यूपी में प्रशासनिक भूचाल: चुनाव से पहले 20+IPS अधिकारियों के तबादले की तैयारी! नोएडा और वाराणसी CP भी लिस्ट में शामिल!
UP Police IPS Transfer: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले शासन स्तर पर प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है. प्रशासनिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, राज्य के पुलिस महकमे में एक बड़े फेरबदल की पटकथा लिखी जा चुकी है, जिसके तहत 20 से अधिक आईपीएस (IPS) अधिकारियों की तैनाती में बदलाव किया जा सकता है.
UP IPS Reshuffle/विशाल सिंह/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से करीब आठ महीने पहले पुलिस महकमे में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है. रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदेश में 20 से ज्यादा IPS अधिकारियों की तैनाती बदली जा सकती है. खास तौर पर ऐसे अधिकारियों को लेकर मंथन चल रहा है, जो किसी जिले, रेंज या कमिश्नरेट में करीब तीन साल या उससे ज्यादा समय से तैनात हैं. यह संभावित बदलाव चुनावी तैयारियों से भी जुड़ा माना जा रहा है. हालांकि अभी इसे अंतिम तबादला सूची नहीं कहा जा सकता है. अधिकारियों की तैनाती को लेकर शासन स्तर पर मंथन के बाद ही अंतिम आदेश जारी होंगे.
चुनाव से पहले क्यों हो सकता है फेरबदल?
चुनाव आयोग की स्थानांतरण नीति के तहत चुनावी कार्य से सीधे या पर्यवेक्षी स्तर पर जुड़े अधिकारियों के लिए लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को लेकर नियम लागू होते हैं. आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी स्थान पर तीन साल पूरा कर चुके अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाना चाहिए. साथ ही, किसी जिले से हटाए गए अधिकारी को उसी लोकसभा क्षेत्र के दूसरे जिले में तैनात करने पर भी आयोग ने रोक संबंधी निर्देश दिए हैं.
यूपी विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 तक है. इसी वजह से चुनाव से पहले पुलिस और प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की पोस्टिंग की समीक्षा शुरू होना स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है.
चर्चा में शामिल बड़े नाम
सूत्रों के अनुसार, संभावित ट्रांसफर लिस्ट में प्रदेश के कई हाई-प्रोफाइल कमिश्नरेट और जिलों के शीर्ष अधिकारी शामिल हैं.
लक्ष्मी सिंह (पुलिस कमिश्नर, नोएडा/गौतमबुद्ध नगर)
देश की पहली महिला पुलिस कमिश्नर के रूप में नोएडा में तैनात लक्ष्मी सिंह का कार्यकाल काफी लंबा रहा है. ऐसे में 3 साल के कार्यकाल के नियम के चलते उनकी नई तैनाती की संभावना जताई जा रही है.
मोहित अग्रवाल (पुलिस कमिश्नर, वाराणसी)
वाराणसी कमिश्नरेट का जिम्मा संभाल रहे वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी मोहित अग्रवाल का नाम भी उन अधिकारियों की सूची में प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. मोहित अग्रवाल की पोस्टिंग को तीन साल पूरे नहीं हुए हैं. इसलिए संभावित तबादले की वजह केवल मौजूदा पोस्टिंग की अवधि नहीं, बल्कि चुनावी जिम्मेदारियों और आयोग के लागू होने वाले मानकों से जुड़ी अन्य परिस्थितियां भी हो सकती हैं. अंतिम स्थिति शासन के आदेश और चुनाव आयोग के निर्देशों के आधार पर ही स्पष्ट होगी.
अन्य रेंज व जिलों के कप्तान
संभावित फेरबदल की सूची में कई बड़े पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद और प्रयागराज जैसे प्रमुख कमिश्नरेट व जिलों में लंबे समय से तैनात एडीजी, आईजी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों की कुर्सियां भी बदल सकती हैं.
राजनीतिक व प्रशासनिक मायने
अब विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ एक और बड़ा फेरबदल संभावित माना जा रहा है. अगर 20 से ज्यादा IPS अधिकारियों की तैनाती बदलती है, तो इसका असर कमिश्नरेट, रेंज और जिलों की पुलिस कमान पर दिखाई दे सकता है. यूपी में सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए आगामी विधानसभा चुनाव काफी संवेदनशील और अहम हैं. ऐसे में पुलिस प्रशासन निष्पक्ष और पारदर्शी दिखे, इसके लिए सरकार समय रहते सभी बदलाव पूरे कर लेना चाहती है. चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले शासन अपनी पसंद और मजबूत कार्यशैली वाले अफसरों को संवेदनशील जिलों और मंडलों की कमान सौंपना चाहता है, ताकि अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा पर कोई सवाल न उठ सके.
फिलहाल अहम बात यह है कि यह संभावित सूची है. ये अंतिम तबादला लिस्ट नहीं है. शासन की ओर से औपचारिक आदेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन अधिकारियों को हटाया जाता है और उन्हें नई जिम्मेदारी कहां दी जाती है.