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फ्लाईदुबई विमान में जैसे ही को-पायलट के पायलट पर अटैक की खबर मिलने के बाद इजरायल एक्शन में आ गया था. इजरायल ने उस विमान को मार गिराने की तैयारी भी कर ली थी, जिसमें 150 से ज्यादा इजरायली नागरिक सवार थे. इस मामले की जानकारी रखने वाले दो इजरायली सूत्रों ने सीबीएस न्यूज को यह जानकारी दी.
पिछले हफ्ते दुबई से उड़कर तेल अवीव आने वाली फ्लाइट में ओमानी को-पायलट हमाम-अल-हम्मामी ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर कॉकपिट में रखी कुल्हाड़ी से हमला कर दिया था. वह इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर उसे क्रैश कराना चाहता था. लेकिन स्मित मच्छार ने बहादुरी से डटकर उसका सामना किया और उसका प्लान फेल कर दिया.
सूत्रों के मुताबिक, इजरायल में 9/11 जैसी संभावित घटना से निपटने के लिए पहले से ही एक तरीका तय है. प्लेन के 14,000 फीट नीचे गिरने के बाद, इजरायली वायु सेना ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. तुरंत एक पहले से बनी कमेटी को एक्टिव किया गया और एक कमांड सेंटर बनाया गया.
फाइटर जेट्स को भेजा गया और इजरायल का एयरस्पेस बंद कर दिया गया. लेकिन जब इजरायल को पता चला कि प्लेन उसके मुल्क से लगभग 400 मील दूर सऊदी अरब की ओर मुड़ गया है और सऊदी अरब ने भी अपने जेट्स भेज दिए हैं, तो इजरायल ने अपने जेट्स वापस बुला लिए.
सूत्रों ने बताया कि अगर यह तय हो जाता कि प्लेन हाईजैक कर लिया गया है और हाईजैक करने वालों ने रेडियो पर कोई संपर्क नहीं किया और कोई मांग भी नहीं रखी, तो कमिटी रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को कॉल पर लेती.
प्रोटोकॉल के मुताबिक, इजरायल की ओर आ रही किसी संदिग्ध या अनियंत्रित उड़ान को हवा में ही मार गिराया जाना चाहिए, लेकिन यह फैसला सिर्फ प्रधानमंत्री ही ले सकते थे. सूत्रों ने CBS News को बताया कि अगर कोई संदिग्ध प्लेन इजरायल की मशहूर अजरीली बिल्डिंग्स, एयरपोर्ट या किसी अन्य अहम टारगेट से टकराता और सैकड़ों लोग मारे जाते, तो उसके मुकाबले पैसेंजर जेट को मार गिराना बेहतर समझा जाता.
एक इजरायली अधिकारी ने CBS News को बताया कि कैप्टन पर हमला करने वाले को-पायलट ने संयुक्त अरब अमीरात में पूछताछ के दौरान कहा कि उसने FlyDubai में नौकरी शुरू करने से पहले ही हमले की योजना बना ली थी. अधिकारी ने बताया कि जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस को-पायलट का इरादा बेन गुरियन एयरपोर्ट पर प्लेन को क्रैश करने का था. उन्होंने यह भी कहा कि वह पहले भी इजरायल की उड़ान भर चुका था.
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, इजरायल की शुरुआती जांच से पता चलता है कि हाईजैक की यह कोशिश शायद एक लोन-वुल्फ अटैक (अकेले शख्स का हमला) था. सूत्रों ने CBS News को बताया कि जांच जारी है और सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है.
प्लेन के कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए को-पायलट का काफी देर तक मुकाबला किया. इसके बाद इजरायली यात्रियों और फ्लाईदुबई के कर्मचारियों के एक समूह ने को-पायलट पर काबू पा लिया. प्लेन में मौजूद ड्यूटी पर न होने वाले दो पायलटों ने प्लेन का कंट्रोल अपने हाथ में लिया और सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई.
सूत्रों ने CBS न्यूज को बताया कि अगर फ्लाइट 1073 एक निश्चित दूरी के भीतर आ जाती, तो इजरायल जांच के लिए जॉर्डन के एयरस्पेस में जेट्स भेजता. सूत्रों ने कहा कि इजरायली फाइटर पायलट कॉकपिट की जांच करने और स्थिति का पता लगाने के लिए पायलट से विज़ुअल संपर्क बनाने की कोशिश करने के लिए जितना हो सके उतना करीब जाते. फिर वे यात्रियों की स्थिति का पता लगाने के लिए केबिन के साथ भी ऐसा ही करते. अगर उन्हें घबराहट या अफरा-तफरी दिखती, तो वे अपनी जानकारी वायु सेना और पहले से बनी कमेटी को देते.