'PDA' के काट के लिए BJP का 'सुशासन' कार्ड: गेस्ट हाउस कांड से लेकर 'योगी मॉडल' तक, यूपी चुनाव 2027 का पूरा चक्रव्यूह तैयार!
यूपी चुनाव नजदीक है. जिसके लिए सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. इस बीच भाजपा ने चुनाव रणनीति तय कर ली है. इस बात चुनाव का माहौल जातिगत समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमने से रोकने की पूरी तैयारी है. जानिए क्या है बीजेपी का प्लान?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से अपनी रणनीति का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी का पूरा ध्यान चुनाव के नैरेटिव को 'जातिगत समीकरणों' की जाल से निकालकर शासन, विकास और सुशासन की पटरी पर लाने का है.
सूत्रों का कहना है कि पार्टी विपक्ष के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड को नाकाम करने के लिए सुशासन के अपने मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड को जनता के सामने पेश करेगी.
'गुंडा राज' बनाम 'योगी राज'
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी की रणनीति में 'सपा शासन के रिकॉर्ड' की तुलना 2017 के बाद आए बदलावों से करने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है. पार्टी मतदाताओं को 2017 से पहले के दौर यानी 1995 का चर्चित गेस्ट हाउस कांड, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे, माफियाराज, अवैध खनन और जमीन हड़पने के आरोपों की याद दिलाकर 'गुंडा राज' की बहस को दोबारा केंद्र में लाएगी. इसके जवाब में योगी सरकार के 10 साल के शासन की उपलब्धियां गिनाएगी.
सूत्रों की मानें तो योगी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था में सुधार, अपराधियों पर नकेल, 24 घंटे बिजली, सुदृढ़ सड़कें और बंपर औद्योगिक निवेश को प्रमुखता से पेश किया जाएगा.
'मोदी-योगी मॉडल' और पीडीए के नैरेटिव का मुकाबला
सूत्रों के मुताबिक, सपा के पीडीए नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए बीजेपी किसी एक वर्ग के बजाय 'सबका साथ, सबका विकास' के व्यापक कल्याणकारी मॉडल को आगे बढ़ाएगी. पार्टी का मानना है कि केवल तुष्टीकरण के बजाय विकास का लाभ हर वर्ग तक पहुंचा है.
इतना ही नहीं प्रचार अभियान में 'मोदी-योगी शासन मॉडल' के तहत बने एक्सप्रेसवे, नए एयरपोर्ट्स, औद्योगिक गलियारे, पीएम-किसान योजना, निष्पक्ष सरकारी भर्तियां और गन्ने के रिकॉर्ड भुगतान जैसी उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
क्षेत्रीय रैलियां और बूथ लेवल का माइक्रो मैनेजमेंट
सूत्रों का यह भी कहना है कि बीजेपी पश्चिम यूपी, ब्रज, रोहिलखंड, अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय रैलियां आयोजित करेगी. इस दौरान किसानों, युवाओं, महिलाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सीधे टारगेट किया जाएगा. वहीं, संगठन स्तर पर गुटबाजी को पूरी तरह रोकने, सांसदों-विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ ही 'पन्ना प्रमुख' और बूथ समितियों के जरिए माइक्रो-मैनेजमेंट को धार देने की पूरी योजना है.
2027 के लिए बीजेपी का यह प्लान संकेत दे रहा है कि पार्टी रक्षात्मक होने के बजाय पूरी तरह से आक्रामक मोड में चुनाव लड़ेगी. 'गुंडा राज' की काट के रूप में 'योगी मॉडल' को सामने रखकर बीजेपी ने विपक्ष की घेराबंदी मजबूत कर दी है. अब देखना यह होगा कि बीजेपी का यह 'सुशासन और विकास' का चक्रव्यूह विपक्ष के 'पीडीए' कार्ड पर कितना भारी पड़ता है?
(दिल्ली से नीरज पांडे की रिपोर्ट)
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