिर्फ खूबसूरती, वफादारी या अपनी नीतियों से सहमति को प्राथमिकता न दें.

Written ByTahir Kamran
Published: Oct 21, 2026, 03:55 PM IST|Updated: Oct 21, 2026, 06:03 PM IST
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खूबसूरती और वफादारी नहीं, काबिलियत देखिए! 5 दिन में केटी की विदाई के बाद ट्रंप को पूर्व प्रेस सेक्रेटरी की नसीहत
Image Credit: AI की मदद से बनाई गई तस्वीर

About the Author

Tahir Kamran

Tahir Kamran

Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन्हीं के पूर्व प्रेस सेक्रेटरी ने एक नसीहत दी और उनकी यह नसीहत इंटरनेशनल स्तर पर चर्चा का विषय बन गई. साथ ही यह भी सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या ट्रंप व्हाइट हाउस के पदों पर नियुक्ति को लेकर किसी तरह का समझौता करते हैं? ट्रंप के पहले व्हाइट हाउस प्रेस सचिव, शॉन स्पाइसर ने कहा कि अगला प्रेस सेक्रेटरी चुनते समय सिर्फ खूबसूरती, वफादारी या अपनी नीतियों से सहमति को प्राथमिकता न दें, बल्कि उम्मीदवार की काबिलियत और काम के अनुभव पर ध्यान दें. उनका यह बयान ऐसे समय में आया, जब केटी जाकारिया को नियुक्ति के सिर्फ 5 दिनों बाद उनके पद से हटा दिया गया है.

स्पाइसर ने ये टिप्पणियां ऑस्ट्रेलियाई मीडिया कमेंटेटर एंड्रयू बोल्ट के साथ एक इंटरव्यू के दौरान कीं. उनसे पूछा गया था कि क्या ट्रंप लोगों को उनकी योग्यता के बजाय उनसे सहमत होने की इच्छा की बुनियाद पर चुन रहे हैं. स्पाइसर ने कहा कि सरकार के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे का समर्थन करना नौकरी का एक हिस्सा है. इसके तहत पत्रकारों के साथ बातचीत करना, सरकारी डिपार्टमेंट्स के साथ तालमेल बिठाना शामिल है.

अन्य जिम्मेदारियों पर गौर करने की जरूरत 

स्पाइसर ने जकारिया का बचाव करते हुए कहा,'वह सरकार की नीतियों का समर्थन कर सकती हैं, लेकिन व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव का काम सिर्फ राष्ट्रपति का पक्ष रखना नहीं है. उनकी जिम्मेदारी मीडिया के सवालों के जवाब देना और सरकार की नीतियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाना भी है.' उन्होंने कहा,'मैं व्हाइट हाउस और खास तौर पर राष्ट्रपति को आगाह करता हूं कि वे सिर्फ जिम्मेदारियों के उस हिस्से पर ध्यान केंद्रित न करें, उन्हें पद से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों पर गौर करने की जरूरत है.'

सवालों के ठीक से जवाब नहीं दे पाई जाकारिया

दरअसल यह विवाद इसलिए चर्चा में है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने 9 अक्टूबर 2026 को केटी जाकारिया को व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान किया. यह पद राष्ट्रपति की तरफ से मीडिया से संवाद करने और सरकार का पक्ष रखने के लिए बेहद अहम होता है. उनकी नियुक्ति कैरोलिन लेविट की जगह पर हुई थी. नियुक्ति के चौथे दिन यानी 13 अक्तूबर को जब उनकी पहली प्रेस ब्रीफिंग हुई तो उनके जवाब देने की तरीकों पर कई तरह के सवाल उठे. यहां उन्होंने एक लिखा हुआ भाषण पढ़ा था और यह ब्रीफिंग सिर्फ 14 मिनट ही चल पाई थी.

वकालत की डिग्री पर उठे सवाल

इतना ही नहीं जाकारिया की डिग्री को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. उन्होंने पहले खुद को वकील के तौर पर पेश किया था, लेकिन रिपोर्टों में सामने आया कि उन्होंने बार परीक्षा पास नहीं की थी और अमेरिका के किसी राज्य में वकालत करने का लाइसेंस नहीं था. बाद में उन्होंने भी परीक्षा पास न करने की बात स्वीकार की. इन्हीं विवादों के बीच 16 अक्टूबर को उनके पद छोड़ने की खबर सामने आई. उनका कार्यकाल केवल पांच दिन का रहा.

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