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राजनीति में सम्मान के अपने मायने होते हैं और जब बात अपने ही दल के वरिष्ठ नेता की हो तो शिष्टाचार की अपेक्षा और बढ़ जाती है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में दिशा की बैठक के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी है. अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के सम्मान में जहां बैठक में मौजूद सांसद, एमएलसी, विधायक और अधिकारी अपनी कुर्सियों से खड़े हो गए. वहीं, समाजवादी पार्टी के सदर विधायक धर्मराज सिंह यादव उर्फ सुरेश यादव अपनी कुर्सी पर ही बैठे रहे. अब उनका यही अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है.
दरअसल, जिले के डीआरडीए सभागार में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक चल रही थी. बैठक में बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया, एमएलसी अंगद सिंह, विधायक धर्मराज सिंह यादव उर्फ सुरेश यादव, गौरव रावत, दिनेश रावत, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रशासक राजरानी रावत समेत तमाम जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे. इसी दौरान अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद बैठक में पहुंचे. उनके सभागार में प्रवेश करते ही लगभग सभी जनप्रतिनिधि और अधिकारी सम्मान में खड़े हो गए, लेकिन सदर विधायक सुरेश यादव अपनी कुर्सी से नहीं उठे.
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इसलिए भी चर्चा तेज है, क्योंकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सार्वजनिक कार्यक्रमों में सांसद अवधेश प्रसाद को विशेष सम्मान देते नजर आते हैं. उनके सम्मान में अखिलेश यादव के खड़े होने की तस्वीरें और वीडियो भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं. ऐसे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जिस वरिष्ठ नेता का इतना सम्मान करते हों, उसी नेता के सामने पार्टी के एक विधायक का कुर्सी पर बैठे रहना कई सवाल खड़े कर रहा है.
दिशा की बैठक का यह नजारा अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग इसे सामान्य शिष्टाचार से लेकर राजनीतिक संदेश तक के नजरिये से देख रहे हैं. हालांकि विधायक सुरेश यादव की ओर से इस व्यवहार को लेकर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. फिलहाल बैठक के विकास कार्यों से ज्यादा इस अनोखे नजारे की चर्चा सियासी गलियारों में हो रही है.
बता दें कि सुरेश यादव यूपी के बाराबंकी के सदर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. उन्हें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है. सुरेश यादव अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं. 2024 में उनका एक विवादित बयान खूब वायरल हुआ था. उन्होंने बीजेपी को ‘हिंदू आतंकवादी संगठन’ बताया था. इसके लेकर उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किए गए थे.
(बाराबंकी से नितिन श्रीवास्तव की रिपोर्ट)