पाकिस्तान की गलियों, बाजारों और ऐतिहासिक जगहों से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करने वाले कार्ल रॉक इन दिनों वहां के हिंदू मंदिरों को लेकर चर्चा में हैं. न्यूजीलैंड के रहने वाले कार्ल लंबे समय से भारत और पाकिस्तान की यात्रा करते रहे हैं. वह अपनी पत्नी के साथ दिल्ली में भी रहते हैं और हिंदी को सिर्फ बोलते ही नहीं, पढ़ भी लेते हैं.
यही वजह है कि पाकिस्तान में घूमते हुए भाषा से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी उनके साथ हुआ. एक मंदिर में गाइड ने पंजाबी भाषा को हिंदी बताया तो कार्ल ने तुरंत उसकी गलती पकड़ ली. उन्होंने साफ कर दिया कि वह हिंदी पढ़ सकते हैं और दोनों भाषाओं के बीच फर्क समझते हैं.
कार्ल ने पाकिस्तान में अपनी यात्रा के दौरान कई हिंदू मंदिरों को देखने की कोशिश की. उन्होंने बताया कि अब तक वह इस्लामाबाद के आसपास मौजूद राम मंदिर और मशहूर श्री कटास राज मंदिर जा चुके हैं. कटास राज मंदिर को पाकिस्तान की हिंदू धार्मिक विरासत की अहम जगहों में से एक माना जाता है. कार्ल के लिए यह सिर्फ एक धार्मिक स्थल देखने का मौका नहीं था, बल्कि पाकिस्तान के उस इतिहास को करीब से समझने का भी अनुभव था, जिसके बारे में भारत के बाहर बहुत कम लोग जानते हैं. इसके अलावा वह मीरपुर में मंगला डैम के पास स्थित एक मंदिर तक भी पहुंचे. इस मंदिर की कहानी कुछ अलग है. बताया गया कि यह मंदिर साल के ज्यादातर समय डैम के पानी में डूबा रहता है. जब पानी नीचे जाता है, तभी मंदिर तक पहुंचना संभव होता है.
कार्ल ने अपने वीडियो में पाकिस्तान की हिंदू विरासत को लेकर चिंता भी जताई. उन्होंने कहा कि देश में हिंदू धर्म और मंदिरों का इतिहास काफी पुराना और समृद्ध है, लेकिन कई जगह इन विरासत स्थलों की हालत अच्छी नहीं है. उन्होंने बताया कि कुछ मंदिर वीरान पड़े हैं, कुछ जगहों पर इमारतें टूट-फूट चुकी हैं और कई धार्मिक स्थलों पर आम लोगों के जाने को लेकर पाबंदियां हैं. कार्ल की नजर में यह सफर सिर्फ मंदिरों को देखने तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने इन जगहों की मौजूदा स्थिति को भी कैमरे में रिकॉर्ड किया और अपने फॉलोअर्स के साथ शेयर किया.
कार्ल के अनुसार, कराची में वह अरब सागर के किनारे मौजूद एक पुराने मंदिर को देखना चाहते थे. लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर पाकिस्तानी सेना के जवानों ने उन्हें रोक दिया. उन्होंने बताया कि वह मंदिर के अंदर जाकर उसे देखना चाहते थे, लेकिन उन्हें आगे जाने की इजाजत नहीं मिली. कार्ल के लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग था क्योंकि वह पाकिस्तान की धार्मिक विरासत को करीब से दिखाने के मकसद से यात्रा कर रहे थे. हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है. इसलिए मंदिर तक जाने से रोके जाने की वजह को कार्ल के अनुभव और बयान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए.
कार्ल ने एक मशहूर काली माता मंदिर तक जाने की भी कोशिश की. उनके मुताबिक, यह मंदिर पहाड़ के अंदर स्थित है और वह वहां जाकर दर्शन करना चाहते थे. लेकिन रास्ते में पहाड़ खिसकने की वजह से बड़े-बड़े पत्थर पड़े थे. रास्ता बंद होने के कारण वह मंदिर तक नहीं पहुंच सके. यानी पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों की तलाश में निकले कार्ल के सामने कई बार ऐसी मुश्किलें आईं, जिनका उन्होंने शायद पहले से अंदाजा नहीं लगाया था.
