बर्फीली चोटियां, बुग्याल और शिव-पार्वती का मंदिर... सारा के फेवरेट ट्रेक पर शुरू होगा नया रोमांच, बिना कंक्रीट संवरेगी खूबसूरती
पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती को नजदीक से निहारने के शौकीनों के लिए अच्छी खबर है. रुद्रप्रयाग में पवाली कांठा और माटिया बुग्याल होते हुए त्रियुगीनारायण मंदिर तक एक नया ट्रैक विकसित करने की तैयारी है. इसकी डीपीआर तैयार हो चुकी है.
अगर आप भी उत्तराखंड की बर्फीली चोटियों, हरे-भरे मखमली बुग्यालों और शांत वादियों के बीच ट्रेकिंग करने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक गुड न्यूज है. देवभूमि के रुद्रप्रयाग में जल्द ही एडवेंचर लवर्स को एक नया और रोमांचक ईको-ट्रेकिंग रूट मिलने जा रहा है. केलबागी से पवाली कांठा और माटिया बुग्याल होते हुए भगवान शिव-पार्वती के पौराणिक विवाह स्थल यानी 'त्रियुगीनारायण मंदिर' तक एक नया ट्रेकिंग रूट विकसित किया जा रहा है.
अब नए कलेवर में सारा अली खान का पसंदीदा ट्रैक
खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है. अब आगे की कार्यवाही की जा रही है. पवाली कांठा का यह खूबसूरत इलाका ट्रेकर्स के बीच पहले से ही काफी मशहूर है. बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान जब अपनी केदारनाथ यात्रा के दौरान इस बुग्याल में ट्रेकिंग करने पहुंची थीं, तब इसके प्राकृतिक नजारे को नेशनल लेवल पर एक नई पहचान मिली थी. अब वन विभाग इस लोकप्रिय मार्ग को सीधे त्रियुगीनारायण मंदिर से जोड़ने जा रहा है.
इस नई कनेक्टिविटी से न सिर्फ तीर्थाटन और साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) का बेहतरीन मेल देखने को मिलेगा, बल्कि उत्तराखंड के स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी नया पंख लगेगा.
पूरी तरह कुदरती अंदाज में होगा विकास
इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अनोखी बात यह है कि पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के नाम पर पहाड़ों के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यावरण के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा. रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ विनीत कुमार मिश्रा ने बताया कि तीन वन प्रभागों की टीमों ने खुद पूरे मार्ग का पैदल निरीक्षण कर रास्ते की चुनौतियों, पड़ाव स्थलों और बुनियादी जरूरतों का आकलन किया है.
दो ईको-गेट बनाने का प्रस्ताव
उन्होंने बताया कि मार्ग में पर्यटकों के ठहरने और बारिश से बचाव के लिए कोई भी बड़े कंक्रीट या सीमेंट के पक्के निर्माण नहीं किए जाएंगे. इसके बजाय स्थानीय पत्थरों, लकड़ी और पारंपरिक पहाड़ी शैलियों का इस्तेमाल किया जाएगा. पहाड़ों की पुरानी छानियों के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए उन्हें ही पर्यटकों के विश्राम के लिए बनाया जाएगा. सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण के लिए पूरे रूट पर दो ईको-गेट बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है.
कुल मिलाकर, रुद्रप्रयाग वन विभाग की यह पहल न सिर्फ हिमालयी पारिस्थितिकी (Ecology) को संरक्षित रखेगी, बल्कि ट्रेकर्स को प्रकृति के बेहद करीब रहकर देवभूमि के आध्यात्मिक और प्राकृतिक वैभव को निहारने का खास अनुभव भी देगी.
(रुद्रप्रयाग से भूपेन्द्र भण्डारी की रिपोर्ट)