नेतन्याहू की राह में रोड़ा: इजरायल में अब 'यूनिटी सरकार' की तैयारी, गादी आइसेनकोट के घर के जुटे प्रदर्शनकारियों ने रखी खास डिमांड
इजरायल में हुए आम चुनाव के नतीजे आने के बाद सियासी पारा बढ़ने लगा है. इस चुनाव में 19 सीटें पाने वाली अरब पार्टियां 'किंगमेकर' के रूप में उभरी हैं. चुनावी नतीजों के बाद इजरायल के मुख्य विपक्षी दल के नेता गादी आइसेनकोट के घर के बाहर नेतन्याहू-विरोधी प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और एक 'यूनिटी सरकार' बनाने की मांग की.
Israel Election 2026: इजरायल में हुए चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं. इस चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है. 120 सीटों वाली इजरायली संसद नेसेट में बहुमत के लिए 61 का आंकड़ा होना चाहिए. इस चुनाव में पीएम बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन भी बहुमत हासिल नहीं कर सका और केवल 53 सीटों पर सिमट गया. अब चुनावी नतीजे आने के बाद इजरायल में राजनीतिक हलचल काफी बढ़ गई है.
दरअसल, देश में नई सरकार बनाने को लेकर भी गतिरोध देखने को मिल रहा है. ऐसे में इजरायल में बनने वाली नई सरकार में अरब पार्टियों का अहम रोल होने जा रहा है. इन सबके बीच यशा पार्टी के प्रमुख नेता गादी आइसेनकोट के बाहर नेतन्याहू-विरोधी प्रदर्शनकारी पहुंचे और एक 'यूनिटी सरकार' (मिली-जुली सरकार) बनाने की मांग करने लगे. इसमें सबसे खास बात है कि ये लोग नई सरकार में अरब पार्टियों को भी शामिल करने की वकालत भी कर रहे हैं.
नेतन्याहू-विरोधी प्रदर्शनकारियों की खास डिमांड
चुनावी नतीजे आने के बाद नेतन्याहू-विरोधी प्रदर्शनकारी यशा पार्टी के प्रमुख नेता गादी आइसेनकोट के घर के बाहर जुटने शुरू हो गए और कहा कि अरब पार्टियों के साथ मजबूत राजनीतिक साझेदारी करने पर विचार किया जाना चाहिए. ये प्रदर्शनकारी फिलिस्तीनियों के साथ शांति स्थापित करने और दोनों समुदायों के बीच मिल-जुलकर रहने का बड़ा संदेश भी दे रहे हैं.
आइसेनकोट के घर के बाहर लोग ऐसे समय पर जुटे हैं, जब इजरायल के हालिया चुनावी नजीतों में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. चुनावी समिति के आधिकारिक में बताया गया कि बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को कुल 53 सीटें मिला हैं. इसके अलावा विपक्षी गुट के गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं. ऐसे में दोनों पक्ष बहुमत से काफी दूर हैं. इस बीच सरकार बनाने में 19 सीटें जीतने वाली अरब पार्टियां 'किंगमेकर' के रूप में उभरी हैं.
विपक्ष रणनीति बनाने में लगा
पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष लगातार रणनीतियां बना रहा है. ऐसे में भले ही नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के पास सबसे अधिक 27 सीटें हों, लेकिन उनके सामने सरकार बनाने की उतनी ही बड़ी चुनौती है. इजरायल में डेमोक्रेट्स पार्टी के अध्यक्ष याइर गोलान ने नई सरकार बनाने की कोशिशों के तहत रा'म पार्टी के अध्यक्ष मंसूर अब्बास से अहम मुलाकात की.
सबसे खास बात है कि यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी गुट में गोलान ही केवल एक नेता हैं, जो खुलकर अरब पार्टी के साथ गठबंधन करने का समर्थन करते रहे हैं. हालांकि, अन्य विपक्षी दल अभी भी ऐसा करने से हिचकिचा रहे हैं. इसके साथ ही गोलान ने गादी आइसेनकोट और विपक्षी नेता यायर लैपिड से भी मुलाकात की और कहा कि हम दोनों इस बड़ी जिम्मेदारी को समझ रहे हैं, इजरयाल को बचाना अब दांव पर है.
क्यों मुश्किल है इजरायल में सरकार का गठन
इधर, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल में एक यूनिटी सरकार बनने की संभावना नजर आ रही है, लेकिन यह एक कठिन फैसला होगा. अगर नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के साथ आइसनकोट की यशा पार्टी, नफ्ताली बेनेट का टुगेदर मूवमेंट और एविग्डोर लिबरमैन की यिसराइल बेतेनु पार्टी एक साथ आती हैं, तो उनके पास कुल 66 सीटें हो जाएंगे, तो बहुमत से अधिक है.
हालांकि, यह गठजोड़ फिलहाल काफी मुश्किल भरा है. चूंकि, चुनाव प्रचार के दौरान विपक्ष ने नेतन्याहू को हटाने की कसम खाई थी. ऐसे में नेतन्याहू के साथ सरकार में आना मुश्किल भरा हो सकता है. इस बीच राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि एक दूसरा रास्ता भी निकल सकता है. आइसेनकोट का गुट अरब पार्टियों के बाहरी समर्थन से एक अल्पमत की सरकार बनाए. गादी के घर के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी इसी रास्ते पर चलने की मांग कर रहे हैं.
राष्ट्रपति के हाथ में इजरायल का भविष्य
गौरतलब है कि इजरायल का राजनीतिक भविष्य अब राष्ट्रपति इसहाक हर्गोज के हाथ में है. अंतिम नतीजों के आधिकारिक प्रकाशन के बाद वह सभी राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे. इसके बाद उस नेता को मौका देंगे, जो सरकार बनाने की सबसे मजबूत स्थिति में नजर आएगा.
हालांकि, अगर मौका पाने वाला दल सरकार बनाने में नाकाम रहता है, तो देश में फिर से चुनाव होने की पूरी संभावना है. इस बीच गादी आइसेनकोट के घर के बाहर जो लोग जुटे हैं, उनका स्पष्ट मत है कि जनता अब शांति और अरब की भागीदारी वाली सरकार बनाने के पक्ष में है.ऐसे में इजरायल में होने वाली अगली राजनीतिक घटना एक दिलचस्प मोड़ पर आकर खड़ी हो गई है.
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