इन सब जगहों के बीच कार्ल के सफर का सबसे खास पड़ाव साधु बेला रहा. सिंध के सुक्कुर में सिंधु नदी के बीच एक टापू पर स्थित यह हिंदू मंदिर परिसर अपनी लोकेशन की वजह से भी अलग है. यहां पहुंचने के लिए नाव से नदी पार करनी पड़ती है. कार्ल के लिए यही सफर अपने आप में एक अनुभव था. नदी के बीच टापू पर बना मंदिर परिसर दूर से ही एक अलग तस्वीर पेश करता है. बताया जाता है कि साधु बेला का इतिहास करीब दो सौ साल पुराना है. मान्यता के अनुसार, साल 1823 में उदासी संत बाबा बांखंडी महाराज इस जगह पहुंचे थे. धीरे-धीरे यह स्थान हिंदू धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र बन गया.
साधु बेला में सिर्फ एक मंदिर नहीं है. यहां शिव जी, हनुमान जी, गणेश जी और अन्नपूर्णा माता समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर बताए जाते हैं. परिसर में बगीचे, लाइब्रेरी और श्रद्धालुओं के रुकने की व्यवस्था भी है. बंटवारे के बाद भी सिंध में रहने वाले हिंदुओं के लिए साधु बेला एक अहम धार्मिक स्थल बना हुआ है. कार्ल के लिए इस जगह की खासियत सिर्फ इसका धार्मिक महत्व नहीं था. सिंधु नदी के बीच एक टापू पर मौजूद पूरा परिसर अपने आप में ऐसा नजारा है, जिसे देखकर कोई भी ट्रैवलर कुछ देर रुककर उसे समझना चाहेगा.
कार्ल ने बताया कि साधु बेला जाने के दौरान उन्हें एक और अलग अनुभव हुआ. जब उन्होंने स्थानीय पुलिस से मंदिर का रास्ता पूछा तो पुलिसकर्मी उनके साथ चल दिए. दर्शन करके लौटने तक पुलिस उनके साथ रही. कार्ल ने जब इसकी वजह पूछी तो पुलिसकर्मियों ने बताया कि यह इलाका पूरी तरह सुरक्षित नहीं है और यहां किडनैपिंग की घटनाएं आम हैं. इसलिए वे उनकी सुरक्षा में साथ आए हैं. एक विदेशी ट्रैवलर के लिए यह अनुभव निश्चित तौर पर असामान्य रहा होगा. एक तरफ वह पाकिस्तान की पुरानी हिंदू विरासत को देखने निकले थे, वहीं दूसरी तरफ कुछ इलाकों में उनकी सुरक्षा को लेकर स्थानीय पुलिस को साथ चलना पड़ा.
कार्ल रॉक का पाकिस्तान दौरा सिर्फ घूमने-फिरने का वीडियो नहीं रह गया है. उनके मंदिरों से जुड़े वीडियो ने लोगों का ध्यान उस धार्मिक विरासत की तरफ खींचा है, जो पाकिस्तान के इतिहास का हिस्सा रही है. कहीं पुराने मंदिर आज भी लोगों की आस्था का केंद्र हैं, तो कहीं वे समय, मौसम और दूसरी परेशानियों के बीच कमजोर होते दिखाई देते हैं. कुछ जगहों तक पहुंचना आसान है, जबकि कुछ मंदिरों के दरवाजे आम लोगों के लिए आसानी से नहीं खुलते. कार्ल ने अपने अनुभव के जरिए इन्हीं अलग-अलग तस्वीरों को दिखाने की कोशिश की है. हालांकि, उनके वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनकी यात्रा ने पाकिस्तान में मौजूद हिंदू विरासत और उसके मौजूदा हाल पर चर्चा जरूर शुरू कर दी है.
कार्ल की इस यात्रा की सबसे दिलचस्प बात शायद यही है कि उन्होंने उन जगहों को देखने की कोशिश की, जिनका नाम अक्सर इतिहास की किताबों या पुराने दस्तावेजों में मिलता है. राम मंदिर से लेकर कटास राज और सिंधु नदी के बीच बसे साधु बेला तक, हर जगह की अपनी कहानी है. इन मंदिरों की मौजूदा हालत भले अलग-अलग हो, लेकिन एक बात साफ है कि ये सिर्फ इमारतें नहीं हैं. इनके साथ लोगों की आस्था, पुराना इतिहास और बंटवारे से पहले की साझा विरासत भी जुड़ी हुई है. कार्ल के वीडियो ने इसी भूली-बिसरी तस्वीर को एक बार फिर सोशल मीडिया की चर्चा में ला दिया है.
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