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सड़क पर बिछा अदृश्य फंदा: टंडन पुल पर चाइनीज मांझे ने रेती सचिवालय कर्मी की गर्दन, बाल-बाल बची सांसें

Lucknow Chowk Manjha Accident: लखनऊ के चौक के लालजी टंडन पुल के पास सचिवालय कर्मी मांझे का शिकार हो गए. बताया जा रहा है कि वह बाइक से अपने घर लौट रहे थे. इसी दौरान लालजी टंडन पुल के पास हेलमेट में मांझा फंस गया. मांझा हटाने के दौरान वह गर्दन में उलझ गया. बाइक रोकने तक मांझे ने उनके गर्दन रेत दी. जिसके बाद वह सड़क पर गिर पड़े. गर्दन कटने से कर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

Written By Pooja Singh
Published: Sep 30, 2026, 08:26 AM IST | Updated: Sep 30, 2026, 08:33 AM IST
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Lucknow Chowk Manjha Accident/ विशाल रघुवंशी: नवाबों के शहर लखनऊ की हवाओं में लहराती रंग-बिरंगी पतंगें अब राहगीरों के लिए मौत का फंदा बनती जा रही हैं. शासन-प्रशासन के तमाम कोशिशों के बावजूद राजधानी की सड़कों पर चाइनीज और नायलॉन मांझे का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार की शाम चौक इलाके से एक बार फिर ऐसा ही दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां घर लौट रहे एक सचिवालय कर्मी की गर्दन पतंग के कातिल मांझे की चपेट में आने से कट गई.

अचानक सामने आई 'अदृश्य मौत'
टिकैतराय तालाब एलडीए (LDA) कॉलोनी निवासी सचिवालय कर्मी मंगलवार शाम अपनी ड्यूटी खत्म कर बाइक से घर लौट रहे थे. शाम का वक्त था और सड़कों पर रोजमर्रा की तरह चहल-पहल थी. जैसे ही वे चौक इलाके के लालजी टंडन पुल के पास पहुंचे, हवा में तैरता हुआ एक मांझा अचानक उनके हेलमेट में आकर फंस गया.

हेलमेट निकालने की कोशिश में उलझ गया फंदा
सचिवालय कर्मी ने तत्परता दिखाते हुए बाइक की रफ्तार धीमी की और बाइक रोककर हेलमेट से मांझे को अलग करने का प्रयास किया, लेकिन जैसे ही उन्होंने हाथ बढ़ाया, हेलमेट में फंसा मांझा फिसलकर सीधे उनकी गर्दन पर जा उलझ गया. इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते या बाइक पूरी तरह रोक पाते धारदार मांझे ने उनकी गर्दन को बुरी तरह रेत दिया.

गर्दन में दर्द और खून के फव्वारे के बीच वे संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर पड़े. मौके पर मौजूद राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई.

गर्दन पर गहरा घाव, अस्पताल में लगे 3 टांके
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए खून से लथपथ सचिवालय कर्मी को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया. मांझा काफी धारदार था, जिससे गर्दन पर काफी गहरा कट आया है. गनीमत यह रही कि मुख्य नस बाल-बाल बच गई. उनकी गर्दन पर 3 टांके लगाए गए हैं. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बनी हुई है, लेकिन हादसे के खौफ से परिवार और सहकर्मी सिहर उठे हैं.

प्रतिबंध के बावजूद कब तक बिछेंगे मौत के जाल?
राजधानी लखनऊ में चाइनीज और नायलॉन मांझे की बिक्री और उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन धरातल पर इसकी अवैध बिक्री धड़ल्ले से जारी है. हर साल कई बेगुनाह राहगीर और दोपहिया वाहन चालक इस कातिल धागे की बलि चढ़ जाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक पुलिस और प्रशासन इन अवैध विक्रेताओं के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाएगा, तब तक सड़कों पर दौड़ते मासूमों की सांसों पर यह 'अदृश्य फंदा' ऐसे ही मंडराता रहेगा.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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