काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने का दावा: पीएमओ के संज्ञान के बाद न्यास ने तोड़ी चुप्पी, बताई सच्चाई
Varanasi Kashi Vishwanath Mandir: वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने का आरोप पर मंदिर प्रशासन का जवाब सामने आया है. मंदिर का शिखर गायब होने की खबर को मंदिर न्यास ने झूठा बताया और अफवाहों का खंडन किया. मंदिर प्रशासन ने बताया शिखर मंदिर के लॉकर में सुरक्षित है.
Varanasi Kashi Vishwanath Mandir/ जय पाल: वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर से सोना गायब होने के आरोपों के बाद विवाद गहरा गया है. इस पूरे मामले पर जहां एक ओर पीएमओ ने संज्ञान लिया है, वहीं दूसरी ओर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सभी आरोपों का खंडन कर दिया है. मंदिर न्यास ने सोना गायब होने या चोरी होने की सभी खबरों को पूरी तरह निराधार और अफवाह बताया है.
अधिवक्ता ने लगाया था संगीन आरोप
यह मामला तब सामने आया, जब अधिवक्ता नित्यानंद राय ने शिकायत दर्ज कराया. जिसमें उन्होंने कहा था कि मंदिर के शिखर से सोने के कलश और पतरें गायब हो रही हैं. शिकायतकर्ता का आरोप है कि सोना गायब होने का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. मंदिर के शिखर से हर दूसरे दिन सोना नोचने का आरोप है. उन्होंने मांग की है कि मंदिर प्रशासन गर्भगृह और शिखर पर लगे सोने-चांदी की पूरी स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करे और इस जानकारी को मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए.
शिकायतकर्ता ने मंदिर प्रशासन के स्पष्टीकरण पर असंतोष जताया है. उन्होंने मांग की है कि सोना कब से गायब हो रहा है, इसकी जांच कराई जाए.
PMO का संज्ञान, मंदिर प्रशासन का जवाब
अधिवक्ता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पीएमओ ने संज्ञान लिया है. अब आरोपों के जवाब में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने आधिकारिक बयान जारी किया है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि शिखर गायब होने या सोना चोरी होने की खबरें झूठी हैं. न्यास ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष अप्रैल में श्री काशी विश्वनाथ धाम के मुख्य मंदिर के गर्भगृह के ऊपर वायव्य कोण पर स्थापित शिखर क्षतिग्रस्त हो गया था. सुरक्षा के लिहाज से उसे उतारकर मंदिर के लॉकर में सुरक्षित रखा गया है.
IIT मद्रास कर रहा है वैज्ञानिक परीक्षण
मंदिर की मूल संरचना को बचाए रखने के लिए आईआईटी मद्रास के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है. आईआईटी मद्रास की टीम ने जुलाई 2026 में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें बताया गया कि पत्थरों और लकड़ी पर पर्यावरणीय असर का जिक्र है. पर्यावरण से हो रहे क्षरण का जिक्र किया गया है. मंदिर प्रशासन के मुताबिक, मरम्मत कार्य शुरू करने से पहले सामग्री का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा रहा है.
आईआईटी मद्रास की विशेषज्ञ टीम नवंबर 2026 में एक बार फिर मंदिर का निरीक्षण करेगी, जिसके बाद एक ठोस और सुरक्षित कार्ययोजना तैयार की जाएगी. नए परीक्षणों के बाद सुरक्षा के लिए ठोस उपाय सुझाए जाएंगे. न्यास ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि बाबा विश्वनाथ धाम की प्राचीन गरिमा और ऐतिहासिक विरासत की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
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