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पहले भरोसा, फिर ब्लैकमेल: ऑनलाइन शोषण जाल में फंसे 24 बच्चों का रेस्क्यू, यूपी पुलिस का एक्शन

यूपी पुलिस ने 24 बच्चों का सफल रेस्क्यू ​किया है, जो किसी तरह ऑनलाइन यौन शोषण और उत्पीड़न के जाल में फंस गए थे.

Written By Amitesh Pandey
Published: Oct 28, 2026, 06:49 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 06:56 PM IST
Image Credit: सांकेतिक तस्वीर
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सोशल मीडिया पर बच्चों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों पर यूपी पुलिस का एक्शन देखने को मिला है. यूपी पुलिस ने ऑनलाइन यौन शोषण और उत्पीड़न के जाल में फंसे अब तक 24 बच्चों को रेस्क्यू किया गया है. पुलिस ने इन बच्चों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए अलग-अलग जिलों में मिली शिकायतों और सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई की. इस अभियान में अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से मिलने वाली सूचनाओं और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की अहम भूमिका रही.

पहचान छिपाकर शिकार बनाते हैं 
यूपी पुलिस की ओर से बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार अपनी पहचान छिपाकर बच्चों को निशाना बनाते हैं. वहीं, इनका पैटर्न भी बदला है. अब साइबर अपराधी पड़ोस, परिवार या रिश्तेदार का करीबी बनकर बच्चों का यौन शोषण करते हैं. बच्चों की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं. इतना ही नहीं इन तस्वीरों और वीडियो के जरिए बच्चों पर गलत काम करने का भी दबाव बनाया जाता है.

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अश्लील वीडियो बेचने की कोशिश 
अपराधी व्हाट्सऐप, फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, स्नैपचैट और ईमेल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वायरल करने की धमकी देते हैं. इतना ही नहीं अश्लील वीडियो या फोटोज को इन प्लेटफॉर्मों पर बेचने की भी कोशिश करते हैं. इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है.

अमेरिकी संस्था भी बनी मददगार 
ऐसे अपराधों पर कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं की मदद मिलती है. अमेरिका की संस्था नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) की साइबर टिपलाइन के जरिए संभावित बाल यौन शोषण से जुड़ी जानकारी सामने आती है.

एजेंसियों को अलर्ट किया जाता है 
तकनीकी कंपनियां सोशल मीडिया पोस्ट, चैट और डिजिटल फाइलों में संदिग्ध गतिविधियां मिलने पर रिपोर्ट करती हैं. भारत में गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) इन जानकारियों का विश्लेषण करता है. इसके बाद महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों से जुड़ी इकाई और एजेंसियों को अलर्ट किया जाता है.  

स्थानीय स्तर पर सत्यापन किया जाता है 
इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायतें मिलती हैं. इस पोर्टल पर पीड़ित अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. उत्तर प्रदेश साइबर मुख्यालय इन सूचनाओं की जांच और विश्लेषण करने के बाद संबंधित पुलिस कमिश्नरेट और जिलों को भेजता है. स्थानीय पुलिस शिकायतों का सत्यापन करती है. अपराध मिलने पर एफआईआर दर्ज की जाती है. इसके बाद डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की जांच होती है.  पर्याप्त सबूत मिलने पर गिरफ्तारी और अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की कार्रवाई की जाती है.

यूपी पुलिस का एक्शन जारी रहेगा 
यूपी पुलिस के मुताबिक, इस संयुक्त कार्रवाई के जरिए अब तक 24 बच्चों को रेस्क्यू किया जा चुका है. उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि बच्चों को ऑनलाइन शोषण से बचाने, पीड़ितों की पहचान करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का अभियान आगे भी जारी रहेगा. 

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About the Author

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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