ईरान कुछ बड़ा करने की तैयारी में? US खुफिया एजेंसी की चेतावनी, विदेशों में अमेरिकी कर्मियों पर हमले का खतरा
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव का माहौल है. इस बीच एक ऐसी खबर आई है, जिसने अमेरिका को डरा सा दिया है. यही वजह है कि उसने 4 दूतावासों में स्टाफ घटाने का डिसीजन लिया है.
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है. अब एक ऐसी खबर आई है, जिसने अमेरिका की नींद उड़ा दी है. ईरान कुछ बड़ा करने की प्लानिंग में है और खतरे को भांपते हुए अमेरिका ने जरूरी कदम उठाना शुरू कर दिए हैं. खबर ये है कि ईरान ने अमेरिकी राजनयिकों को निशाना बनाने की साजिश को अंतिम रूप दे दिया है. जैसे ही यह भनक अमेरिकी खुफिया एजेंसी को लगी तो वॉशिंगटन ने जॉर्डन, लेबनान, कतर और यूएई के दूतावासों में कामकाज सीमित कर दिया है.
अमेरिका को खुफिया इनपुट मिला है कि ईरान ने विदेशों में मौजूद अमेरिकी नागरिकों और कर्मियों को निशाना बनाने की तैयारी को अंतिम रूप दे दिया है. इस इनपुट के बाद अमेरिका ने अपने 4 प्रमुख दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या घटाने का डिसीजन लिया है. इनमें जॉर्डन, लेबनान, कतर और यूएई शामिल हैं. ये चारों दूतावास अब कड़े सुरक्षा नियमों और पाबंदियों (रिस्ट्रिक्टेड ऑपरेशंस) के साए में काम करेंगे.
सऊदी अरब से पहले ही बुला लिया गया था स्टाफ
इससे पहले, यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के खतरे को देखते हुए अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने गैर-जरूरी स्टाफ और उनके परिवारों को स्वदेश लौटने को कह दिया था. हालांकि, इन 4 देशों में कर्मचारियों को देश छोड़ने के लिए नहीं कहा गया है, बल्कि उन्हें सिर्फ सीमित कामकाज और कड़ी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
जे क्लेटन ने विदेश मंत्री को भेजा मेमो
सीबीएस न्यूज और एपी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक मेमो भेजकर अलर्ट किया है कि विदेशों में अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ ईरान की खतरनाक साजिशें बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी हैं.
मेमो में जे क्लेटन ने साफ चेताया कि मिडिल ईस्ट समेत कई देशों में अमेरिकी नागरिकों पर हमलों की ईरानी साजिशें अंतिम चरण में हैं. उनके अनुसार, ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को टारगेट करने के प्रयास बढ़ा दिए हैं. हालांकि मेमो में किसी तय निशाने या देश का नाम नहीं है और न ही तुरंत हमले की पुष्टि की गई है. सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ को भी भेजे गए इस मेमो की खबर सबसे पहले एक्सिओस ने ब्रेक की थी.
हूती हमले और तेल टैंकरों पर संकट
अमेरिका के लिए यह सुरक्षा अलर्ट ऐसे वक्त में सामने आया है, जब पूरे इलाके में अमेरिकी स्टाफ, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और कमर्शियल जहाजों पर बड़ा खतरा बना हुआ है. एक तरफ जहां हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के तेल ठिकानों और हवाई अड्डों पर हमले कर रहे हैं, तो वहीं ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास तेल टैंकरों पर हुए हमलों की जिम्मेदारी खुद ली है.
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट कहती है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को अमेरिका द्वारा सुरक्षा दिए जाने से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स भड़क गए हैं और उन्होंने इलाके में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को भी खुली धमकियां दी हैं.
कूटनीतिक बातचीत अधर में लटकी
गौर करने वाली बात ये भी है कि अमेरिका के लिए यह खुफिया चेतावनी ऐसे वक्त में आई है जब वॉशिंगटन और तेहरान को औपचारिक बातचीत की मेज पर लाने की कूटनीतिक कोशिशें चल रही हैं, जो फिलहाल अधर में हैं. हालांकि पिछले कुछ दिनों में दोनों मुल्कों के बीच कोई सीधा सैन्य टकराव नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई के विकल्प को पूरी तरह खारिज नहीं किया है.
'समझौते पर नहीं माने तो फिर होगा एक्शन': ट्रंप
शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने ईरान पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने संकेत दिया है कि अगर ईरान किसी समझौते पर एग्री नहीं होता तो अमेरिका दोबारा बड़ा एक्शन ले सकता है. ट्रंप ने फरवरी में शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान का जिक्र करते हुए कहा, 'हम एक और छोटा 'एपिक फ्यूरी' कर सकते हैं, या फिर वे सहमत हो जाएंगे.'
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