यह वॉशरूम है या 2050 का स्पेसशिप? मुंबई एयरपोर्ट पर बिना हाथ लगाए हो रहे सारे काम; VIDEO देख चकराया लोगों का सिर
मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पर बने टचलेस स्मार्ट वॉशरूम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. यहां सेंसर वाले दरवाजे, बिना हाथ लगाए चलने वाले नल और ऑटो-फ्लश सिस्टम की सुविधा है. इस हाईटेक तकनीक देखकर लोग हैरान हैं और इसे एयरपोर्ट सुविधाओं में बड़ा बदलाव बता रहे हैं.
एयरपोर्ट पर हर दिन हजारों की संख्या में यात्री सफर करते हैं.चेक-इन काउंटर से लेकर बोर्डिंग गेट तक हर जगह लोगों की भीड़ रहती है. ऐसे में वॉशरूम जैसी जगहों पर साफ-सफाई बनाए रखना आसान नहीं होता. इसी परेशानी को कम करने के लिए मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल टू में टचलेस सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है.
यहां लगे सेंसर वाले नलों की खासियत यह है कि पानी चालू करने के लिए किसी हैंडल या बटन को छूने की जरूरत नहीं होती. हाथ को नल के नीचे ले जाते ही सेंसर उसे पहचान लेता है और पानी बहने लगता है. हाथ हटाते ही पानी अपने आप बंद हो जाता है. इससे एक तरफ लोगों को नल छूने से राहत मिलती है, वहीं दूसरी तरफ पानी बेवजह बहने की संभावना भी कम हो जाती है.
बिना हाथ लगाए कैसे खुलते हैं वॉशरूम के दरवाजे?
स्मार्ट वॉशरूम की दूसरी खासियत टचलेस डोर सिस्टम है. इसके डिजाइन के आधार पर दरवाजे मोशन सेंसर से अपने आप खुल सकते हैं या इस तरह बनाए जा सकते हैं कि लोगों को बार-बार हैंडल पकड़ने की जरूरत न पड़े. इसका मकसद ऐसी सतहों से सीधा संपर्क कम करना है, जिन्हें दिनभर बड़ी संख्या में लोग इस्तेमाल करते हैं. एयरपोर्ट जैसे व्यस्त स्थानों पर यह सुविधा खास तौर पर काम आ सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वॉशरूम में हर चीज को बिना छुए इस्तेमाल किया जा सकता है. अलग-अलग जगहों पर लगे सिस्टम का तरीका भी अलग हो सकता है. इसके अलावा सेंसर को सही ढंग से काम करने के लिए समय-समय पर जांच और मेंटेनेंस की जरूरत होती है.
सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, वॉशरूम सुधारने की बड़ी योजना
मुंबई एयरपोर्ट पर इन सुविधाओं की चर्चा के पीछे वॉशरूम को बेहतर बनाने की एक बड़ी योजना भी है. अप्रैल 2025 में एयरपोर्ट ऑपरेटर मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AERA) को दिए गए प्रस्ताव में टर्मिनल टू के 41 यात्री वॉशरूम ब्लॉक के रिनोवेशन का प्लान रखा था. इसके मुताबिक, यात्रियों की भारी आवाजाही के कारण वहां लगे नल, फिटिंग और दूसरी सुविधाएं लगातार इस्तेमाल से खराब हो रही थीं. पाइपलाइन में टूट-फूट और दीवारों के अंदर होने वाले लीकेज के कारण भी रखरखाव में परेशानी आ रही थी. इस प्लान में आधुनिक फिटिंग और स्मार्ट वॉशरूम से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं. इसमें टचलेस सिस्टम के साथ स्मार्ट मिरर जैसी तकनीक भी शामिल की गई. AERA के आकलन में पहले उन जगहों पर काम को प्राथमिकता देने की बात कही गई, जहां यात्रियों की आवाजाही ज्यादा रहती है.
पानी बचाने के लिए भी इस्तेमाल हो रही तकनीक
एयरपोर्ट पर स्मार्ट नल लगाने का मकसद सिर्फ लोगों को बेहतर अनुभव देना नहीं है. पानी की बचत भी इसकी एक अहम वजह है. मुंबई एयरपोर्ट पहले से ही पानी की खपत कम करने के लिए कई तरीके अपना रहा है. इनमें पानी के बिना काम करने वाले यूरिनल, नलों में लगे एरेटर और जेट स्प्रे में फ्लो रिड्यूसर जैसे उपाय शामिल हैं. सेंसर वाले नल भी इसी दिशा में मदद कर सकते हैं, क्योंकि जरूरत पड़ने पर ही पानी बहता है. इसके अलावा एयरपोर्ट ऑपरेटर ने ट्रीट किए गए गंदे पानी को दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था की जानकारी भी दी है. इस पानी का इस्तेमाल फ्लशिंग, कूलिंग और हरियाली बनाए रखने जैसे कामों में किया जा सकता है. हालांकि, इन उपायों से कितना फायदा होगा, यह सिस्टम की सही फिटिंग, रेगुलर देखभाल और उसके इस्तेमाल पर भी निर्भर करता है.
तकनीक आ गई, अब सफाई कौन रखेगा?
स्मार्ट वॉशरूम की सुविधाओं को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं. कुछ लोगों को यह बदलाव अच्छा लग रहा है. उनका मानना है कि पब्लिक जगहों पर ऐसी सुविधाएं यात्रियों की परेशानी कम कर सकती हैं. दूसरी ओर, कुछ लोगों का सवाल है कि क्या आधुनिक नल और दरवाजे लगाने भर से वॉशरूम साफ रहने लगेंगे? उनका कहना है कि अगर लोग खुद सफाई का ध्यान नहीं रखेंगे तो महंगी तकनीक भी ज्यादा मदद नहीं कर पाएगी. एक और व्यावहारिक परेशानी भी है. हर यात्री को सेंसर वाले नल या ऑटोमैटिक दरवाजे इस्तेमाल करने का अनुभव नहीं होता. ऐसे में पहली बार आने वाले लोग समझ नहीं पाते कि पानी कैसे चालू होगा या दरवाजा कैसे खुलेगा. साफ निर्देश और संकेत इस परेशानी को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
क्या टचलेस वॉशरूम ज्यादा साफ रहते हैं?
टचलेस तकनीक का फायदा यह है कि कुछ जगहों पर लोगों को बार-बार हाथ लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. इससे साझा सतहों के संपर्क को कम किया जा सकता है. सेंसर वाले नल पानी की बर्बादी घटाने में भी मददगार हो सकते हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. टचलेस होने का मतलब अपने आप साफ होना नहीं है. वॉशरूम में फर्श, वॉशबेसिन और दूसरी सतहों की नियमित सफाई जरूरी रहती है. पाइपलाइन ठीक होनी चाहिए, पानी की सप्लाई बनी रहनी चाहिए और खराब फिटिंग को समय पर ठीक करना भी जरूरी है. अगर सेंसर काम करना बंद कर दें या दरवाजों में खराबी आ जाए तो यात्रियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए तकनीक के साथ मेंटेनेंस पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)