पिता की अधूरी ख्वाहिशों को बेटे ने बनाया अपना सपना: 80 साल के बाबूजी को लेकर घूम रहा पूरा भारत, बकेट लिस्ट में देशभर के कई बड़े मंदिर
80 साल के पिता की जिंदगी में वे खुशियां भरने के लिए एक बेटा पूरे भारत की यात्रा पर निकल पड़ा है, जो शायद जिम्मेदारियों के बीच कभी पूरी नहीं हो पाईं. श्रीकांत पांडे अपने पिता की बकेट लिस्ट में शामिल मंदिरों और जगहों को एक-एक करके पूरा कर रहे हैं. ट्रेन, बस और कार से हो रही इस यात्रा में मंदिर दर्शन के साथ नए शहर, खाना और पिता के साथ बिताए पल भी खास बन रहे हैं.
कई बार माता-पिता अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा बच्चों की जरूरतें पूरी करने में लगा देते हैं. बच्चों की पढ़ाई, नौकरी, घर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उनकी अपनी कई इच्छाएं पीछे छूट जाती हैं. उम्र बढ़ने के साथ वही अधूरे सपने याद तो रहते हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने का मौका नहीं मिल पाता.
ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का दिल छू रही है. एक बेटा अपने 80 साल के पिता को लेकर पूरे भारत की यात्रा पर निकला है. उसका मकसद सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि पिता की उन इच्छाओं को पूरा करना है, जिन्हें उन्होंने जिंदगी भर की जिम्मेदारियों के बीच कहीं पीछे छोड़ दिया था.
पापा की बकेट लिस्ट बनी बेटे का मिशन
इस अनोखी यात्रा को श्रीकांत पांडे अपने इंस्टाग्राम अकाउंट @bhukkhad_musafir के जरिए लोगों के साथ शेयर कर रहे हैं. उनके वीडियो में कभी पिता ट्रेन में बैठे नजर आते हैं, तो कभी किसी मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते दिखाई देते हैं. कहीं दोनों किसी नए शहर का खाना खाते हैं, तो कहीं रास्ते में रुककर आसपास की खूबसूरती देखते हैं. श्रीकांत के अकाउंट की पहचान भी इसी सफर से जुड़ी है. उनके बायो में लिखा है कि वह अपने पापा के साथ भारत घूम रहे हैं और उनकी बकेट लिस्ट में शामिल हर मंदिर को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. मतलब यह सफर किसी आम ट्रैवल ब्लॉग जैसा नहीं है. इसमें एक बेटे की कोशिश दिखाई देती है कि उसके पिता सिर्फ जगहों को तस्वीरों में न देखें, बल्कि खुद वहां जाएं और उन पलों को महसूस करें.
मां के जाने के बाद बदली जिंदगी
श्रीकांत ने अपनी जिंदगी से जुड़ी कुछ बातें भी सोशल मीडिया पर शेयर की हैं. उन्होंने बताया कि वह अपनी मां को कैंसर की वजह से खो चुके हैं. इसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को देखने का तरीका बदला और पिता के साथ ज्यादा समय बिताने का फैसला किया. उन्होंने लिखा कि अगर उन्हें पैसे मिलते हैं, तो उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही होगी कि उनके पापा दुनिया देखें. उनके मुताबिक, उनके पिता की दुनिया देखने की इच्छा शायद जिंदगी की जिम्मेदारियों के कारण अधूरी रह गई. अब बेटा उसी अधूरे सपने को अपनी खुशी बना चुका है. श्रीकांत ने अपनी मेट्रो लाइफ छोड़कर जड़ों की तरफ लौटने, पिता के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और अपनी जिंदगी में कुछ नया शुरू करने की बात भी कही है. उन्होंने आगे अपना कैफे शुरू करने की इच्छा जताई है.
समुद्र पहली बार देखा तो बदल गया पल
इस सफर के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, लेकिन इनमें एक पल लोगों को खास तौर पर भावुक कर गया. वीडियो में श्रीकांत के पिता पहली बार समुद्र देखते नजर आते हैं. समुद्र के किनारे पहुंचकर वह रेत को छूते हैं और आसपास का नजारा देखते हैं. किसी के लिए यह एक सामान्य ट्रैवल मोमेंट हो सकता है, लेकिन उनके बेटे के लिए यह उससे कहीं ज्यादा बड़ा पल है. शायद इसलिए कि वह सिर्फ अपने पिता को समुद्र नहीं दिखा रहा, बल्कि उनकी जिंदगी में एक ऐसा अनुभव जोड़ रहा है, जो शायद सालों पहले ही मिल जाना चाहिए था. सोशल मीडिया पर लोगों ने इस वीडियो को खूब पसंद किया. कई यूजर्स ने कहा कि अपने माता-पिता के साथ समय बिताना और उनकी इच्छाओं को पूरा करना किसी भी महंगे ट्रिप से ज्यादा कीमती है.
मंदिरों से आगे है यह सफर
श्रीकांत की यात्रा का बड़ा हिस्सा पिता की धार्मिक इच्छाओं से जुड़ा है. वह अलग-अलग मंदिरों में पिता को दर्शन कराने पहुंच रहे हैं. लेकिन इस सफर में सिर्फ मंदिर ही नहीं हैं. ट्रेन की यात्राएं, रास्ते में मिलने वाले शहर, अलग-अलग तरह का खाना, नए लोगों से मिलना और पिता के साथ बिताया गया समय भी इस यात्रा का हिस्सा है. यही वजह है कि उनकी पोस्ट देखने वालों को इसमें सिर्फ ट्रैवल नहीं, बल्कि एक पिता और बेटे के रिश्ते की कहानी नजर आती है. श्रीकांत का मानना है कि माता-पिता को सिर्फ पैसे या सुविधाओं की जरूरत नहीं होती. उन्हें बच्चों का समय भी चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने एक और सपना सोशल मीडिया पर शेयर किया है.
बुजुर्गों के लिए खोलना चाहते हैं घर
श्रीकांत ने बताया कि वह भविष्य में एक Old Age Home शुरू करना चाहते हैं. उनका कहना है कि वह माता-पिता की देखभाल करना पसंद करते हैं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा जरूरत समय की होती है. उनकी इस बात ने भी लोगों का ध्यान खींचा. क्योंकि उनकी मौजूदा यात्रा भी इसी सोच का एक हिस्सा नजर आती है. वह अपने पिता के साथ सिर्फ कुछ दिन घूमने नहीं निकले हैं, बल्कि उनके साथ ऐसे अनुभव जोड़ रहे हैं, जिन्हें वह आने वाले सालों तक याद रख सकें.
बेटे के लिए सबसे बड़ी खुशी
श्रीकांत की कहानी की सबसे खास बात यह है कि इसमें कोई बड़ी लग्जरी या महंगा प्लान नजर नहीं आता. एक बेटा है, उसका 80 साल का पिता है और पिता की एक बकेट लिस्ट है. श्रीकांत उस लिस्ट को अपनी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपनी खुशी मानकर पूरा कर रहे हैं. उनके वीडियो यही याद दिलाते हैं कि माता-पिता के साथ बिताया गया समय वापस नहीं आता. जिंदगी में पैसा, नौकरी और काम जरूरी हैं, लेकिन एक उम्र के बाद सबसे कीमती चीज शायद वही होती है, जो श्रीकांत अपने पिता को दे रहे हैं.