यूपी में 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटरों' पर वायरल दावे का सच क्या? चुनाव आयोग ने दी सफाई
Lucknow News: यूपी में 16.18 लाख रहस्यमयी वोटर जोड़ने के दावे पर राज्य चुनाव आयोग ने सफाई दी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसे भ्रामक बताया है.
Lucknow News: यूपी में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान 16.18 लाख 'रहस्यमयी वोटर' जोड़ने की खबर पर राज्य चुनाव आयोग ने सफाई दी है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इसे भ्रामक खबर बताया है. उन्होंने कहा कि 16.18 लाख का आंकड़ा नए वोटरों के नाम जुड़ने का नहीं, बल्कि फॉर्म-6 जमा करने वाले पात्र लोगों का है.
चुनाव आयोग ने दी सफाई
दरअसल, यूपी में SIR के दौरान बूथ लेवल अधकारी (बीएलओ) ने 27 अक्टूबर 2025 से 6 जनवरी 2026 तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया था. इसी दौरान करीब 16.18 लाख लोगों से फॉर्म-6 भरवाकर लिए गए. फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है. नवदीप रिणवा ने बताया कि ये वे पात्र लोग थे, जिनके नाम 27 अक्टूबर 2025 को मौजूद वोटर लिस्ट में नहीं थे. इसी वजह से उनके नाम के गणना फॉर्म पहले से प्रिंट नहीं हो सके थे. ऐसे लोगों को BLO ने घर-घर जाकर फॉर्म-6 दिए और उनसे भरवाकर जमा किए.
आपत्ति का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची जारी की गई
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि इसमें भी नियमों का पालन किया गया है. 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद दावा और आपत्ति की अवधि में मिले फॉर्म-6 की सूची ही वेबसाइट पर प्रकाशित की गई थी. इसके लिए फॉर्म-9 की सूची जारी की गई थी. उन्होंने बताया कि SIR शुरू होने से पहले मिले सभी फॉर्म-6 को उसी समय ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल करना जरूरी नहीं होता. ऐसा हर साल होने वाले सामान्य मतदाता पुनरीक्षण में भी होता है. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित करने से पहले तय तारीख पर वोटर लिस्ट को सिस्टम में फ्रीज कर दिया जाता है. इस वजह से कुछ आवेदन उस समय लंबित रह जाते हैं. बाद में दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान इनका निस्तारण किया जाता है और अंतिम मतदाता सूची तैयार होती है.
एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी
सोशल मीडिया पर इसे ही लेकर भी सवाल उठाए गए थे. चुनाव आयोग ने इसे पूरी तरह गलत बताया है. चुनाव आयोग के मुताबिक, फॉर्म-6 स्वीकार करने का कोई तय प्रतिशत या फॉर्मूला नहीं है. किसी आवेदन को स्वीकार या खारिज करने का फैसला तय कानूनी प्रक्रिया और पात्रता की जांच के बाद ही किया जाता है. नवदीप रिणवा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में SIR-2026 की पूरी प्रक्रिया कानून, निर्वाचन आयोग के निर्देशों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पूरी की गई है. इसमें राजनीतिक दलों की भी भागीदारी रही है.