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विश्वकर्मा जयंती 2026: कारीगरों के लिए टूलकिट से लेकर ₹3 लाख तक का लोन, जानें PM विश्वकर्मा और ODOP का पूरा गणित

यूपी के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक मजबूती देने के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना और ODOP अहम भूमिका निभा रहे हैं. इन योजनाओं के तहत प्रशिक्षण, टूलकिट, ऋण और बाजार से जोड़ने जैसी सुविधाएं मिलती हैं.जानिए किस कारीगर को कितना लाभ मिलता है और आवेदन की पूरी प्रक्रिया क्या है.

Written By Preeti Chauhan
Published: Sep 17, 2026, 10:04 AM IST | Updated: Sep 17, 2026, 10:18 AM IST
Image Credit: Vishwakarma Jayanti 2026
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Vishwakarma Jayanti 2026: विश्वकर्मा जयंती के मौके पर 17 सितंबर को उत्तर प्रदेश में कारीगरों और शिल्पकारों से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विश्वकर्मा जयंती पर हस्तशिल्पियों, कारीगरों और अभियंताओं को शुभकामनाएं दी हैं. ऐसे में पारंपरिक कारीगरों के लिए चल रही PM विश्वकर्मा योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 और ODOP ट्रेनिंग एंड टूलकिट योजना को समझना जरूरी है.  इन योजनाओं में प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, सस्ता ऋण और बाजार से जोड़ने जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं.

PM विश्वकर्मा योजना क्या है?
केंद्र सरकार ने 17 सितंबर 2023 को PM विश्वकर्मा योजना शुरू की थी. इसका उद्देश्य हाथ और पारंपरिक औजारों से काम करने वाले कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराना है.योजना में 18 पारंपरिक ट्रेड शामिल हैं, जिनमें बढ़ई, लोहार, कुम्हार, सुनार, राजमिस्त्री, मोची, दर्जी, नाई, धोबी, माला बनाने वाले और खिलौना बनाने वाले आदि शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्थानीय कारीगरों (विश्वकर्माओं) और शिल्पकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है. राज्य में एक तरफ जहाँ केंद्र सरकार की 'पीएम विश्वकर्मा योजना' 18 पारंपरिक व्यवसायों को वित्तीय सहायता दे रही है, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना जिला-स्तरीय विशिष्ट हस्तशिल्प और उद्योगों को वैश्विक बाजार प्रदान कर रही है।

2. कौन से 18 पारंपरिक व्यवसाय इसमें शामिल हैं?  
यह योजना हाथ और औजारों से काम करने वाले निम्न 18 व्यवसाय के लिए है. वो हैं...
बढ़ई (सुतार), राजमिस्त्री, लोहार, सोनार, कुम्हार, मूर्तिकार (पत्थर तराशने वाले)।  अस्त्र बनाने वाले, नाव बनाने वाले, हथौड़ा और टूलकिट निर्माता, ताला बनाने वाले. मोची/जूते बनाने वाले, टोकरी/मैट/झाड़ू बनाने वाले, नाई, दर्जी. मालाकार (माली), धोबी, खिलौना निर्माता (पारंपरिक) और मछली का जाल बनाने वाले.

कारीगरों को क्या-क्या मिलता है?
1. ₹15 हजार तक की टूलकिट सहायता
पात्र लाभार्थियों को आधुनिक औजार खरीदने के लिए ₹15,000 तक का टूलकिट इंसेंटिव दिया जाता है.

2. मुफ्त कौशल प्रशिक्षण
बेसिक ट्रेनिंग 5 से 7 दिन और एडवांस ट्रेनिंग 15 दिन या उससे अधिक की हो सकती है. प्रशिक्षण के दौरान ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड भी दिया जाता है.

3. ₹3 लाख तक का बिना गारंटी लोन
योजना में दो चरणों में एंटरप्राइज डेवलपमेंट लोन मिलता है—
पहला चरण: ₹1 लाख तक
दूसरा चरण: ₹2 लाख तक
कुल: ₹3 लाख तक
ब्याज दर: 5 प्रतिशत
पहला लोन 18 महीने और दूसरा 30 महीने तक की अवधि के लिए है।

दूसरे चरण का लाभ लेने के लिए पहले लोन का सही तरीके से भुगतान और डिजिटल लेनदेन या एडवांस ट्रेनिंग जैसी शर्तें लागू हैं।

आवेदन कैसे करें?
PM विश्वकर्मा योजना में नामांकन CSC यानी कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से किया जाता है. आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद आवेदन की तीन स्तरों पर जांच होती है-ग्राम पंचायत/नगर निकाय स्तर, जिला कार्यान्वयन समिति और स्क्रीनिंग कमेटी. आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल PM विश्वकर्मा पोर्टल है.

