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UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों ना तो मौसम की चर्चा है और ना ही खेती-किसानी की, हर जुबां पर बस एक ही सवाल है गांव की सरकार का चुनाव आखिर कब होगा? यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर गांवों की चौपालों से लेकर राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारों तक उथल-पुथल मची हुई है.
ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और जिला पंचायत सदस्य पद के करीब 12 लाख से ज्यादा संभावित दावेदारों की धड़कनें तेज हैं. जिसकी वजह है इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज होने वाली अहम सुनवाई, जो प्रदेश के पंचायत चुनावों का भविष्य तय कर सकती है.
यूपी पंचायत चुनाव को लेकर अहम सुनवाई
हाईकोर्ट की लखनऊ और प्रयागराज पीठ में चुनाव प्रक्रिया में हो रही देरी, पंचायतों के कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधानों को अनिश्चितकाल के लिए प्रशासक बनाए रखने और OBC आरक्षण की समयसीमा को लेकर दाखिल दर्जनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई चल रही है. 22 सितंबर को पिछली सुनवाई हुई थी. इस दौरान अदालत ने सरकार के रुख पर सख्ती दिखाते हुए अगली तारीख 7 अक्टूबर मुकर्रर की थी.
हाईकोर्ट के कटघरे में 3 सबसे बड़े पेंच
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि पिछड़े वर्ग (OBC) के सीटों के पुनर्गठन और आरक्षण की पारदर्शी व्यवस्था पूरी करना चुनाव कराने की सबसे अहम शर्त है. आज की सुनवाई में सरकार को इसका स्टेटस रिपोर्ट देना होगा. जून में हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि चुने हुए नुमाइंदों का कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्हें मनमाने ढंग से प्रशासक के तौर पर जारी नहीं रखा जा सकता. कोर्ट ने सरकार से सीधी टाइमलाइन मांगी थी.
दूसरी तरफ, राज्य निर्वाचन आयोग अपना रुख साफ कर चुका है कि 10 जून 2026 को ही नई मतदाता सूची (Voter List) का अंतिम प्रकाशन किया जा चुका है. आयोग पूरी तरह मुस्तैद है, बस उसे सरकार से प्रशासनिक मंजूरी और आरक्षण का फाइनल खाका चाहिए.
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें
हालांकि, गांवों में सोशल मीडिया पर उड़ रही अफवाहों और वायरल चुनावी तारीखों से अलग, आज की सुनवाई का मतलब सीधे मतदान की तारीखों का ऐलान नहीं है, लेकिन यह सुनवाई तय करेगी कि क्या हाईकोर्ट प्रदेश सरकार को 15 से 30 दिनों के भीतर आधिकारिक शेड्यूल जारी करने का सख्त आदेश जारी करता है या नहीं.
फिलहाल, गांवों की गलियों में भावी प्रत्याशियों ने अपने झंडे-बैनर और गणित बिठाना शुरू कर दिया है. सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कौन-सी सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी और ऊंट किस करवट बैठेगा. उम्मीद है जल्द ही यूपी की पंचायतों में लोकतंत्र का बिगुल बजाने का रास्ता साफ होगा.