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जमीन से हजारों फीट ऊपर फ्लाई दुबई की फ्लाइट में सैकड़ों यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय मूल के पायलट स्मित मछार की असाधारण बहादुरी के लिए पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है. उन्होंने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट के कॉकपिट में हुए हमले के दौरान उन्होंने न सिर्फ को-पायलट के हमले को रोका बल्कि विमान को क्रैश होने से बचाया.
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के पायलट समुदाय तक सभी मछार की तारीफ कर रहे हैं. मछार का अभी सऊदी अरब के तबुक के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.
मछार ने इतिहास की सबसे भयानक विमान दुर्घटनाओं में से एक को टालने में अहम भूमिका निभाई. लेकिन उनके साथ तीन और इजरायली नागरिक थे, जो अपनी जान की परवाह न करते हुए इस मुश्किल वक्त में आगे आए. उन्होंने 'साइको' को-पायलट का सामना किया और उसे काबू में किया. साथ ही, एक इजराइली डेंटिस्ट ने घायल कैप्टन का इलाज किया.
द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में सवार यात्रियों ने बुधवार को इजरायल सुरक्षित लौटने के बाद अपने अनुभव बताए. उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव की यात्रा के दौरान जब कॉकपिट में हिंसक झड़प हुई, तो उन्होंने कैसे रिएक्ट किया.
कॉकपिट में हुई झड़प के बीच विमान की ऊंचाई तेजी से कम होने के बाद उसे सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. फ्लाइट में 174 लोग सवार थे, जिनमें 166 इजरायली यात्री और आठ अन्य लोग शामिल थे.
मछार पर उनके को-पायलट ने चाकू से हमला किया था. झड़प के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए. यात्रियों और इजरायली अधिकारियों के अनुसार, इसके बावजूद वे कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, जिससे केबिन में मौजूद लोग मदद के लिए आगे आ सके.
जब भारतीय कैप्टन की तारीफ हो रही थी, तब हमलावर को काबू करने में मदद करने वाले यात्रियों के बयानों से उस सामूहिक कोशिश का पता चला जिसने इमरजेंसी की स्थिति को काबू में करने में मदद की.
पेशे से प्लंबर यानिव हयून उन यात्रियों में शामिल थे, जो झड़प शुरू होने के बाद कॉकपिट में गए थे. घर लौटने के बाद बेन गुरियन हवाई अड्डे पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात करते हुए, उन्होंने बताया कि उन्हें घायल कैप्टन दरवाजे के पास और वो हमलावर विमान के कंट्रोल के पास मिला था.
द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार हयून ने बताया कि उन्होंने उस शख्स को पकड़ा, उसे काबू में किया और कंट्रोल से दूर खींच लिया. जब नेतन्याहू ने पूछा कि को-पायलट क्या कर रहा था, तो हयून ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि वह कंट्रोल को नुकसान पहुंचाने और विमान को बेकार करने की कोशिश कर रहा था.
इसके बाद, जब विमान तेजी से एक तरफ झुक रहा था, तब हयून ने कॉकपिट में लौटने से पहले दूसरे यात्रियों से उस शख्स को रोकने में मदद करने के लिए कहा.
उन्होंने बताया कि विमान को सीधा करने की कोशिश में उन्होंने कंट्रोल पकड़े और उन्हें पीछे की ओर खींचा. जब उनसे पूछा गया कि उन्हें कैसे पता चला कि क्या करना है, तो हयून ने मजाक में कहा कि उन्होंने 'मेडे' (Mayday) देखी थी, जो विमान दुर्घटनाओं पर बनी एक कनाडाई डॉक्यूमेंट्री सीरीज है.
द टाइम्स ऑफ इजराइल के अनुसार, हयून ने कहा, 'विमान थोड़ा सीधा होने लगा और फिर पायलट ने मुझसे कहा कि अब वह कंट्रोल संभाल लेंगे.'
बीच-बचाव करने वाले एक अन्य यात्री राजवान ने इस मुश्किल अनुभव के बारे में बताया कि उन्होंने ऐसी घटना के बारे में पहले सिर्फ फिल्मों में ही सोचा था. इजरायल के चैनल 12 से बात करते हुए उन्होंने बताया कि विमान के बेकाबू होकर घूमने (स्पाइरल करने) से पहले यात्रियों ने कॉकपिट से चिल्लाने की आवाजें सुनी थीं. कॉकपिट का दरवाजा खुला होने पर, वह और अन्य यात्री क्रू सदस्यों के साथ अंदर गए और हमलावर को काबू करने में मदद की.