4. पात्रता 
आवेदक की आयु न्यूनतम 18 वर्ष होनी चाहिए.  आवेदक संबंधित 18 ट्रेडों में से किसी एक में कार्यरत स्व-रोजगार में होना चाहिए.  परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में न हो. एक परिवार से केवल एक ही व्यक्ति आवेदन कर सकता है. पिछले 5 वर्षों में PMEGP या स्वनिधि जैसी केंद्र/राज्य की अन्य लोन योजनाओं का लाभ न लिया हो (मुद्रा लोन का सफल भुगतान करने वाले पात्र हैं).

यूपी में ODOP और विश्वकर्मा योजना में क्या अंतर?
उत्तर प्रदेश में One District One Product यानी ODOP के तहत हर जिले के प्रमुख उत्पाद से जुड़े कारीगरों को प्रशिक्षण और टूलकिट उपलब्ध कराने की अलग व्यवस्था है. ODOP ट्रेनिंग एंड टूलकिट योजना में चयनित लोगों को 10 दिन का मुफ्त गैर-आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹200 प्रतिदिन मानदेय का प्रावधान है. ट्रेनिंग के बाद संबंधित उत्पाद के लिए टूलकिट दी जाती है. वहीं, यूपी की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 में पारंपरिक काम के साथ कई आधुनिक तकनीकी ट्रेड भी शामिल किए गए हैं. वर्तमान व्यवस्था में कुल 25 ट्रेड शामिल हैं.पात्र लाभार्थियों को प्रशिक्षण के बाद ₹15,000 तक की एडवांस टूलकिट सहायता, वित्तीय सहायता और मार्केटिंग/ई-कॉमर्स से जोड़ने का प्रावधान है.

यूपी के कारीगर कहां आवेदन करें?
उत्तर प्रदेश की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 और ODOP से संबंधित आवेदन UP Directorate of Industries/MSME पोर्टल के माध्यम से किए जा सकते हैं. आधिकारिक UP MSME 1-Connect पोर्टल पर इन योजनाओं के आवेदन और विवरण उपलब्ध हैं.

आवेदन करने की चरणबद्ध प्रक्रिया,दस्तावेज 
आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक), बैंक पासबुक, राशन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो.  
CSC केंद्र पर जाएं: निकटतम जन सेवा केंद्र (Common Service Centre - CSC) पर जाएं.
बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन: आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से नि:शुल्क पंजीकरण कराएं.

तीन-स्तरीय भौतिक सत्यापन (Verification)
पहला चरण: ग्राम पंचायत या शहरी निकाय (ULB) स्तर पर.
दूसरा चरण: जिला क्रियान्वयन समिति (DLIC)
तीसरा चरण: राज्य/स्क्रीनिंग कमेटी की स्वीकृति।

सर्टिफिकेट व ट्रेनिंग
आवेदन स्वीकृत होने पर पोर्टल (pmvishwakarma.gov.in) से आईडी कार्ड डाउनलोड करें और 5-7 दिनों की ट्रेनिंग पूरी करके ₹15,000 का वाउचर व लोन प्राप्त करें.

यानी योजनाओं का फोकस केवल औजार बांटने तक सीमित नहीं है. कारीगरों को कौशल, औजार, औपचारिक बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन और बाजार से जोड़ने की पूरी श्रृंखला तैयार करने का प्रयास किया गया है.केंद्र की PM विश्वकर्मा योजना के तहत 31 अगस्त 2025 तक करीब 30 लाख कारीगर पंजीकृत हो चुके थे और 16 सितंबर 2026 की PIB जानकारी के अनुसार 30 लाख लाभार्थियों का पंजीकरण लक्ष्य हासिल किया जा चुका है.

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About the Author

प्रीति चौहान जीन्यूज में पत्रकार हैं, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड डिजीटल टीम में  ब्रेकिंग, हाइपरलोकल, क्राइम, और अन्य मुद्दों को लेकर खबरें लिखती हैं. 
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