विनीत अग्रवाल/अमरोहा: उत्तर प्रदेश में आज, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व उत्साह और परंपरागत उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. प्रदेश के अलग-अलग जिलों में रामलीला और रावण दहन के आयोजन किए जा रहे हैं. दशहरा मेलों में लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है.
अमरोहा में 35 जगह होगा रावण दहन
अमरोहा जिले में दशहरे के मौके पर 35 स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा. इसके साथ ही कई जगहों पर दशहरा मेले भी आयोजित होंगे. अमरोहा शहर के रामलीला मैदान में 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा. यहां कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी जलाए जाएंगे. रावण दहन से पहले रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम और रावण के बीच युद्ध की लीला का मंचन होगा. आयोजन को लेकर लोगों में उत्साह है.
सुरक्षा को लेकर पुलिस अलर्ट
दशहरा मेले और रावण दहन के कार्यक्रमों को देखते हुए अमरोहा पुलिस अलर्ट पर है.अपर पुलिस अधीक्षक अखिलेश भदौरिया के मुताबिक, सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है.
कानपुर में आज दिन के दिन होती है रावण की पूजा
देशभर में दशहरे के दिन रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, लेकिन कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां दशहरे के दिन रावण की पूजा-अर्चना की जाती है. कानपुर के शिवाला क्षेत्र में स्थित रावण मंदिर साल में एक बार विजयादशमी के अवसर पर खोला जाता है. इस दिन श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर रावण के दर्शन करते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते है. सुबह जैसे ही मंदिर खुलता है उसके बाद में रावण का अभिषेक दूध, दही जल से किया जाता है इसके बाद में श्रद्धालु रावण के दर्शन करने के लिए आते हैं और फूल माला दीप जलाकर रावण से आशीर्वाद भी लेते हैं.
मान्यता है कि रावण विद्वान होने के साथ-साथ भगवान शिव का परम भक्त भी था. इसी धार्मिक मान्यता के चलते मंदिर में दशहरे के दिन विशेष पूजा की परंपरा निभाई जाती है. मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु दर्शन करते हैं और अपनी आस्था प्रकट करते हैं.कानपुर का यह मंदिर दशहरे की परंपराओं को एक अलग नजरिए से देखने का अवसर देता है. एक ओर रावण दहन के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, तो दूसरी ओर इस मंदिर में रावण के विद्वान और शिवभक्त स्वरूप को याद किया जाता है.
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है. इस दिन रावण दहन के जरिए भगवान श्रीराम की विजय का संदेश दिया जाता है.