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बुर्का पहनकर दे रही थी चकमा, छोटे होटलों में रुकी: पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा दुबे अपनाती थी ये तरकीब

श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को पुलिस नागरपुर से लखनऊ लेकर आ रही है. तीनों कैसे 11 दिनों तक पुलिस को चकमा दे रहे थे? इस पर एडीजी ने जानकारी दी है.

बुर्का पहनकर दे रही थी चकमा, छोटे होटलों में रुकी: पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा दुबे अपनाती थी ये तरकीब
Image Credit: Shraddha Dubey (Source: Lucknow Police)

लखनऊ के शिवा शर्मा केस में फरार चल रही मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश को पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है. तीनों को पकड़ने के लिए लखनऊ पुलिस लगातार उनकी तलाश कर रही थी. आखिरकार मंगलवार शाम पुलिस को सफलता मिल गई. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने गिरफ्तारी की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि फरारी के दौरान आरोपी बेहद शातिर तरीके से पुलिस से बचने की कोशिश कर रहे थे.

बुर्का पहनकर छोटे होटलों में रुकते थे

एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि फरारी के दौरान श्रद्धा दुबे और उसकी बहन रश्मि दुबे बुर्का पहनकर यात्रा करती थीं. दोनों ऐसी जगहों पर ठहरती थीं, जहां पहचान से जुड़ी ज्यादा पूछताछ न पूछते हो. इसके लिए वे छोटे होटलों में रुकती थीं और किसी भी जगह पर ज्यादा समय तक नहीं ठहरती थीं.

मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करते थे  

वहीं, पुलिस से बचने के लिए वे मोबाइल और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम करती थीं. इससे पुलिस को उनकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही थी. एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि श्रद्धा दुबे पुलिस से करीब 10 से 12 घंटे आगे चल रही थी. यानी पुलिस जिस जगह पहुंचने की तैयारी करती, आरोपी उससे पहले ही उस जगह को छोड़कर फरार हो जाते. यही वजह रही कि पुलिस को तीनों को गिरफ्तार करने में समय लग गया.

नेपाल जाकर पुलिस को दिया चकमा

उन्होंने बताया कि तीनों आरोपी पहले नेपाल गए थे. इसके बाद वे वापस लखनऊ आ गए, ताकि पुलिस को लगे कि वे अभी भी नेपाल में हैं, फिर श्रद्धा दुबे लखनऊ आई और एक चैनल को बाइट देने के बाद तत्काल उत्तर प्रदेश से बाहर चली गई.

टैक्सी बदल-बदलकर किया सफर

नागपुर पहुंचने के लिए आरोपियों ने टैक्सी का इस्तेमाल किया. एडीजी अमिताभ यश ने बताया कि तीनों सफर के दौरान गाड़ियां भी बदलते रहते थे. एक टैक्सी छोड़कर दूसरी गाड़ी से आगे निकल जाते थे, ताकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही अपना ठिकाना बदल सकें. लगातार बदलती लोकेशन, बुर्के में सफर, छोटे होटलों में ठहरने जैसे तरकीब अपनाते थे. पुलिस ने तीनों को नागपुर से लखनऊ ला रही है. 

(लखनऊ से तुषार श्रीवास्तव की रिपोर्ट)

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About the Author

Amitesh Pandey

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अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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