SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

बॉन्ड से नहीं बच सकते डॉक्टर: प्रशासनिक देरी का बहाना खारिज, मरीजों के हक में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

SGPGI Doctor Mandatory Service Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकारी मेडिकल संस्थानों से रियायती दर पर PG करने वाले डॉक्टर 2 साल की अनिवार्य सरकारी सेवा के बॉन्ड से पीछे नहीं हट सकते. SGPGI लखनऊ से MD करने वाली डॉ. अपारूपा सेन गुप्ता ने याचिका में तर्क दिया था कि कोर्स खत्म होने के 3 महीने के भीतर पोस्टिंग न मिलने से बॉन्ड खत्म माना जाए. कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया.

Written By Pooja Singh
Published: Sep 23, 2026, 09:10 AM IST | Updated: Sep 23, 2026, 09:16 AM IST
Join

SGPGI Doctor Mandatory Service Case: उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल संस्थानों से कम खर्च में स्नातकोत्तर (PG) चिकित्सा शिक्षा हासिल करने वाले डॉक्टरों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बेहद अहम और कड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने साफ-साफ कहा है कि जो डॉक्टर सरकार की ओर से दी जाने वाली रियायती दरों पर पीजी की पढ़ाई पूरी करते हैं, वे दो साल के अनिवार्य सरकारी सेवा बॉन्ड से किसी भी सूरत में पीछे नहीं हट सकते. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली थोड़ी बहुत देरी को ढाल बनाकर डॉक्टर अपनी सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते.

क्या था पूरा मामला और डॉक्टर की दलील?
यह पूरा मामला लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) से एमडी (ट्रांसप्लांट मेडिसिन) की पढ़ाई पूरी करने वाली डॉक्टर अपारूपा सेन गुप्ता की याचिका से जुड़ा है. डॉक्टर अपारूपा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए यह तर्क दिया था कि उनकी पढ़ाई पूरी होने के तीन महीने के भीतर प्रदेश सरकार ने उन्हें कोई सरकारी सेवा (पोस्टिंग) उपलब्ध नहीं कराई. इसलिए नियमों के तहत उनके दो साल का अनिवार्य सेवा बॉन्ड अपने आप समाप्त माना जाना चाहिए.

हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी और फैसला
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए डॉक्टर की इस दलील को पूरी तरह से खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के समय दो साल की अनिवार्य सेवा की शर्त इसीलिए रखती है, ताकि आम जनता को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनी रहे और सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी न हो.

पीठ ने जोर देकर कहा कि यह पूरी व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में मरीजों के 'जीवन के अधिकार' की रक्षा के लिए बनाई गई है. प्रशासनिक प्रक्रिया में कुछ समय लग जाना स्वाभाविक है, और ऐसी छोटी-मोटी देरी का फायदा उठाकर कोई भी डॉक्टर समाज के प्रति अपनी इस प्रतिबद्धता से मुक्त नहीं हो सकता.

क्या है हाईकोर्ट के फैसले का संदेश?
हाईकोर्ट का यह आदेश प्रदेश के उन सभी मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए एक स्पष्ट संदेश है, जो उच्च शिक्षा के बाद सरकारी सेवाओं में जाने से हिचकिचाते हैं. कोर्ट के इस सख्त रुख से न केवल सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर होगी, बल्कि उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सकेगा, जो पूरी तरह से सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली पर निर्भर हैं.

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पूजा सिंह डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली से ताल्लुक रखने वाली पूजा को मीडिया जगत में 5 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.पूजा के पास डेस्क एडिटिंग का व्यावहारिक अनुभव है.  स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ चैनल टीवी 9 डिजिटल और न्यूज नेशन में काम करने का अनुभव है. पूजा ने भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है.पूजा सिंह से आप pooja.singh@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप पूजा से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES