फर्श के नीचे कोई और 'राज' तो नहीं? नवाबगंज में जमीन खोदकर ड्रमों से निकले करोड़ों, अब घर खंगाल रही IT की टीम
प्रयागराज के नवाबगंज में राजेश यादव और राकेश यादव के घर आयकर विभाग की टीम पहुंची. यह टीम तीन नीले ड्रम में रुपये की बरामदगी के बाद पहुंची और घर के अंदर कमरों और आंगन में तलाशी अभियान चलाया. घर के अंदर तलाशी के दौरान आलमारी और बख्शे भी पाए गए.
मुंबई-पुणे में छोटी-मोटी नौकरियां करने वाला एक मामूली युवक जब अचानक गांव लौटकर जमीनों की खरीद-फरोख्त, पिकअप, ट्रैक्टर और आलीशान मकानों का मालिक बन जाए, तो किसी को भी हैरानी होगी. ऐसा ही कुछ प्रयागराज के गंगापार के नवाबगंज के बरईपुर रामनगर गांव से सामने आया, जिसने न सिर्फ ग्रामीणों बल्कि आयकर विभाग और पुलिस के भी होश उड़ा दिए. अब आयकर विभाग की टीम दोनों के घर पहुंची और कमरों और आंगन में तलाशी अभियान चलाया.
जमीन के अंदर कोई और 'राज' तो नहीं?
इस तलाशी अभियान के दौरान आलमारी और बख्शे भी पाए गए हैं. हालांकि, आयकर विभाग को बक्सों और अलमारी में रुपये नहीं मिले. बक्सों और अलमारी के अंदर से कुछ ज्वेलरी और कपड़े बरामद हुए हैं. जिसके बाद आयकर विभाग की टीम घर में जीपीआर यानी (Ground Penetrating Radar) के जरिए जांच में जुटी हुई है. आयकर विभाग की टीम को शक है कि कहीं घर में गड्ढा या फिर जमीन के अंदर कोई टंकी तो नहीं रखी है.
जीपीआर के जरिए आयकर विभाग की टीम घर के कोने-कोने को खंगाल रही है. सुरक्षा के लिहाज से मौके पर नवाबगंज थाने की पुलिस भी मौजूद है. घर के 100 मीटर के दायरे को पूरी तरह से सीलबंद कर दिया गया है. पुलिस और आयकर विभाग की टीम के अलावा अन्य किसी के भी जाने पर रोक लगा दी गई है.
क्या है ये पूरा मामला?
दरअसल, पुलिस ने गांव के राजेश यादव और राकेश यादव के घर खोदाई कर किया तो प्लास्टिक के तीन नीले ड्रम बाहर निकाले थे. ड्रम खोलते ही अंदर का नजारा देखकर हर कोई दंग रह गया. पूरे ड्रम 500 रुपये की गड्डियों से भरे हुए थे. आनन-फानन में आयकर विभाग की छह सदस्यीय टीम नवाबगंज थाने पहुंची और जांच शुरू कर दी. उधर, शुक्रवार दोपहर 12 बजे से थाना परिसर के एक सुरक्षित कमरे में नोटों की गिनती शुरू की गई.
इसे गिनने के लिए चार-चार नोट काउंटिंग मशीनों का सहारा लिया जा रहा है. हालांकि, गांव में 60 करोड़ रुपये मिलने की चर्चा जोरों पर है, लेकिन असली आंकड़े का खुलासा नोटों की पूरी गिनती के बाद ही हो सकेगा.
जानकारी के मुताबिक, करीब 15 साल पहले राजेश यादव मुंबई गया था और फिर पुणे की एक ज्वैलरी शॉप में नौकरी करने लगा. कोरोना काल में वह अपने परिवार के साथ गांव लौटा, जिसके बाद उसने दादनपुर, मुबारकपुर, मेंडारा और शांतिपुरम में देखते ही देखते लाखों रुपये की जमीनें और गाड़ियां खरीद लीं. गांव के ही एक शख्स से उसका झगड़ा हो गया, जिसने उसकी इस सीक्रेट 'सल्तनत' का पर्दाफाश कर दिया.
दोनों भाइयों से पूछताछ में जुटे अधिकारी
फिलहाल, आयकर विभाग के अधिकारी राजेश (उर्फ बबलू) और उसके भाई राकेश से अलग कमरे में पूछताछ कर रहे हैं. शुरुआत में दोनों भाइयों ने इस रकम को अपना बताया था, लेकिन अब आईटी अधिकारियों की सख्ती के आगे दोनों अपने बयान बदल रहे हैं और पैसे के बारे में किसी भी तरह की जानकारी से साफ इनकार कर रहे हैं. आयकर विभाग गिनती पूरी होने के बाद पूरी रकम को सील कर अपने कब्जे में लेने की तैयारी में है.
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