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नागेन्द्र मणि त्रिपाठी/गोरखपुर: गोरखपुर में स्कूल बस ने 5 साल के मासूम को कुचल दिया. मासूम की मौत से गुस्साए परिजनों ने स्कूल बस में तोड़फोड़ कर दी. वहीं, बस में मौजूद शिक्षिका को करीब 4 घंटे तक घेरे रखा. गुस्साए लोगों को काबू में करने के लिए कई थानों की फोर्स बुलानी पड़ी. पुलिस ने मृतक की मां की तहरीर पर बस चालक और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है.
स्कूल बस ने कुचला
बताया गया कि पांच साल का हिमांशु चिलबिलवां स्थित एसडी पब्लिक स्कूल में कक्षा एक का छात्र था. शनिवार सुबह 8 बजकर 15 मिनट पर स्कूल बस हिमांशु को लेने घर पहुंची थी. आरोप है कि पिपराइच थाना क्षेत्र के नईयापार गांव में हिमांशु बस में चढ़ने के लिए पायदान तक पहुंच भी नहीं पाया था और चालक ने बस आगे बढ़ा दी. मासूम बस के पहिये के नीचे आ गया. हादसे के बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया. उधर, ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा. बस को घेरकर उसके शीशे तोड़ दिए गए और बस में मौजूद शिक्षिका रानी मिश्रा को करीब चार घंटे तक ग्रामीणों ने घेरे रखा.
शिक्षका को ग्रामीणों ने घेरा
हादसे के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई. परिजन आनन-फानन में हिमांशु को बाइक से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपराइच लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया. जिस घर से कुछ देर पहले बच्चा स्कूल जाने के लिए निकला था, वहां कुछ ही देर में मातम पसर गया. हिमांशु अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था. जैसे ही घटना की खबर गांव में फैली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए. करीब चार घंटे तक मौके पर तनाव बना रहा. हालात बिगड़ने की सूचना पर पिपराइच पुलिस मौके पर पहुंची. एसडीएम सदर ज्ञान प्रताप सिंह, सीओ चौरीचौरा कुंदन कुमार सिंह, तहसीलदार डॉ. भागीरथी सिंह और नायब तहसीलदार अनु सिंह भी गांव पहुंचे.
ग्रामीणों ने की ये मांग
एहतियात के तौर पर कई थानों की पुलिस बुला ली गई. अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाकर शांत कराया. मासूम की मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने परिवार के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी. वहीं, इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और स्कूल वाहनों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मृतक छात्र की मां सोनी देवी की तहरीर पर पिपराइच पुलिस ने बस चालक मनोज, अध्यापिका रानी मिश्रा और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.
बीएसए ने स्कूल पहुंचकर जांच की
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्कूल बस की व्यवस्था को लेकर है. हादसे के बाद बेसिक शिक्षा विभाग भी जांच के लिए मौके पर पहुंचा. बीएसए धीरेंद्र त्रिपाठी, बीईओ के साथ घटनास्थल और संबंधित स्कूल पहुंचे. जांच में विद्यालय की मान्यता से जुड़े कागजात दुरुस्त मिले, लेकिन स्कूल बस में परिचालक ही नहीं था. बच्चों को लेकर चल रही बस में चालक के अलावा बच्चों की निगरानी के लिए कोई परिचालक मौजूद नहीं था. बीएसए ने भी माना कि अगर बस में परिचालक होता तो बच्चों की सुरक्षा पर नजर रखी जा सकती थी और संभवत: हादसा टल सकता था. स्कूल प्रबंधन को नोटिस जारी कर वाहन संचालन और परिचालक की व्यवस्था को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है.