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3 लाख की नौकरी छोड़ी, भारत घूमने चली आई विदेशी महिला: हिमालयी गांव में मिला ऐसा प्यार; बोली- 'अब जाने का मन नहीं'

भारत घूमने निकली पोलैंड की मालविना जब हिमालय के एक दूर-दराज गांव में पहुंची, तो उसे अंदाजा भी नहीं था कि यहां का एक छोटा सा घर उसकी यात्रा की सबसे खास याद बन जाएगा. घर में रहने वाली ममता और मुन्नी ने भाषा की परवाह किए बिना उसका स्वागत किया. नींबू की चाय पिलाई, खाना खाने को कहा और ऐसा अपनापन दिया कि मालविना का मन वहीं रुक जाने का करने लगा.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Oct 19, 2026, 09:41 AM IST | Updated: Oct 19, 2026, 10:00 AM IST
Image Credit: YT@MalvinaIsland | पहाड़ी गांव की मेहमाननवाजी की कायल हुई पोलैंड की मालविना!
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भारत की यात्रा पर निकले लोग यहां की खूबसूरत जगहों, पहाड़ों और पुराने मंदिरों को देखने के लिए अक्सर दूर-दूर तक जाते हैं. लेकिन कई बार सफर की सबसे यादगार चीज कोई जगह नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले लोग बन जाते हैं. पोलैंड की मालविना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.

भारत घूमते हुए मालविना हिमालय के पहाड़ी इलाके में पहुंची. यहां उसकी मुलाकात ममता और मुन्नी नाम की दो महिलाओं से हुई, जो पहाड़ों के बीच बने एक साधारण से घर में रहती हैं. मालविना के साथ फिलीपींस की एक लड़की भी थी, जो फिलहाल कनाडा में रहती है. दोनों विदेशी लड़कियों के लिए यह मुलाकात खास बन गई. मालविना ने अपने यूट्यूब चैनल पर इसका वीडियो शेयर किया, जिसमें उसने बताया कि इन महिलाओं ने जिस तरह से उनका स्वागत किया, उसने उन्हें अंदर तक छू लिया.

भाषा नहीं समझ आई, लेकिन अपनापन जताने में कोई कमी नहीं

मालविना ने अपने वीडियो में बताया कि मुलाकात के दौरान दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे की भाषा ठीक से नहीं समझ पा रहे थे. इसके बावजूद बातचीत का सिलसिला रुका नहीं. ममता और मुन्नी ने दोनों लड़कियों को अपने घर में बैठने के लिए कहा. उन्होंने मेहमानों को नींबू की चाय बनाकर पिलाई और गाय के दूध से बनी मिठाई भी खाने को दी. घर में बैठने के लिए लकड़ी का पीढ़ा था, आसपास पहाड़ों का सुकून और सामने दो ऐसी महिलाएं थीं, जो बिना किसी खास रिश्ते के उनका ख्याल रख रही थीं. मालविना को यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई. उसके लिए यह किसी महंगे होटल में मिलने वाली सुविधा का अनुभव नहीं था, बल्कि एक अनजान जगह पर परिवार जैसा अपनापन मिलने का मौका था.

'मुझे बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात...'

अपने वीडियो में मालविना ने बताया कि उसे नहीं लगा था कि यह छोटी सी मुलाकात उसकी जिंदगी पर इतना असर डालेगी. उसने कहा कि कई बार गहरा रिश्ता बनाने के लिए बहुत ज्यादा शब्दों की जरूरत नहीं होती. एक-दूसरे के लिए दिल में जगह हो, तो भाषा की दूरी भी छोटी लगने लगती है. मालविना ने ममता और मुन्नी के घर को देखकर अपनी खुशी भी जाहिर की. उसने कहा कि सच कहें, तो उसका मन वहीं रुक जाने का कर रहा था. पहाड़ों के बीच बना मिट्टी का घर और वहां का सादा माहौल उसे काफी पसंद आया. उसके लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग था, क्योंकि वह पहली बार इस तरह हिमालय के पहाड़ी इलाके में बने घर के अंदर पहुंची थी. वीडियो में उसकी बातों से साफ दिखता है कि वह इस मुलाकात को सिर्फ घूमने-फिरने का एक पड़ाव नहीं मान रही थी.

