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कई बार घर के किसी कोने में पड़ी पुरानी चीज की अहमियत का अंदाजा उसके मालिक को भी नहीं होता. ब्रिटेन में मिला तस्मानियन टाइगर का सिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. यह अनमोल खजाना लंबे समय से स्टोरेज में रखा हुआ था. किसी को अंदाजा नहीं था कि यह इतना दुर्लभ और इतना कीमती भी हो सकता है.
ब्रिस्टल की नीलामी कंपनी ऑक्शनियम के अनुसार, इस अनमोल खजाने का नाम ट्रेवर रखा गया है. इसके मालिक ने अगस्त में एक दूसरे तस्मानियन टाइगर के सिर की खबर देखी. इसके बाद उन्होंने अपने पास रखे पुराने सामान की खोज शुरू की और उन्हें अपने घर में यह दुर्लभ खजाना मिला.
BBC की रिपोर्ट के अनुसार, नीलामी कंपनी के ऑक्शनियर एंड्रयू स्टोव के लिए यह खोज किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं थी. उनका कहना है कि जब उन्होंने इस अनमोल खजाने को खोलकर देखा, तो उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ. स्टोव ने इसे अब तक नीलामी में आई सबसे अहम चीजों में से एक बताया. उनके अनुसार, यह कोई आम पुरानी वस्तु नहीं है, बल्कि ऐसे जानवर का अवशेष है, जो अब दुनिया में मौजूद नहीं है. इसकी नीलामी 26 नवंबर को बाथ में होनी है. इसकी अनुमानित कीमत 30 हजार से 50 हजार पाउंड के बीच रखी गई है. भारतीय रुपये में यह रकम लाखों के आसपास बैठती है.
तस्मानियन टाइगर को थाइलेसिन के नाम से भी जाना जाता है. यह मांस खाने वाला एक मार्सुपियल स्तनधारी जीव था. इसका शरीर बड़े कुत्ते जैसा था और इसकी बनावट भेड़िये से मिलती-जुलती थी. इसी वजह से इसे तस्मानियन टाइगर कहा जाने लगा. यह जानवर कभी ऑस्ट्रेलिया, न्यू गिनी और तस्मानिया के जंगलों में पाया जाता था. लेकिन इंसानों के शिकार और दूसरी वजहों से इसकी संख्या लगातार घटती गई. अंत में इस प्रजाति का आखिरी जानवर 1936 में तस्मानिया के होबार्ट चिड़ियाघर में मर गया. इसके बाद से तस्मानियन टाइगर को विलुप्त माना जाता है.
इस साल गर्मियों में भी तस्मानियन टाइगर के एक सिर की नीलामी ने लोगों का ध्यान खींचा था. यह नमूना विक्टोरियन दौर का बताया गया था और शुरुआत में इसे गलती से लोमड़ी का सिर समझ लिया गया था. बाद में कुछ लोगों ने इसकी असली पहचान पहचानी. इसके बाद नीलामी में इसकी कीमत हजारों पाउंड तक पहुंच गई. इस खोज की खबर दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंची. स्टोव के अनुसार, उस समय उन्हें लगा था कि ऐसा दुर्लभ नमूना मिलना जिंदगी में एक बार होने वाली घटना है. लेकिन कुछ ही हफ्तों के अंदर दूसरा अवशेष सामने आना उनके लिए भी चौंकाने वाला था. उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक, रिसर्चर और कलेक्टर ऐसे अवशेषों की तलाश में अपनी जिंदगी लगा देते हैं. ऐसे में कुछ ही समय के अंतराल में दो नमूनों का उनके पास पहुंचना असाधारण है.
इस अवशेष के इतिहास को लेकर भी दिलचस्प जानकारी सामने आई है. माना जाता है कि बीसवीं सदी की शुरुआत में तस्मानिया के शेफील्ड इलाके में एक किसान ने इस जानवर का शिकार किया था. इसके बाद साल 1905 में इसे ब्रिटेन लाया गया. हालांकि, इसके पूरे सफर और इतने लंबे समय तक सुरक्षित रहने की कहानी के बारे में अभी सीमित जानकारी मिल पाई है. इस तरह करीब एक सदी से ज्यादा समय तक पुरानी चीजों के बीच रखा यह अवशेष अब वैज्ञानिकों और दुर्लभ वस्तुओं को इकट्ठा करने वालों के लिए खास बन गया है.
ऑक्शनियम के अनुसार, ट्रेवर को टैक्सिडर्मी के जरिए सुरक्षित रखे गए तस्मानियन टाइगर के सिरों में दुनिया का केवल तीसरा अवशेष माना जा रहा है. टैक्सिडर्मी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें मृत जानवर की बाहरी बनावट को सुरक्षित रखा जाता है. कंपनी का कहना है कि इतने दुर्लभ अवशेष का सामने आना बड़ी बात है. BBC को स्टोव ने बताया कि दो अवशेषों का इतने कम समय में मिलना इस प्रजाति के बचे हुए अवशेषों के बारे में नई जानकारी दे सकता है. इसे इंटरनेशनल थाइलेसिन स्पेसिमेन डेटाबेस में भी शामिल किया गया है. यह डेटाबेस दुनिया भर में मौजूद तस्मानियन टाइगर के अवशेषों का रिकॉर्ड रखने में मदद करता है.
इस डेटाबेस से जुड़े डॉ. स्टीफन स्लाइटहोम ने कहा कि ऐसे अवशेष विलुप्त हो चुकी प्रजातियों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. उनके अनुसार, तस्मानियन टाइगर के नमूने बेहद दुर्लभ हैं और जूलॉजी से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुओं में गिने जाते हैं. वैज्ञानिकों के लिए इनका महत्व केवल इनकी कीमत तक सीमित नहीं है. इनके जरिए किसी प्रजाति की बनावट, इतिहास और उसके विलुप्त होने से जुड़ी जानकारी को समझने में मदद मिल सकती है.