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इजरायल में विपक्ष को मिला मैजिक नंबर! नेतन्याहू को उन्हीं के चुनावी दांव ने घेरा, अरब पार्टीज ने दिया झटका

इजरायल में नेतन्याहू की सत्ता पर संकट गहराता दिख रहा है. दो अरब पार्टियों ने विपक्षी नेता गादी आइसेनकोट को समर्थन देने की पेशकश की है. इससे विपक्ष को 67 सांसदों का समर्थन मिल सकता है, जो बहुमत से अधिक है.

Written By Tahir Kamran
Published: Nov 05, 2026, 11:10 PM IST | Updated: Nov 05, 2026, 11:20 PM IST
Image Credit: गादी आइसेनकोट और बेंजामिन नेतन्याहू
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इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को उनकी कुर्सी से हटाने रास्ता अब धीरे-धीरे साफ होता दिखाई दे रहा है. न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, अरब पार्टी जॉइंट लिस्ट के वरिष्ठ नेता अहमद तिबी ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए विपक्ष के साथ मिलकर काम करने की पेशकश की है. इजरायल में हाल ही में हुए चुनाव के बाद किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में अरब पार्टियां पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को समर्थन देने की पेशकश कर रही हैं. इससे नेतन्याहू की सरकार पर संकट खड़ा हो सकता है.

तिबी ने AP से कहा,'हम इस सरकार को हटाने के लिए वे काम करना चाहते हैं, जो हमने पहले नहीं किए.' उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी पार्टी सरकार में शामिल भी होगी.

इससे एक दिन पहले बुधवार को मंसूर अब्बास के नेतृत्व वाली दूसरी अरब पार्टी राआम ने भी राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के सामने गादी आइसेनकोट को अगली सरकार बनाने के लिए समर्थन देने की बात कही थी. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, राआम के आठ सांसदों के समर्थन से आइसेनकोट के पक्ष में समर्थन बढ़ गया है.

चुनाव में किसी को नहीं मिला बहुमत

27 अक्टूबर को हुए चुनाव के बाद इजरायल की 120 सदस्यीय संसद यानी नेसेट में किसी भी गठबंधन को बहुमत नहीं मिला. नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिलीं, जबकि गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को 48 सीटें मिलीं. वहीं, जॉइंट लिस्ट को 11 और राआम पार्टी को 8 सीटें मिली हैं. दोनों अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं. अगर ये दोनों पार्टियां विपक्ष को समर्थन देती हैं तो आइसेनकोट के पक्ष में 67 सांसद हो सकते हैं. इजरायल में सरकार बनाने के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है.

इस तरह अरब सांसद सरकार गठन की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा सकते हैं. जॉइंट लिस्ट विपक्षी सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है. यानी वह सरकार में मंत्री पद लिए बिना भी महत्वपूर्ण संसदीय वोटिंग में विपक्ष का साथ दे सकती है. इस व्यवस्था से यहूदी नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टियां सरकार बना सकती हैं और जरूरी फैसलों के लिए अरब सांसदों के समर्थन पर निर्भर रह सकती हैं.

अरब पार्टियों के लिए बदला राजनीतिक रुख

इजरायल में अरब पार्टियां आमतौर पर सरकार में शामिल होने से दूर रही हैं. हालांकि, पहले भी अरब सांसदों ने संसद में वोटिंग के दौरान सरकारों का समर्थन किया है. साल 2021 में एक बड़ा बदलाव हुआ था. तब मंसूर अब्बास की राआम पार्टी कई दशकों में पहली ऐसी स्वतंत्र अरब पार्टी बनी, जो इजरायल की सरकार में औपचारिक रूप से शामिल हुई. इस पार्टी ने नफ्ताली बेनेट और यायर लैपिड की सरकार को समर्थन दिया था. इससे नेतन्याहू के लगातार 12 साल के शासन का अंत हुआ था.

हालांकि, जॉइंट लिस्ट का रुख हमेशा से इजरायल की राजनीतिक व्यवस्था के प्रति ज्यादा सख्त रहा है. तीन अरब पार्टियों के इस गठबंधन ने इजरायल को यहूदी देश के रूप में परिभाषित किए जाने का विरोध किया है. यह सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और वेस्ट बैंक, गाजा तथा पूर्वी यरुशलम में फिलिस्तीनी देश बनाने की वकालत करता है. ऐसे में जॉइंट लिस्ट का अब विपक्षी सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार होना उसके पुराने राजनीतिक रुख से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्ष के सामने भी मुश्किल

भले ही अरब पार्टियों के समर्थन से विपक्ष को संसद में बहुमत मिल सकता है, लेकिन उनके साथ मिलकर सरकार बनाना गादी आइसेनकोट और उनके सहयोगियों के लिए आसान नहीं होगा. विपक्ष के कुछ नेता ऐसे सांसदों के समर्थन पर निर्भर रहने से हिचक रहे हैं, जिनके इजरायल की राष्ट्रीय पहचान, फिलिस्तीन के मुद्दे और गाजा युद्ध को लेकर विचार उनसे काफी अलग हैं.

टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक, आइसेनकोट ने अपनी सरकार में शामिल होने की इच्छा रखने वाली पार्टियों के सामने चार शर्तें रखी हैं. इनमें इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक देश के रूप में स्वीकार करना, स्वतंत्रता की घोषणा में बताए गए मूल्यों को मानना, सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सेवा का समर्थन करना और हमास को आतंकी संगठन मानते हुए उसे खत्म करने की बात शामिल है. हालांकि, अहमद तिबी का कहना है कि ये शर्तें जॉइंट लिस्ट पर लागू नहीं होनी चाहिए. उनका तर्क है कि उनकी पार्टी सरकार में शामिल हुए बिना केवल संसद में विपक्षी सरकार को समर्थन दे सकती है

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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