कभी कॉर्पोरेट नौकरी करती थी मालविना

मालविना की जिंदगी का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है. उसने बताया है कि वह करीब 10 साल तक कॉर्पोरेट दुनिया में आईटी कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुकी है. उस दौरान उसकी महीने की कमाई करीब 3,000 यूरो, यानी भारतीय रुपये में लगभग 3 लाख रुपये बताई गई. लेकिन एक समय ऐसा आया, जब उसने नौकरी छोड़कर दुनिया घूमने का फैसला किया. उसके अनुसार, वह इस सफर के लिए कोई पक्का बैकअप प्लान लेकर नहीं आई थी. उसने नौकरी छोड़ी और आगे का रास्ता अनुभवों के सहारे तय करने का फैसला किया. भारत में घूमते हुए वह अलग-अलग जगहों पर गई. उत्तराखंड में भी उसने कई जगहें देखीं और ऋषिकेश में तीन हफ्ते का योग कोर्स किया. वहां बिताए समय और अपनी यात्राओं से जुड़े अनुभव वह सोशल मीडिया पर शेयर करती रही है.

ऋषिकेश से हिमालय के गांव तक का सफर

मालविना की भारत यात्रा में ऋषिकेश का अनुभव भी खास रहा. योग सीखने के लिए वहां बिताए तीन हफ्तों के बाद उसने उत्तराखंड के दूसरे इलाकों को भी करीब से देखा. पहाड़ों के गांव में ममता और मुन्नी से हुई मुलाकात इसी सफर का हिस्सा थी. इस दौरान उसे सिर्फ नेचर के नजारे देखने को नहीं मिले, बल्कि स्थानीय लोगों के रहन-सहन और मेहमानों के प्रति उनके व्यवहार को समझने का मौका भी मिला. घर की बनावट, लकड़ी का पीढ़ा, चाय और घर में बनी मिठाई जैसी छोटी चीजें उसके लिए यादगार बन गईं. मालविना ने वीडियो में अपने परिवार के बारे में भी बात की. उसने बताया कि उसके पिता और उससे सात साल बड़ा भाई पोलैंड में रहते हैं, जबकि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं.

'ऐसा लगा जैसे मैं उनके परिवार का हिस्सा हूं'

वीडियो के अंत में मालविना ने ममता और मुन्नी के व्यवहार के लिए आभार जताया. उसने बताया कि दोनों महिलाओं ने जिस तरह उनका स्वागत किया, उससे उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह किसी अपने के घर आई हो. यात्रा के दौरान अनजान लोगों से मुलाकात होना आम बात है, लेकिन हर मुलाकात यादों में जगह नहीं बना पाती. मालविना के लिए यह अनुभव इसलिए खास रहा, क्योंकि यहां उसे बिना किसी पहचान और भाषा की समानता के भी अपनापन मिला. उसने कहा कि ऐसे पल उसे याद दिलाते हैं कि उसे यात्रा करना इतना पसंद क्यों है. नई जगहों को देखना अपनी जगह है, लेकिन वहां के लोगों से मिलना और उनके साथ कुछ वक्त बिताना सफर को एक अलग मायने देता है.

छोटी सी मुलाकात, जो लंबे समय तक रहेगी याद

ममता और मुन्नी के घर में बिताए कुछ पल मालविना के लिए किसी बड़ी पर्यटन वाली जगह से कम नहीं थे. वहां न कोई खास तैयारी थी और न ही मेहमानों के स्वागत के लिए कोई दिखावा. बस चाय, घर की बनी मिठाई और दिल से किया गया स्वागत था. शायद यही वजह है कि मालविना ने इस मुलाकात को अपनी जिंदगी पर असर डालने वाला अनुभव बताया. हिमालय के उस घर से लौटते वक्त उसके पास तस्वीरों और वीडियो के अलावा एक ऐसी याद भी थी, जिसमें भाषा से ज्यादा इंसानी जुड़ाव की अहमियत थी. उसकी कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों को भी यह याद दिलाती है कि सफर की खूबसूरती हमेशा बड़ी जगहों में नहीं छिपी होती.

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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