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13 साल की नौकरी छोड़ यूपी की राजनीति में उतरीं पूर्व IAS दिव्या मित्तल, बोलीं- 'मांगूंगी 80 सालों का हिसाब'

Former IAS officer Divya Mittal: 13 साल तक प्रशासनिक सेवा में रहने वालीं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल की यूपी की राजनीति में एंट्री हो रही हैं. उनके ताजा वीडियो संदेश ने संकेत दिए हैं कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने का फैसला किया है.

Edited By Preeti Chauhan
Published: Sep 29, 2026, 11:58 AM IST | Updated: Sep 29, 2026, 03:53 PM IST
Image Credit: UP Politics
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अब सक्रिय राजनीति में उतरने की आधिकारिक घोषणा कर दी है. करीब 13 साल तक बतौर आईएएस अफसर जनसेवा करने के बाद इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि वह जनता की बुलंद आवाज बनने के लिए राजनीति में आ रही हैं. उनकी यह राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी और वह किसी बनी-बनाई राजनीतिक पार्टी में शामिल होने के बजाय अपनी स्वतंत्र राह तय करेंगी.

10 मिनट का वीडियो संदेश: "मुझे आम जनता का हिसाब चाहिए"
सोशल मीडिया पर जारी करीब 10 मिनट के अपने भावुक और प्रभावशाली वीडियो संदेश में दिव्या मित्तल ने कहा,
"नमस्कार, मैं दिव्या मित्तल! कुछ दिन पहले मैंने आईएएस पद से त्यागपत्र दिया था। लोगों ने मुझसे पूछा कि सब कुछ तो बन गईं, अब आगे क्या? मेरा जवाब है—राजनीति! मुझे उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी आवाज सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या सुनकर दबा दी जाती है। मुझे अपने देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए।"

मीरजापुर के लहुरियादह और पट्टे की जमीन का सुनाया दर्द
अपने प्रशासनिक सेवाकाल के अनुभवों को साझा करते हुए पूर्व आईएएस ने व्यवस्था पर सीधा हमला बोला. मीरजापुर के लहुरियादह गांव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पानी की किल्लत झेल रही एक महिला ने उनसे पेंशन या मकान नहीं, बल्कि 5वीं के आगे पढ़ाई के लिए स्कूल मांगा। नियम और स्वीकृति के बावजूद 3 साल बाद भी स्कूल नहीं बन सका। उन्होंने कहा, "पैसा था, नियम थे, बस इरादा नहीं था। अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता, और इरादा न हो तो एक फाइल ही पहाड़ बन जाती है।"

"ऊपर से मना है" का सच
राजस्व विभाग में विशेष सचिव रहते हुए एक भूमिहीन व्यक्ति के पट्टे की जमीन पर कब्जे का मामला उठाते हुए उन्होंने कहा कि सही रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई रोक दी गई और कहा गया कि 'ऊपर' से मना है। दिव्या ने सवाल उठाया कि संविधान में सबसे ऊपर जनता है, फिर यह 'ऊपर' कौन है?

सड़कों के गड्ढों और हादसों पर उठाए गंभीर सवाल
सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर बात करते हुए दिव्या मित्तल ने कहा कि देश के हजारों गांव आज भी टापू बने हुए हैं। अफसरों को फाइलों और मौतों के आंकड़ों की जानकारी होती है, लेकिन फिक्र नहीं होती। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा, "जब फिक्र नहीं होती तो मौत हादसा नहीं, फैसला होती है। मुझे उन मौतों का हिसाब चाहिए।"

जयशंकर प्रसाद की पंक्तियों से नई शुरुआत
दिव्या मित्तल का इस्तीफा केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया था, जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ। इस्तीफे के बाद उन्होंने महाकवि जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चंद्रगुप्त' की पंक्तियां साझा की थीं:
"प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो।"

उन्होंने अपने संदेश के जरिए आम लोगों से व्हाट्सएप के माध्यम से सीधे जुड़ने की अपील की है. 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की आहट के बीच उनका बिना किसी दल के समर्थन के सीधे जनसंवाद के जरिए राजनीति में कदम रखना राज्य के सियासी समीकरणों में एक नई हलचल पैदा कर सकता है.

कौन हैं पूर्व IAS दिव्या मित्तल?
दिव्या मित्तल का जन्म 23 नवंबर 1983 को हुआ था. वह मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं, जहां उन्होंने अपने शुरुआती वर्ष बिताए. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनका गृह जिला दिल्ली बताया गया है. उन्होंने IIT दिल्ली से बी.टेक और IIM बैंगलोर से MBA की पढ़ाई की है. यूपीएससी (UPSC) में आने से पहले उन्होंने लंदन में वित्तीय संस्थान (JP Morgan) में एक हाई-पेइंग कॉर्पोरेट जॉब की थी. देश सेवा की भावना से वे भारत लौटीं और बिना किसी कोचिंग के UPSC क्रैक किया. अपने पहले प्रयास (2012) में IPS बनीं और 2013 में 68वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल कर IAS अफसर बनीं.

प्रशासनिक सफर और उपलब्धियां
उन्हें यूपी कैडर मिला और उन्होंने राज्य के विभिन्न जिलों में सेवाएं दीं. वे मीरजापुर, संत कबीर नगर और देवरिया जैसे जिलों की जिलाधिकारी (DM) रहीं. मीरजापुर की DM रहते हुए उन्होंने आजादी के 75 साल बाद पहाड़ी गांव 'लहुरियादह' तक पीने का पानी (नल से जल) पहुंचाया, जिससे वे काफी सुर्खियों में आईं और खूब तारीफ बटोरी.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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