Akanksha Dubey Death Case: भोजपुरी सिनेमा जगत की मशहूर एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. मृतका की मां मधु दुबे लगातार यह दावा करती आ रही हैं कि उनकी बेटी ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद परिवार में निराशा है. परिवार के वकील ने इस कानूनी लड़ाई को अब सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है.
अब सुप्रीम कोर्ट जाएगा एक्ट्रेस का परिवार
आकांक्षा दुबे के परिवार के वकील सौरभ तिवारी का कहना है कि यह फैसला हमारी उम्मीदों के मुताबिक नहीं है और हम इससे बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं. हमारी याचिकाओं में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. आदेश बहुत छोटा है और इसमें कोई तर्क नहीं दिया गया है. चूंकि हमें कोई राहत नहीं मिली और फाइल को रिकॉर्ड में डाल दिया गया है, इसलिए हम इस मामले को आगे ले जा रहे हैं.
'यह सुसाइड नहीं, बल्कि हत्या है'
उन्होंने कहा कि सबसे पहले हम आकांक्षा मर्डर केस में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं. मैंने मृत एक्ट्रेस की मां से बात की है और हम इस पर आगे बढ़ रहे हैं. मुख्य बात यह है कि तस्वीरों में एक्ट्रेस बिस्तर पर बैठी हुई मिली थीं. वहां कोई लटकाव नहीं था न तो आंशिक और न ही पूरा. यह साफ है कि या तो उन्हें वहां रखा गया था या उनकी हत्या करके उन्हें वहां रखा गया था.
रेप, डीएनए और एफआईआर पर सवाल
वकील सौरभ तिवारी का कहना है कि हाई कोर्ट ने पहले मौखिक रूप से कहा था कि उनकी हत्या की गई थी और फिर उन्हें उस स्थिति में रखा गया था. बहरहाल, हम आदेश का सम्मान करते हैं. यह एक न्यायिक फैसला है और हमारे पास कानूनी रास्ता सुप्रीम कोर्ट जाने का है. एक और अहम बात उस व्यक्ति के बारे में है, जो आखिरी समय में होटल के कमरे में संदिग्ध हालात में मिला था. मृत एक्ट्रेस के शरीर पर उसके प्रोफाइल से मेल खाते स्पर्मेटोजोआ मिले थे. इससे साफ पता चलता है कि रेप हुआ था.
वकील के गंभीर आरोप
एक्ट्रेस के परिवार के वकील का कहना है कि एफआईआर के बारे में हमारा कहना है कि मृत एक्ट्रेस की मां ने असल में एफआईआर नहीं लिखवाई थी. उनका बयान दर्ज करने के बजाय पुलिस ने जबरदस्ती अपना बयान लिख दिया. हाईकोर्ट ने पूछा कि चार्जशीट दाखिल करते समय प्रोटेस्ट पिटीशन क्यों नहीं दायर की गई. उनकी मां अकेली थीं. उनके पास साधन नहीं थे, तो वह कैसे दायर कर सकती थीं? कोर्ट के पास केस ट्रांसफर करने की शक्ति है. दूसरे शब्दों में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित कानूनी सिद्धांत माननीय हाईकोर्ट पर भी लागू होता है.
इतना ही नहीं उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने हाईकोर्ट से एक अहम तथ्य पूरी तरह छिपाया. स्पर्मेटोजोआ सैंपल से मिला DNA ब्लड सैंपल से मिले DNA से मेल खाता था.