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उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन बेहद हंगामेदार रहने वाला है. जहां सदन में कांग्रेस नियम 310 के तहत अंकिता भंडारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग कर सकती है, वहीं गैरसैंण में हंगामे के बीच सरकार सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुपूरक बजट और 10 अध्यादेश विधेयक पारित करने वाली है. इतना ही नहीं, खानपुर से निर्दलीय विधायक के इस्तीफे के ऐलान ने हलचल तेज कर दी है.
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को सदन के पटल पर अनुपूरक बजट (अनुदान मांगों 1 से 31 तक) पर व्यापक चर्चा और मतदान होगा. संसदीय कार्यमंत्री सुबोध उनियाल द्वारा पेश किए गए 'उत्तराखंड विनियोग (2026-27 अनुपूरक) विधेयक, 2026' और 10 प्रमुख संशोधन विधेयकों (जैसे माल एवं सेवा कर, सिंचाई जल निकासी, जन विश्वास उपबंध, और अग्निशमन सेवा विधेयक) को आज सदन की मंजूरी दी जाएगी.
बुधवार को जो विधेयक पास होंगे, उनमें उत्तराखंड सिंचाई जल निकासी विधेयक, उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरादायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक, उत्तराखंड निवेश व आधारित संरचना विकास और विनियमन संशोधन विधेयक, उत्तराखंड जन विश्वास उपबंधों का संशोधन विधेयक, अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम विधेयक, शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक, सिविल विधि संशोधन विधेयक, अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, माल और सेवा कर संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय द्वितीय संशोधन विधेयक शामिल है.
इसके अलावा उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक लेखा विवरण, सूचना का अधिकार अधिनियम की वार्षिक प्रतिवेदन, उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी गई है.
बुधवार को सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी. कांग्रेस ने राज्य के चर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण पर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बनाई है. कांग्रेस नियम 310 के तहत कार्यस्थगन का प्रस्ताव लाकर इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा की मांग कर सकती है, जिससे सदन में जोरदार हंगामे के आसार बने हुए हैं.
सत्र के दूसरे दिन का सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की इस्तीफे की घोषणा है. उन्होंने औपचारिक रूप से बुधवार को सदन की सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि उन्होंने साढ़े चार साल तक हरिद्वार के किसानों, इकबालपुर शुगर मिल के 118 करोड़ रुपये के बकाए और 2023 की आपदा राहत जैसे जनहित के मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई, लेकिन कांग्रेस ने कभी उनका साथ नहीं दिया. विपक्ष की निष्क्रियता और उपेक्षा से निराश होकर उन्होंने सदन से हटने का फैसला किया है.
उमेश कुमार ने साफ कहा है कि वह न तो भाजपा में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस का दामन थामेंगे. हाल ही में उनकी पत्नी द्वारा गठित 'जन निर्माण पार्टी' के जरिए वह आगामी विधानसभा चुनावों में अपने सहयोगियों के साथ एक नए विकल्प के रूप में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.
कुल मिलाकर, अनुपूरक बजट के पारित और विधेयकों पर मुहर के बीच विधायक के इस्तीफे और विपक्ष के हंगामे ने मानसून सत्र के दूसरे दिन को बेहद दिलचस्प बना दिया है.