राजवान ने बताया कि उस समूह ने उस शख्स को लगभग 55 मिनट तक काबू में रखा, जब तक कि विमान सुरक्षित रूप से लैंड नहीं हो गया. इस घटना के दौरान उन्हें भी चोटें आईं, हालांकि उन्होंने बताया कि चोटें ज्यादा गंभीर नहीं थीं.
रिपोर्ट के अनुसार, राजवान ने यह भी कहा कि यात्री शुरू में घर लौटने के लिए फ्लाईदुबई के दूसरे विमान में सवार होने को लेकर हिचकिचा रहे थे और फ्लाइट क्रू के बारे में साफ आश्वासन चाहते थे.
इस बात पर जोर देते हुए कि यात्रियों का बचना एक सामूहिक उपलब्धि थी, उन्होंने कहा, 'जिंदगी हर चीज से ज्यादा मजबूत है और हमने इसके लिए लड़ने का फैसला किया.'
मानेस, वो तीसरे इजरायली यात्री थे. उन्होंने भी हमलावर को-पायलट को काबू करने में मदद की. उन्होंने चैनल 12 को बताया कि यह आपातकालीन स्थिति तब पैदा हुई जब उनकी पत्नी उनकी छोटी बेटी को विमान के अगले हिस्से में बने वॉशरूम ले जा रही थीं. उनके बताए अनुसार, उनकी पत्नी ने कॉकपिट से चीखने और हाथापाई की आवाजें सुनीं, उन्होंने एक फ्लाइट अटेंडेंट को अलर्ट किया और क्रू सदस्य से यह देखने को कहा कि क्या हो रहा है.
मानेस ने बताया कि कैप्टन कॉकपिट के दरवाजे से बाहर गिर पड़े, जबकि को-पायलट कथित तौर पर उन्हें चाकू मार रहा था. इसके बाद विमान तेजी से नीचे गिरने लगा, जिससे यात्री केबिन में इधर-उधर उछलने लगे.
अपनी बेटी को बाथरूम से बाहर निकालने के बाद, मानेस हमलावर को काबू करने की कोशिश में शामिल हो गए. उन्होंने बताया कि तीन इजरायली यात्रियों ने आखिरकार उस आदमी को काबू में कर लिया और उसे बांधने के लिए वायर्ड हेडफोन का इस्तेमाल किया.
मैनेस ने इस घटना को किसी हॉरर फिल्म जैसा बताया और याद किया कि जब विमान तेजी से जमीन की ओर गिर रहा था, तो उनकी बेटियां रोते हुए कह रही थीं कि वे मरना नहीं चाहतीं.
जब तीन यात्री हमलावर को काबू करने में मदद कर रहे थे, तब इजरायली डेंटिस्ट शोता मुसायेव मछार की चोटों का इलाज कर रहे थे. मुसायेव ने 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' को बताया कि चीखें सुनकर वे कॉकपिट की ओर दौड़े और देखा कि भारतीय कैप्टन बुरी तरह घायल थे और उनके सिर से बहुत ज्यादा खून बह रहा था.
उन्होंने बताया कि वे विमान में मौजूद अकेले डॉक्टर थे और उन्होंने खून बहना रोका और मछार का ब्लड प्रेशर स्थिर किया. मुसायेव का मानना था कि इमरजेंसी इलाज से 39 साल के पायलट की जान बचाने में मदद मिली.
डेंटिस्ट ने यह भी बताया कि उन्होंने हमलावर के हाथ-पैर बार-बार बांधे ताकि वह छूट न सके और दोबारा हमला न कर सके. आखिरकार विमान सऊदी अरब में सुरक्षित उतरा और यात्री दूसरी फ्लाइट से इजरायल लौट आए. कॉकपिट में हुई झड़प और को-पायलट के मकसद की जांच चल रही है.
घटना के दौरान मछार के काम की काफी तारीफ हुई. नेतन्याहू ने भारतीय कैप्टन को हीरो बताया और कहा कि चाकू लगने और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, जिससे यात्री और क्रू मेंबर मदद के लिए अंदर आ सके.