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Pitru Visarjan 2026/ मो. गुफरान (प्रयागराज): आज आश्विन मास की अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या है. इस मौके पर यूपी के प्रमुख धार्मिक स्थलों और नदियों के घाटों पर श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम से लेकर अयोध्या की सरयू, उन्नाव के आनंद घाट और कौशांबी के पवित्र तटों तक सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी.
वैदिक मंत्रोच्चार, तिल, कुश और गंगाजल की धाराओं के बीच श्रद्धालुओं ने अपने पूर्वजों का स्मरण कर उन्हें भावभीनी विदाई दी.
संगम तट पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ा
पितृ पक्ष के अंतिम दिन सबसे ज्यादा आस्था का सैलाब संगम नगरी प्रयागराज में नजर आया. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर भोर की पहली किरण के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट गई. संगम की रेती पर हाथ में तिल, जौ और जल लिए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण और पिंडदान किया.
कोई अपने पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए तर्पण करता नजर आया, तो कोई पुरोहितों के सानिध्य में विधि-विधान से धार्मिक कर्मकांड संपन्न करता दिखा. इन धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा संगम तट वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान हो उठा.
क्या है इस दिन की मान्यता?
सर्वपितृ अमावस्या का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है. मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वजों का स्मरण और उनके निमित्त किए गए धार्मिक कार्य से उनकी आत्मा को शांति मिलती है. यह उन सभी पितरों को याद करने का अंतिम दिन होता है, जिनकी मृत्यु तिथि परिवारजनों को ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध पक्ष के दौरान तर्पण नहीं हो पाता. आज के दिन पिंडदान, तर्पण, ब्राह्मण भोज और वस्त्र-अन्न दान करने से पितृ प्रसन्न होकर परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने लोक लौटते हैं.
'पितृ के लिए पिंडदान की परंपरा'
संगम तट पर रहने वाले तीर्थ पुरोहित गोपाल जी का कहना है कि पितृ विसर्जन के साथ ही पितृ पक्ष का भी आज से समापन हो जाएगा. उन्होंने बताया कि आज के दिन पितृ के लिए पिंडदान की परंपरा है. ब्राह्मणों को भोजन और दान देने की भी परंपरा है. इसी वैदिक सनातनी परंपरा के निर्वहन के लिए आज लोग संगम तट पर पहुंचे हैं और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान कर रहें हैं.
अयोध्या, उन्नाव और कौशांबी में भी श्राद्ध-तर्पण
उधर, प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या में भी सरयू नदी के घाटों पर हजारों भक्तों ने पवित्र स्नान कर पूर्वजों के निमित्त जल अर्पित किया. उन्नाव के आनंद घाट और कौशांबी के विभिन्न पूजा स्थलों पर भी श्रद्धालुओं ने तर्पण के बाद जरूरतमंदों को अन्न व वस्त्र दान किए और ब्राह्मण भोज कराया.
पितृ विसर्जन के साथ ही अब 15 दिनों से चले आ रहे संयम का समय समाप्त हो गया है. पितरों का आशीर्वाद लेकर श्रद्धालु अब कल से शुरू हो रहे देवी पक्ष (नवरात्रि) और अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्यों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं.