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कांगो और युगांडा के बाद नाइजीरिया में भी 'इबोला' की दस्तक, स्विस कर्मी की पत्नी में मिला नया स्ट्रेन, 53 लोग किए गए आइसोलेट

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में इस साल इबोला वायरस का पहला मामला सामने आया है, जिससे वहां पर हड़कंप मचा है. उस मरीज के संपर्क में सभी लोगों को आइसोलेट कर सबकी मेडिकल जांच की जा रही है.

Written By Devinder Kumar
Published: Oct 26, 2026, 05:27 PM IST | Updated: Oct 26, 2026, 05:32 PM IST
Image Credit: नाइजीरिया में इबोला वायरस के हड़कंप मचा है (इमेज रायटर्स)
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अफ्रीका में इबोला वायरस तबाही मचा रहा है. कांगो में इस साल मई के बाद से अब तक इस वायरस से 4600 लोग जान गंवा चुके हैं. कांगो के बाद अब यह इबोला वायरस युगांडा और नाइजीरिया पहुंच गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि अफ्रीका इस समय इबोला के प्रकोप में है. वहां पर यह वायरस वायरस महाद्वीप के पश्चिमी, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में फैल चुका है.

नाइजीरिया में भी हुई इबोला की एंट्री

रिपोर्ट के मुताबिक, अब नाइजीरिया में भी इबोला वायरस के नए स्ट्रेन की पुष्टि हुई है. यह मरीज नाइजीरिया की नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड की है. उसका पति नाईजीरिया की राजधानी अबुजा में बने स्विट्जरलैंड दूतावास का एक कर्मचारी की पत्नी हैं. नाइजीरिया में तैनाती के दौरान वह घूमने के लिए युगांडा की यात्रा पर गई थीं, जहां पर वह इबोला की चपेट में आ गई.

नाइजीरिया लौटने पर जब उसमें अजीब लक्षण उभरने लगे तो महिला की मेडिकल जांच करवाई गई, जिसमें उसे इबोला वायरस होने की पुष्टि हुई. इसके बाद उसे बाकी मरीजों से अलग एक स्पेशल रूम में शिफ्ट कर दिया गया. इसके साथ ही डॉक्टरों ने उस मरीज के संपर्क में आए 53 लोगों की भी पहचान की है. जिनकी अब जांच की जा रही है.

स्पेशल प्लेन से भेजा गया स्विट्जरलैंड

नाइजीरिया के स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद अली पाटे ने कहा कि इलाज के बाद महिला की हालत में काफी सुधार हुआ है. वह अब स्थिर है और होश में हैं. क्लिनिकल लैब टेस्ट में उसकी रिपोर्ट सामान्य स्थिति के करीब पहुंच रही है. हालत खतरे से बाहर है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि उससे संक्रमण फैलने का खतरा खत्म हो गया है. मंत्री ने बताया कि मरीज को प्लेन के जरिए सोमवार को स्विटजरलैंड वापस भेज दिया गया है.

बताते चलें कि नाइजीरिया में 12 साल पहले भी इबोला फैला था. लेकिन सही समय पर वैक्सीनेशन करके उसने इस बीमारी को काफी हद तक रोक दिया था. अब यह वायरस एक बार फिर अपने पैर पसार रहा है. इस बार वायरस का 'बुंडीबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन कहर ढहा रहा है.

डॉक्टरों के पास नहीं है कोई प्रभावी वैक्सीन

दिक्कत की बात ये है कि इस स्ट्रेन से निपटने के लिए डॉक्टरों के पास कोई प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. जिसके चलते वे समझ नहीं पा रहे हैं कि इस वायरस से मुकाबले के लिए आखिर क्या किया जाए. ऐसे में वे लोगों को इबोला प्रभावित देशों की यात्रा से बचने और लक्षण दिखने पर अपनी जांच करवाने की सलाह दे रहे हैं. 
 

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About the Author

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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