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अपनी मर्जी से जीने का हक: लिव-इन में रह रहीं 2 लड़कियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, दिए सुरक्षा के निर्देश

Allahabad High Court News: लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाली दो लड़कियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंची दो लड़कियों के शांतिपूर्ण जीवन में परिजनों के किसी भी तरह के हस्तक्षेप पर रोक लग गई है. कोर्ट ने कहा कि बालिग जोड़े के शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप का किसी को अधिकार नहीं है.

Written By Pooja Singh
Published: Sep 19, 2026, 05:42 PM IST | Updated: Sep 19, 2026, 05:45 PM IST
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Allahabad High Court News/ मोहम्मद गुफरान (प्रयागराज): लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही दो बालिग लड़कियों के अधिकार और सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बालिग हो चुकी लड़कियों को अपनी मर्जी से जहां चाहें और जिसके साथ चाहें रहने का पूरा अधिकार है. उनके स्वतंत्र और शांतिपूर्ण जीवन में परिजनों या किसी भी तीसरे व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

सुरक्षा याचिका पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
जस्टिस गौतम चौधरी की सिंगल बेंच ने फरीदा अंसारी और प्रगति कुशवाहा की ओर से दाखिल सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया. दोनों लड़कियों ने अपने परिजनों से जान-माल के खतरे और लगातार मिल रही धमकियों की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई थी. अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों लड़कियां बालिग हैं और अपनी स्वेच्छा से एक-साथ लिव-इन में रह रही हैं.

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि दोनों के शांतिपूर्ण जीवन में किसी भी तरह का खलल न पड़ने दिया जाए. अदालत ने साफ किया कि अगर उन्हें परिजनों या किसी अन्य से कोई खतरा या धमकी मिलती है, तो वे तुरंत संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सुरक्षा मांग सकती हैं.

नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान शुरू हुई थी प्रेम कहानी
याची अधिवक्ता महेंद्र यादव के मुताबिक, वाराणसी की रहने वाली फरीदा अंसारी करीब दो साल पहले नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी करने छत्तीसगढ़ गई थी. वहां उसने प्रगति कुशवाहा के घर पर एक कमरा किराए पर लिया. साथ रहते-रहते दोनों के बीच प्रेम संबंध (समलैंगिक रिश्ता) बन गया. जब परिजनों को इस रिश्ते की भनक लगी, तो उन्होंने इसका विरोध किया. परिजनों के विरोध के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे का साथ न छोड़ने का फैसला किया और घर वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर साथ रहने लगीं. मौजूदा समय में दोनों लड़कियां वाराणसी में रहकर प्राइवेट जॉब कर रही हैं और अपना जीवन यापन कर रही हैं.

अंतर-धार्मिक और समलैंगिक रिश्ते पर अदालत का संदेश
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि दोनों लड़कियां अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखती हैं. हालांकि, अदालत ने धर्म और रूढ़िवादिता से ऊपर उठकर केवल उनके बालिग होने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को प्राथमिकता दी. इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला समाज में बालिग व्यक्तियों के संवैधानिक अधिकारों, समलैंगिक जोड़ों की सुरक्षा और व्यक्तिगत आजादी को मजबूती देने वाला एक बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है.

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About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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