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लखनऊ: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (UP ATS) को अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के ऑनलाइन और साइबर आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में एक और बड़ी कामयाबी मिली है. एटीएस ने तमिलनाडु एटीएस के साथ संयुक्त अभियान चलाकर 19 वर्षीय शातिर साइबर कोडर मकसूद अली को कोयंबटूर (तमिलनाडु) से दबोच लिया है. इस नेटवर्क में यह दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है. इससे पहले एटीएस ने आजमगढ़ निवासी मोहम्मद नबील को सलाखों के पीछे भेजा था.
एडीजी अमिताभ यश ने क्या कहा...
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक, यह मॉड्यूल केवल कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि हिंसात्मक गतिविधियों की साजिश से भी जुड़ा था. नबील से पूछताछ और विवेचना के दौरान मिली जानकारी के आधार पर ATS मकसूद तक पहुंची. इसके बाद तमिलनाडु ATS के सहयोग से कोयंबटूर में कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार मकसूद अली मूलरूप से सिद्धार्थनगर का रहने वाला है और फिलहाल कोयंबटूर में रह रहा था. उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया गया है. संबंधित न्यायालय के सामने पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
पाकिस्तानी हैकर्स से कनेक्शन और साइबर हमले की साजिश
अपर पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश ने बताया कि गिरफ्तार मकसूद अली अपने साथी नबील के साथ मिलकर भारत विरोधी गतिविधियों और हिंसक जिहाद का ताना-बाना बुन रहा था. एटीएस की तकनीकी जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि मकसूद सीधे तौर पर पाकिस्तानी हैकर्स के संपर्क में था. वह भारत के कई संवेदनशील डेटा बेस और महत्वपूर्ण कंप्यूटर सिस्टमों को पंगु बनाने के उद्देश्य से घातक साइबर टूल्स और मैलवेयर विकसित करने में जुटा हुआ था.
यूट्यूब और टेलीग्राम से सीखा कोडिंग का हुनर
पूछताछ में सामने आया कि 19 वर्षीय मकसूद ने किसी कॉलेज या कोचिंग संस्थान से पढ़ाई नहीं की, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए साइबर क्राइम की बारीकियां सीखीं. उसने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से पाइथन, जावा, हैकिंग और एडवांस्ड कोडिंग का ज्ञान हासिल किया.अपनी इसी तकनीकी क्षमता के बल पर उसने एक एनक्रिप्टेड (सुरक्षित) संचार ऐप भी तैयार कर लिया था, ताकि मॉड्यूल के आतंकी बिना किसी सुराग के आपस में गुप्त बातचीत कर सकें.
व्हाट्सऐप ग्रुपों में पाकिस्तानी नंबर और जिहादी सामग्री
जांच एजेंसियों के अनुसार, मकसूद दो अलग-अलग व्हाट्सऐप अकाउंट चला रहा था, जो कई संदिग्ध ग्रुपों से जुड़े थे.इन ग्रुप्स में पाकिस्तान के कई एक्टिव मोबाइल नंबर मिले हैं. इनमें AQIS की कट्टरपंथी विचारधारा, भड़काऊ भाषण, आपत्तिजनक साहित्य और हिंसक गतिविधियों का प्रशिक्षण देने वाली सामग्रियां साझा की जाती थीं.
कोयंबटूर से ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाए गए मकसूद अली को अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड में लेने की तैयारी है, ताकि इस साइबर आतंकी नेटवर्क के अन्य विदेशी और स्थानीय संपर्कों का पूरी तरह पर्दाफाश किया जा सके.
क्या है AQIS?
अल कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) अल कायदा से जुड़ा क्षेत्रीय संगठन है। ऐसे मामलों की जांच में सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया गतिविधियों, डिजिटल संपर्कों और आतंकी संगठनों की विचारधारा के प्रचार-प्रसार से जुड़े पहलुओं पर नजर रखती हैं.