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Uttarakhand News: उत्तराखंड में जमीनों के आवंटन को लेकर कांग्रेस ने धामी सरकार पर बड़ा हमला बोला है. कांग्रेस की चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने आरोप लगाया है कि सरकार ने कानून को ताक पर रखकर 225 एकड़ कीमती इंडस्ट्रियल जमीन को औने-पौने दाम पर बेच दिया है.
सरकारी संपत्ति बेचने के ये नियम
कांग्रेस के मुताबिक, उत्तराखंड में नियम है कि 12.50 एकड़ से ज्यादा कोई भी सरकारी संपत्ति बेचनी या लीज पर देनी हो तो कैबिनेट से मंजूरी लेना अनिवार्य है, लेकिन सरकार ने UII-DB को कैबिनेट से एक्स्ट्रा पावर दिलाकर पूरे नियम को ही बायपास कर दिया. करन माहरा का आरोप है कि एक साल तक इस पूरे मामले को गुप्त रखा गया. अगर सब कुछ पारदर्शी था तो इसे ओपन क्यों नहीं किया गया.
सिक्का ग्रुप पर घोटाले का आरोप
करन माहरा ने दूसरा बड़ा आरोप सिक्का ग्रुप को लेकर लगाया. उन्होंने कहा कि हेल्थ डिपार्टमेंट की हॉस्पिटल की जमीन को फ्लैट्स बना कर बेचने के लिए दिया जाना भी बड़ा घोटाला है. सबसे बड़ा आरोप 225 एकड़ इंडस्ट्रियल जमीन को लेकर है. ये जमीन मूल रूप से बेरोजगार युवाओं को इंडस्ट्री लगाने के लिए आरक्षित की गई थी. करन माहरा ने कहा कि इस तरह से जमीनें बेच कर सरकार आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अंधकार में धकेल रही है. अगर सब कुछ बेच कर चले जाएंगे तो राज्य बनाने का औचित्य क्या रह जाएगा?. कांग्रेस ने ऐलान किया है कि अगर उनकी सरकार आई तो इन सभी जमीनों को वापस सरकार में निहित किया जाएगा.
जमीन आवंटर की प्रक्रिया को गैरकानूनी बताया
कुल मिलाकर कांग्रेस ने इस बार सिर्फ भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगाया, बल्कि जमीन आवंटन के पूरे प्रोसेस को ही गैरकानूनी बताया है. अब देखना होगा कि सरकार और उत्तराखंड एकीकृत अवसंरचना विकास बोर्ड (UII-DB) इस पर क्या जवाब देती है.
UKSSSC के अध्यक्ष की भूमिका को लेकर सरकार को घेरा
वहीं, पूर्व सीएम हरीश रावत के OSD चंदन सिंह जीना के घर ED की कार्रवाई के बाद कांग्रेस लगातार बीजेपी पर चुनावी बदले की राजनीति का आरोप लगा रही है. अब नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने इस पूरे मामले की टाइमिंग और आयोग के अध्यक्ष की भूमिका को लेकर बीजेपी सरकार को घेरा है. यशपाल आर्य ने कहा कि ये मामला 2016 के VPDO भर्ती घोटाले का है, ये सच है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि उस वक्त उत्तराखंड राज्य अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष कौन थे और कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें पद से क्यों हटाया था?
चुनाव नजदीक देखकर कार्रवाई करने का आरोप
यशपाल आर्य ने कहा कि जिस अधिकारी को कांग्रेस सरकार ने भ्रष्टाचार के शक में हटाया था, उसी को भाजपा सरकार ने आते ही पर्यावरण मित्र जैसी बड़ी जिम्मेदारी देकर इनाम दे दिया और अब 10 साल बाद, जब 2016 से 2026 तक 10 साल बीत चुके हैं और चुनाव नजदीक हैं, तब इस पुराने केस को जांच की परिधि में लाया जा रहा है, जिस पर सवाल खड़ा होना लाजमी है. इस मामले पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और CWC सदस्य करन माहरा का कहना है कि चुनाव नजदीक देख यह कार्रवाई की गई है, जबकि इस पूरे मामले में जांच ही हरीश रावत सरकार ने बैठाई थी और परीक्षा को रद्द किया था.