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अनुप्रिया vs पल्लवी: पूर्वांचल में 35 विधानसभा सीटों पर 'कुर्मी' तय करेंगे जीत का फॉर्मूला, जानें दोनों बहनों का सियासी मास्टरप्लान

UP Assembly Election 2027: पूर्वांचल की सियासत में 2027 में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है. यहां सियासी संग्राम में दो सगी बहनें आमने-सामने होंगी. एनडीए के लिए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया तो विपक्ष के साथ पल्लवी पटेल होंगी. दोनों बहनों की नजर पूर्वांचल के दस जिलों की 35 कुर्मी बाहुल्य सीटों पर है.

Written ByPooja Singh
Published: Sep 10, 2026, 10:46 AM IST|Updated: Sep 10, 2026, 10:55 AM IST
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अनुप्रिया vs पल्लवी: पूर्वांचल में 35 विधानसभा सीटों पर 'कुर्मी' तय करेंगे जीत का फॉर्मूला, जानें दोनों बहनों का सियासी मास्टरप्लान

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Pooja Singh

Pooja Singh

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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UP Assembly Election 2027/ मो. गुफरान: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. पूर्वांचल की सियासत में इस बार बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है, जहां 'कुर्मी वोट बैंक' पर अपना वर्चस्व कायम करने के लिए दो सगी बहनें सीधे आमने-सामने खड़ी हैं. एक तरफ एनडीए की मजबूत सहयोगी, अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल हैं, तो दूसरी तरफ उनकी सगी बहन अपना दल (कमेरावादी) की नेता और सिराथू से विधायक पल्लवी पटेल हैं.

सत्ता और विपक्ष के दो अलग-अलग ध्रुवों पर खड़ीं ये बहनें अब अपने पिता डॉ. सोनेलाल पटेल की राजनीतिक विरासत पर अपना दावा मजबूत करने में जुटी हैं.

10 जिले, 35 सीटें और 50 हजार से ज्यादा कुर्मी वोटर
पूर्वांचल की राजनीति में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और खास तौर पर कुर्मी समुदाय का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है. दोनों बहनों की नजरें पूर्वांचल के प्रमुख 10 जिलों पर टिकी हैं, जिनमें प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, वाराणसी, चंदौली और अंबेडकरनगर की लगभग 35 विधानसभा सीटें हैं. इन 35 सीटों पर औसतन 35 से 50 हजार कुर्मी मतदाता हैं, जबकि कुछ खास सीटों पर यह आंकड़ा 70 से 80 हजार तक पहुंचता है.

प्रयागराज में सबसे ज्यादा कुर्मी मतदाता
पूर्वांचल के प्रयागराज जिले में सबसे ज्यादा कुर्मी वोटर्स हैं। यहाँ की शहर पश्चिमी, फाफामऊ, सोरांव, फूलपुर, प्रतापपुर, करछना, मेजा, बारा और हण्डिया विधानसभा सीटों पर कुर्मी मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं. कौशांबी की सिराथू और चायल सीट पर कुर्मी मतदाताओं की अच्छी-खासी तादाद है. फतेहपुर की बिंदकी और जहानाबाद सीटें पूरी तरह कुर्मी बाहुल्य मानी जाती हैं. प्रतापगढ़ की रानीगंज, पट्टी, सदर और विश्वनाथगंज विधानसभा सीटों पर भी कुर्मी वोटर्स का वर्चस्व है.

जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र और वाराणसी का हाल
जौनपुर के मड़ियाहूं और मुंगरा बादशाहपुर सीटों पर कुर्मी मतदाता हार-जीत तय करते हैं. मिर्जापुर की मड़िहान, चुनार और मझवा विधानसभा सीटें कुर्मी बाहुल्य हैं. सोनभद्र की घोरावल और वाराणसी की रोहनिया सीट पर भी कुर्मी मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं. चंदौली की सकलडीहा, मुगलसराय, सैयदराजा और चकिया सीटों पर कुर्मी मतदाता भारी संख्या में मौजूद हैं. सुल्तानपुर की लम्भुआ, जयसिंहपुर और सुल्तानपुर सदर सीट पर कुर्मी समाज की अच्छी तादाद है. अंबेडकरनगर की कटेहरी और अकबरपुर सीटों पर भी कुर्मी मतदाता बड़ी संख्या में हैं.

विरासत साबित करने की असली चुनौती
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अनंत राम कुशवाहा का कहना है कि 2027 का चुनाव दोनों बहनों के लिए केवल विधानसभा सीटें जीतने तक सीमित नहीं है. यह चुनाव उनके लिए सोनेलाल पटेल की असली राजनीतिक वारिस साबित होने की प्रतिष्ठा की लड़ाई है. अनुप्रिया पटेल के पास जहां केंद्र सरकार में मंत्री पद और एनडीए के मजबूत संगठन का साथ है, वहीं पल्लवी पटेल विपक्षी खेमे में रहकर सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखरता से अपनी नई राजनीतिक जमीन तलाश रही हैं.

साफ है कि 2027 का यूपी चुनाव केवल सत्ता का संग्राम नहीं, बल्कि सोनेलाल पटेल की राजनीतिक विरासत पर वर्चस्व की असली परीक्षा है. पूर्वांचल की इन 35 सीटों का कुर्मी मतदाता जिस बहन के पाले में खड़ा होगा, राज्य की सत्ता का रास्ता उसी के लिए आसान होगा. अब देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए का दम काम आता है या फिर विपक्ष का नया सियासी दांव.

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TAGS:
UP Election 2027