'ईरान के टॉप लीडर्स को मारना बंद करो', डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों दी ये नसीहत? जानिए वजह
Donald Trump On Iran: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शीर्ष नेताओं को खत्म करने को लेकर बड़ा बयान दिया है. जानिए क्यों ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब ईरानी कमांडरों को निशाना बनाना बंद करना पड़ेगा और इसका कूटनीतिक बातचीत पर क्या असर पड़ रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां युद्ध की आहट एक बार फिर साफ़ सुनाई देने लगी है. एक तरफ जहां कुछ सप्ताह से दोनों देशों के बीच सीधी गोलाबारी थमी हुई थी, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयानों और नए सैन्य जमावड़े ने पूरे मिडिल ईस्ट में हलचल तेज कर दी है. ट्रंप का आक्रामक रुख और ईरान की तरफ से आ रही जवाबी चेतावनियां इशारा कर रही हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष नया मोड़ ले सकता है.
रविवार को एक चुनावी रैली के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के मौजूदा नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने ईरान की मौजूदा हालत पर तंज कसते हुए कहा कि वहां की शीर्ष कमान पूरी तरह बिखर चुकी है. ट्रंप ने रैली में कहा, 'उनके पास न तो हवाई जहाज बचे हैं, न कोई शिप और न ही कोई नेता. उनके पहली कतार के नेता मारे जा चुके हैं और दूसरी कतार के नेता भी खत्म हो चुके हैं. अब मुझे कुछ देर रुकना होगा ताकि यह समझ सकूं कि आख़िर हम बातचीत किससे करें.'
सुप्रीम लीडर अयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई नेताओं की मौत
ट्रंप की इस टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही वायरल हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह लगातार संकेत दे रहे हैं कि 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनावों के बाद ईरान पर हमले दोबारा शुरू हो सकते हैं. इस नौ महीने लंबे चले संघर्ष की शुरुआत में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के कई प्रमुख राजनीतिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था. इन हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई सहित कई बड़े नेताओं और कमांडरों की मौत हो गई थी.
मोजतबा खामेनेई पर भी ट्रंप का निशाना
खामेनेई के बाद उनके बेटे मोजतबा ख़ामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया, लेकिन वह भी इन हमलों में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. हालांकि मोजतबा खामेनेई की तरफ से लिखित बयान जारी किए जा रहे हैं, लेकिन हमले के बाद से वह अब तक सार्वजनिक रूप से दुनिया के सामने नहीं आए हैं. इसी प्रशासनिक शून्यता और शीर्ष नेताओं की कमी को आधार बनाकर ट्रंप निशाना साध रहे हैं.
मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य घेराबंदी और युद्ध की आहट
सिर्फ बयानों तक सीमित न रहकर अमेरिका ने रणनीतिक रूप से भी दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है. ट्रंप प्रशासन ने इस क्षेत्र में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप तैनात कर दिया है, जिसके साथ लगभग 10,000 अमेरिकी नाविक और मरीन सैनिक भी भेजे गए हैं. हालांकि, बीते कुछ हफ़्तों से दोनों देशों के बीच हमलों में अस्थायी विराम लगा हुआ था, लेकिन अमेरिकी सेना की इस बड़ी तैनाती और ट्रंप के कड़े तेवरों से साफ़ है कि अमेरिका 3 नवंबर के चुनावों के बाद किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की तैयारी में है.
यह भी पढ़ेंः काम शुरू होने से ठीक पहले ट्रंप के 'विजय द्वार' पर कानूनी ग्रहण! पूर्व सैनिकों ने क्यों खटखटाया अदालत का दरवाजा?
ईरान का कड़ा संदेश: 'नतीजे पहले जैसे ही होंगे'
अमेरिका के इस आक्रामक रुख के बीच ईरान ने भी साफ़ कर दिया है कि वह झुकने के मूड में नहीं है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को साफ शब्दों में कहा कि अगर फिर से युद्ध की शुरुआत होती है, तो भी ईरान अपनी नीतियों से पीछे नहीं हटेगा. अराघची ने न्यूज एजेंसी एएफपी (AFP) से बात करते हुए कहा, 'हाल के दिनों में एक नए युद्ध की चर्चाएं तेज हुई हैं, लेकिन मैं अभी से युद्ध के बाद के समय के बारे में सोच रहा हूं. चाहे युद्ध हो या न हो, हमारी नीतियां और हमारा रुख बिल्कुल वही रहेगा.' अमेरिकी चेतावनी पर पलटवार करते हुए ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, 'वे पहले भी दो बार यह कोशिश कर चुके हैं और इसके नतीजे देख चुके हैं. अगर वे दोबारा कोशिश करना चाहते हैं, तो उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि इस बार भी उन्हें अतीत से अलग कोई नतीजा नहीं मिलने वाला.'
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बदलती स्थितियां
ईरान और अमेरिका के बीच सबसे तनावपूर्ण इलाका 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' रहा है. यह समुद्री मार्ग दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि दुनिया भर के कच्चे तेल की कुल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुज़रता है. पिछले नौ महीनों में इस इलाके में दोनों देशों के जहाजों और सेनाओं के बीच रुक-रुक कर गोलाबारी होती रही है. अब्बास अराघची ने इस वैश्विक समुद्री रास्ते को लेकर चेतावनी देते हुए कहा, 'इस मौजूदा युद्ध ने सब कुछ बदल कर रख दिया है. हमें यह स्वीकार करना होगा कि अब जमीन पर नई हकीकतें आकार ले रही हैं. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाला व्यापारिक और समुद्री जहाजों का आवागमन अब वैसा नहीं रहेगा जैसा पहले हुआ करता था, और न ही इस रास्ते का प्रबंधन अब पुराने ढर्रे पर चलेगा.'
आगे का रास्ता किस ओर?
नौ महीने से चल रही इस खींचतान में भले ही इस समय मिसाइलें शांत हों, लेकिन दोनों तरफ से बयानबाजी और सैन्य तैयारी चरम पर है. एक तरफ जहां राष्ट्रपति ट्रंप चुनावों के बाद ईरान पर अंतिम दबाव बनाने का मन बना चुके हैं, वहीं ईरान भी बुनियादी ढांचे और नेतृत्व के नुकसान के बावजूद अपने रुख पर अडिग है. 3 नवंबर के बाद यह तनाव शांत होगा या पूरे क्षेत्र को एक और विनाशकारी युद्ध में धकेल देगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.
यह भी पढ़ेंः क्या इल्हान उमर ने अपने भाई से शादी की? फिर चर्चा में आया 2013 का ट्वीट, ट्रंप ने मांग लिया इस्तीफा