विजेताओं की संस्था बनकर रह गया UN: संयुक्त राष्ट्र के दोगलापन को भारत ने दिखाया आईना, UNGA में दिया दोटूक संदेश
P Harish In UNGA: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने UN पर निशाना साधते हुए उसके दोगलेपन पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि 80 साल पहले हुई जंग आज संयुक्त राष्ट्र की दिशा तय नहीं कर सकती है.
United Nations: भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में संयुक्त राष्ट्र (UN) को आईना दिखाते हुए कहा कि 80 साल पहले हुई एक जंग का नतीजा आज के UN की दिशा तय नहीं कर सकता. इतना ही नहीं भारत ने यह भी कहा कि UNGA की ओर से दुनिया की सही और संतुलित तस्वीर नहीं दिखाने के चलते संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता लगातार कम हो रही है.
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार ( 22 अक्टूबर 2026) को UNGA में कहा,' कोई भी जंग खासकर ऐसा युद्ध जो 80 साल से भी पहले हुआ हो आज की दुनिया की स्थिति तय नहीं कर सकता है.'
UNGA को दिखाया आईना
पी हरीश ने कहा कि आठ दशक पहले मिली जीत के आधार पर मिली ताकत आज की गैर-प्रतिनिधित्व वाली सुरक्षा परिषद की वैधता की कमी को पूरा नहीं कर सकती. हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता आज भी उन देशों के पास है, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध का विजेता माना जाता है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने उस युद्ध में बड़ी भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा,' करीब 25 लाख भारतीयों ने युद्ध में हिस्सा लिया था और लगभग 90 हजार भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी.' पी हरीश ने कहा कि युद्ध के दौरान औपनिवेशिक नीतियों की वजह से हुए बंगाल अकाल में 40 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. हरीश के मुताबिक, कुछ लोग इस सच्चाई को नजरअंदाज करना चाहते हैं या इसे दबाने की कोशिश करते हैं.
'विजेताओं के लिए बनाई गई संस्था...'
पी हरीश ने UNGA में UN पर तीखा हमला करते हुए आगे कहा,' विजेताओं की ओर से विजेताओं के लिए और विजेताओं की सोच से बनाई गई संस्था ने स्वाभाविक रूप से पीड़ितों की चिंताओं को शामिल नहीं किया.' उन्होंने कहा कि 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर में विजेता देशों को दिए गए विशेष अधिकार कुछ देशों को बदलाव रोकने का तरीका दे देते हैं, लेकिन इन अधिकारों का इस्तेमाल सुरक्षा परिषद सुधार पर होने वाली अंतर-सरकारी वार्ताओं (IGN) को अनिश्चित समय तक रोकने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत के लिए मसौदा पाठ, समय-सीमा और स्पष्ट दिशा तय होना जरूरी है.
UN में होना चाहिए सुधार?
हरीश ने आरोप लगाया कि इटली के नेतृत्व वाले कुछ देशों का एक छोटा समूह, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल है, प्रक्रियागत तरीके अपनाकर बातचीत के लिए जरूरी मसौदा पाठ को अपनाने से रोक रहा है. यह समूह खुद को 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' (UFC) कहता है और उसका कहना है कि मसौदा पाठ अपनाने से पहले सभी देशों के बीच सहमति होनी चाहिए. इस पर हरीश ने कहा,' हमें यह सोच समझ नहीं आती क्योंकि किसी भी बहुपक्षीय प्रक्रिया में बातचीत शुरू करने के लिए पहले एक मसौदा पाठ जरूरी होता है न कि बातचीत खत्म होने के बाद.' उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में होने वाली अन्य प्रक्रियाओं की तरह ही सुरक्षा परिषद सुधार से जुड़ी वार्ताएं भी एक लिखित मसौदे के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए. ( इनपुट- IANS)